एबीपी न्यूज व्यक्ति विशेष: ‘आप’ की महाभारत!  

By: | Last Updated: Saturday, 14 March 2015 3:34 PM
aam adami party and sting

किताबों के पन्नों में दबी महाभारत एक ऐसे भीषण युद्ध की दास्तान हैं जिसमें अपनों ने ही अपनों के खिलाफ हथियार उठाए हैं. महाभारत की इस कहानी में खून के रिश्तों से जुड़े किरदार सत्य के लिए लड़ते तो कहीं सत्ता के लिए जीते और मरते नजर आते हैं. सत्ता की बिसात पर रिश्तों के धागों से बुनी हुई महाभारत की ये कहानी सदियों से लोगों को प्रेरित करती रही है महाभारत की इस दास्तान में सत्ता के लिए जंग और रिश्तों का मार्मिक अंत दर्ज है. कहते हैं महाभारत की ये जंग हस्तिनापुर में लड़ी गई थी. जो आज के हरियाणा में मौजूद है और हरियाणा से सटे दिल्ली में ही लड़ी जा रही है आज की महाभारत. यूं तो दिल्ली की इस महाभारत के किरदार अलग है. इस जंग का स्वरुप भी अलग है लेकिन राजनीति की इस जंग में वो लोग ही एक दूसरे के खिलाफ सीना ताने खड़े हैं जो महज चंद दिनों पहले तक एक थे.

 

योगेंद्र यादव.. ये वो लोग है जो एक ही मंच से अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे लेकिन बदले हालात में जहां अरविंद केजरीवाल और योगेंद्र यादव आप की इस महाभारत में आमने – सामने खड़े हैं तो वहीं इनसे अलग आप के वो सिपाही भी मैदान में अपनी ताल ठोंक रहे हैं जिन्होंने साल 2014 में केजरीवाल का साथ दिया था.

 

कहा जाता है कि महाभारत की जंग तीर, तलवार और गदा जैसे हथियारों से लड़ी गई थी लेकिन आप की ये जंग कलम, कैमरों और माइक्रोफोन के सहारे लडी जा रही है जिस तरह महाभारत में पूरी सृष्टि का विनाश कर देने वाले हथियार ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल हुआ था ठीक उसी तरह आप की इस महाभारत में स्टिंग बन गया है एक ब्रह्मास्त्र.

 

एक महीना गुजरने के बाद वादों के किस पायदान पर खड़ी है आम आदमी पार्टी की सरकार. कभी स्टिंग को हथियार की तरह इस्तेमाल करने वाली आम आदमी पार्टी खुद अपने इसी हथियार से बुरी तरह लहुलुहान होती नजर आ रही है क्योंकि दूसरे दलों के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन करने के लिए मशहूर अरविंद केजरीवाल खुद अपने ही विवादित बयानों के साथ ऑडियों टैप में कैद हो गए हैं. स्टिंग ऑपरेशन केजरीवाल की राजनीति की सबसे बड़ी नीति रही हैं लेकिन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने आम जनता को स्टिंग ऑपरेशन का जो मंत्र दिया था आज वहीं मंत्र खुद केजरीवाल के लिए मुसीबत बन गया है.

 

आम आदमी पार्टी और उसके नेता अरविंद केजरीवाल स्टिंग के चक्रव्यूह में बुरी तरह उलझ चुके हैं. केजरीवाल को लेकर एक के बाद एक ऑडियो टेप सामने आ रहे हैं. यही वजह है कि जहां केजरीवाल बैंगलुरु में नैचरोपैथी के जरिए अपना इलाज कराते रहे वहीं इधर दिल्ली में उनकी पार्टी में स्टिंग का मर्ज लाइलाज होता चला गया. 

 

कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान के दावे पर भी अगर यकीन करें तो आप के खिलाफ अब तक कुल तीन स्टिंग सामने आए है. आम आदमी पार्टी के विधायक रह चुके राजेश गर्ग के जरिए उनकी केजरीवाल के साथ जो ऑडियों रिकॉर्डिंग सामने आई है उसमें अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के 6 विधायकों को तोड़ने की बात कह रहे हैं.

