7-7.5% आर्थिक वृद्धि के साथ भारत होगा सबसे तेजी से बढने वाली अर्थव्यवस्था | India will become fastest growing economy with 7-7.5 percent of GDP

7-7.5% आर्थिक वृद्धि के साथ भारत होगा सबसे तेजी से बढने वाली अर्थव्यवस्था: आर्थिक सर्वे

हालांकि ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल के चढ़ते दाम और नित नई रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच रहे शेयर बाजार में अचानक गिरावट के खतरे को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये बड़ी चुनौती भी बताया गया है.

By: | Updated: 29 Jan 2018 06:33 PM
India will become fastest growing economy with 7-7.5 percent of GDP

नई दिल्लीः संसद में आज पेश आर्थिक समीक्षा में उम्मीद जताई गई है कि 2018-19 में 7 से 7.5 फीसदी आर्थिक वृद्धि हासिल करने के साथ भारत एक बार फिर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा. हालांकि ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल के चढ़ते दाम और नित नई रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच रहे शेयर बाजार में अचानक गिरावट के खतरे को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये बड़ी चुनौती बताया गया है.


साल 2018-19 का आम बजट पेश होने से दो दिन पहले संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में राजकोषीय घाटे को कम करने की राह में थोड़े विराम की संभावना से इनकार नहीं किया गया है. गौरतलब है कि यह 2019 के आम चुनाव से पहले का आखिरी पूर्ण बजट होगा. आम बजट एक फरवरी को पेश किया जाएगा. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 की आर्थिक समीक्षा को आज संसद में पेश किया. समीक्षा को मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियम और उनकी टीम ने तैयार किया.


समीक्षा में चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि 6.75 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. इसमें कहा गया है कि आने वाले साल में निर्यात के साथ साथ निजी क्षेत्र का निवेश गति पकड़ेगा. इससे पहले केन्द्रीय सांख्यकी कार्यालय (सीएसओ) ने चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जारी किया. इस लिहाज से आर्थिक समीक्षा में अनुमान इससे ऊंचा आया है.


इससे पिछले साल 2016-17 में जीडीपी वृद्धि 7.1 फीसदी रही थी और उससे पिछले साल यह 8 फीसदी और 2014-15 में 7.5 फीसदी रही थी. चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि पर जीएसटी लागू होने और उससे पहले नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी के बाद का असर रहा.


arvind subramanyam


आर्थिक समीक्षा संसद के पटल पर रखे जाने के बाद अरविंद सुब्रमणियम ने कहा, ‘‘अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार आ रहा है. नोटबंदी और जीएसटी का अस्थाई प्रभाव समाप्त होता दिख रहा है.’’


नोटबंदी से बढ़ी टैक्सपेयर्स की संख्या, घरेलू बचत में भी आई तेजी
संसद में आज पेश आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गयी है कि नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी से टैक्सपेयर्स का दायरा बढ़ा है और घरेलू बचत में भी इजाफा हुआ है.


समीक्षा में कहा गया, ‘‘समग्र घरेलू बचत में वित्तीय बचत की हिस्सेदारी पहले ही बढ़ रही है और बाजार के प्रति स्पष्ट झुकाव हो रहा है. नोटबंदी ने इसे भी बढ़ावा दिया है.’’ मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के नेतृत्व में लिखी गयी समीक्षा में कहा गया है, ‘‘मौसमी उतार-चढ़ाव को छोड़ दिया जाए तो नये टैक्सपेयर्स में मासिक आधार पर 0.8 फीसदी की वृद्धि होनी चाहिए जो सालाना आधार पर करीब 10 फीसदी होता है. हालांकि नवंबर 2017 में नवंबर 2016 की तुलना में 31 फीसदी नये टैक्सपेयर्स जुड़े. आंकड़ों में यह बड़ा अंतर महत्वपूर्ण है.’’


समीक्षा में कहा गया, ‘‘नोटबंदी और जीएसटी के कारण करीब 18 लाख अतिरिक्त टैक्सपेयर्स जुड़े हैं जो कुल टैक्सपेयर्स का तीन फीसदी है.’’ समीक्षा में कहा गया कि नये टैक्सपेयर्स ने अधिकांश मामलों में औसत आय करीब 2.5 लाख रुपये दिखाई जिससे राजस्व पर शुरुआती प्रभाव पड़ा. जैसे-जैसे इनकी आय बढ़ेगी और ये आयकर दायरे में आएंगे, राजस्व में तेजी से इजाफा होगा.


समीक्षा में कहा गया कि नोटबंदी और जीएसटी का मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को टैक्स के दायरे में लाना था और इसमें फिलहाल तो कामयाबी मिलती दिखी है.


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