 

स्टिंग नंबर 2- कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान ने आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह की वीडियो रिकॉर्डिंग करने का दावा किया है जिसमें संजय सिंह ने उन्हें कांग्रेस विधायकों को तोड़ने पर मंत्री बनाने का लालच दिया. हांलाकि आसिफ की ये कथित स्टिंग अभी पेन ड्राइव में बंद है.

 

स्टिंग नंबर 3 – तीसरी रिकॉर्डिंग आप पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव शाहिद आजाद ने जारी कि है. शाहिद दावा है कि पार्टी की एक बैठक में अरविंद केजरीवाल धर्म के नाम पर टिकट देने की बात कह रहे थे.

 

एक के बाद एक सामने आ रहे स्टिंग से आम आदमी पार्टी की नीयत और उसकी हरकत को लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं और वो इसलिए भी क्योंकि शुरु से ही केजरीवाल राजनीति बदलने की बात करते रहे हैं.

 

चौदह फरवरी 2015 को जब अरविंद केजरीवाल दूसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे तब सबकी निगाहें उनके चुनावी वादों पर टिकी थी. बिजली के बिल आधे करने, पानी मुफ्त देने और फ्री वाईफाई के इन तीन लोकप्रिय वादों में से उनकी सरकार बिजली और पानी के मुद्दे पर तो आगे बढी लेकिन फ्री वाईफाई के वादे पर उसकी गाड़ी अटकी हुई है.

 

आम आदमी पार्टी की सरकार का एक महीना पूरा हो चुका है लेकिन केजरीवाल की सरकार में एक भी बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली है. दरअसल 10 करोड़ से ज्यादा के बजट वाले किसी भी प्रोजेक्ट को वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली व्यय एंव वित्त समिति यानी ईएफसी की मीटिंग में रखा जाता है जहां इसका पास होना जरुरी होता है. अगर किसी प्रोजेक्ट की लागत 50 करोड़ रुपये या इससे अधिक होती है तो उसे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली ईएफसी में पास कराना जरुरी होता है.

 

लेकिन दिल्ली में केजरीवाल की सरकार के पहले एक महीने में ईएफसी कमेटी की कोई भी बैठक नहीं कराई गई है इस वजह से जहां 10 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाली कोई भी योजना पास नहीं हो सकी है.

 

दिल्ली में पिछले साल जब राष्ट्रपति शासन लगा था तब भी व्यय और वित्त समिति की तीन मीटिंग हुईं थीं जिसमें कई स्कूलों की नई बिल्डिंग का प्लान भी पास करवाया गया था. नई योजनाओं और प्रोजेक्ट को पास करवाना इस लिहाज से भी जरुरी है क्योंकि आम आदमी पार्टी ने अगले पांच सालों में पांच सौ नए स्कूल, 20 नए कॉलेज बनाने का वादा किया है इसके अलावा पिछले दो सालों से 1500 नई बसों का टेंडर भी अटका पड़ा है जिसे जल्द से जल्द मंजूर किया जाना जरुरी है.

 

आम आदमी पार्टी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में 70 वादे किए थे. जिन पर काफी काम करना बाकी है लेकिन पिछले चार हफ्तों में दिल्ली सरकार ने जो अहम फैसले लिए उनमें सबसे अहम बिजली, पानी का वादा हैं इसके अलावा- नई नीति के तहत 20 हजार 800 ई रिक्शा चालकों को लाइसेंस जारी किए गए. राशन कार्ड ऑनलाईन बनाने का काम शुरु हुआ. महिला सुरक्षा कि दिशा में दिल्ली पुलिस से दिल्ली में डार्क स्पॉट की सूची मांगी ताकि इन जगहों पर सरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा सके. डीटीसी की बसों में शाम छह से रात 12 बजे तक मार्शलों की तैनाती को लेकर प्रकिया शुरु की गई. दिल्ली सरकार के सभी 1007 स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश दिए गए और मनमानी फीस वसूलने वाले 200 निजी स्कूलों को नोटिस भेजा गया. लेकिन 500 नए स्कूल कॉलेज और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने जैसे कई अहम वादों के पूरा होने का इंतजार अभी लंबा है.

 

 

दरअसल मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने के बाद से ही केजरीवाल को तीन बड़े झटके लगे हैं यही वजह है कि उनकी सरकार के कामकाज से ज्यादा आज उनकी पार्टी में मचे घमासान की चर्चा ज्यादा हो रही है.  

 

झटका नंबर 1 – केजरीवाल को पहला झटका तब लगा जब पार्टी की अंदरूनी कलह खुल कर सड़क पर आ गई. इसके बाद योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे वरिष्ठ नेताओं को पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी से निकाल दिया गया.   

 

झटका नंबर –2 केजरीवाल को दूसरा झटका उस वक्त लगा जब उन्ही की पार्टी के पूर्व विधायक राजेश गर्ग ने उनका स्टिंग करके ऑडियो टेप जारी कर दिया. इस ऑडियो में केजरीवाल कांग्रेस विधायकों की खरीद फरोख्त की बात करते सुनाई दिए.

 

झटका नंबर – 3 और केजरीवाल को तीसरा झटका तब लगा जब स्टिंग ऑपरेशन सामने आने के बाद महाराष्ट्र में आप की कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया.

 

एक मशहूर कहावत है कि घर का भेदी लंका ढहाये. इन दिनों आम आदमी पार्टी पर ये कहावत बिल्कुल फिट बैठती नजर आ रही है. पार्टी के अंदर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. अंदरुनी कलह सामने आने के बाद अब पार्टी के लोग ही स्टिंग ऑपरेशन के जरिए अपने नेता अरविंद केजरीवाल को बेनकाब करने पर उतारु नजर आ रहे हैं.

 

आम आदमी पार्टी में इस घमासान की शुरुआत तब हुई जब योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण पर चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगा. पार्टी के ही कुछ नेताओं ने ये आरोप भी लगाया कि ये दोनों अरविंद केजरीवाल को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाने के लिए साजिश कर रहे हैं हालांकि केजरीवाल ने एक शख्स एक पद की नीति पर चलते हुए खुद ही राष्ट्रीय संयोजक पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी उन्होंने 27 फरवरी को लिखित इस्तीफा भी दिया था लेकिन आप की पिच पर केजरीवाल की जगह योगेंद्र यादव क्लीन बोल्ड हो गए. टीम केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि अरविंद केजरीवाल संयोजक के साथ सीएम भी बने रहेंगे. 

 

योगेंद्र यादव बताते हैं कि सारी चीजों में कोई कुर्सियों का मामला नहीं था. हमने प्रशांत जी ने चार पांच सिद्दांत के मुद्दे उठाए थे. हमने कहा था कि पार्टी में पारदर्शिता कैसे ला सकते हैं. आतंरिक लोकंत्र को कैसे मजबूत कर सकते हैं. राज्यों को स्वायत्तता कैसे मिले की राज्यों की इकाइयां स्वंय निर्णय ले सके. पार्टी में मर्यादा का जो तंत्र है उसको कैसे सुनिश्चित किया जा सके जिससे बाकी पार्टियों जैसे ना दिखाई दे. और पार्टी मे जो कार्यकर्ता है उसकी आवाज कैसे मजबूत हो. हमे बस यही सवाल उठाए थे और यही असली सवाल है.

 

जाहिर है योगेंद्र यादव ने पार्टी के अदंर जो सवाल उठाए वे कहीं ना कहीं टीम केजरीवाल को शूल की तरह चुभ रहे थे और इस बात का खुलासा भी आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य मयंक गांधी ने किया है. मयंक ने दावा किया है कि केजरीवाल की जिद पर ही योगेंद्र औऱ प्रशांत भूषण पीएसी से निकाले गए. उन्होंने अपने ब्लॉग पर लिखा कि प्रचार के दौरान प्रशांत भूषण ने उम्मीदवारों के चुनाव को लेकर पार्टी के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की कई बार धमकी दी थी. योगेंद्र पर पार्टी के खिलाफ साजिश रचने के आरोप लगे. 26 फरवरी की बैठक में केजरीवाल ने कहा था कि अगर प्रशांत और योगेंद्र पीएसी में रहे तो वो उनके साथ काम नहीं कर पाएंगे.

 

इस पूरे घटनाक्रम के बीच केजरीवाल इलाज कराने बैंगलोर चले गए लेकिन मुंबई में मयंक गांधी के ब्लॉक बम ने केजरीवाल खेमे के लिए मुश्किलें बेहद बढा दी. इसके बाद योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने भी शुरुवाती खामोशी के बाद मोर्चा खोल दिया. इन दोनों ने जो साझा बयान जारी किया है उसके मुताबिक- 

 

लोकसभा चुनाव में हार के बाद केजरीवाल दिल्ली में कांग्रेस के साथ दोबारा सरकार बनाना चाहते थे . पार्टी के विधायक भी उनके साथ थे . लेकिन देश भर के कार्यकर्ताओं के साथ हमलोगों ने विरोध किया. इसी के बाद से हमारे बीच मतभेद शुरू हुए .

 

अरविंद केजरीवाल को आम आदमी पार्टी का सबसे बड़ा नेता माना जाता है. उनके फैसलों पर ही पार्टी अपनी लाइन लेती देखी गई है. इसीलिए ये माना जा रहा है कि केजरीवाल की इस ताकत को चुनौती देने के लिए ही योगेंद्र और प्रशांत भूषण की जोडी ने पार्टी में विरोध का झंडा बुलंद किया है. योगेंद्र यादव पार्टी की राज्य ईकाइयों को ज्यादा स्वायत्ता देने के पक्ष में भी हैं जिससे पार्टी अपने फैसले खुद कर सके. वो देश भर में पार्टी के फैलाव और उसके चुनाव लड़ने के पक्षधर भी रहे हैं और यही वो बिंदु है जिनको लेकर योगेंद्र यादव और अरविंद केजरीवाल के बीच टकराव है. लेकिन आम आदमी पार्टी की ये राजनीति इससे भी कही ज्यादा गहरी है.

 

आम आदमी पार्टी की ये महाभारत जब सड़क पर आ गई तो फिर इसमें भी उस ब्रम्ह्मस्त्र का इस्तेमाल हुआ जिसकी बात खुद केजरीवाल भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के लिए करते रहे हैं. बुधवार के दिन जब केजरीवाल का पहला स्टिंग सामने आया तो आम आदमी पार्टी में जैसे हाहाकार मच गया. इस ऑडियो टेप में केजरीवाल आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक राजेश गर्ग से कांग्रेस के छह विधायकों को तोड़ कर समर्थन हासिल करने को कह रहे थे. 

 

केजरीवाल- मैं बताऊं आपको ..अब आप इसको.. 6 को अलग करवाने का ही शुरू करवाओ. 6 लोग अलग करके अपनी पार्टी बनाकर हमें बाहर से समर्थन कर दें. 

राजेश गर्ग- मैं प्लान करता हूं..मैं आज.

 

केजरीवाल- ये 6 लोग अगर अलग टूटकर…ये बीजेपी को जा रहे थे..बीजेपी में जा नहीं पाए क्योंकि इनमें तीन मुसलमान हैं.

राजेश गर्ग- तीन मुस्लिम हैं वो नहीं जाएंगे बीजेपी में. वो कह रहे हैं कि…

केजरीवाल- वो जा नहीं पाए तो वो 6 फिर हमें ही समर्थन कर दें बाहर से

राजेश गर्ग- हां…आज मैं इस पर थोड़ा बनाता हूं.

 

राजेश गर्ग के स्टिंग के अगले ही दिन आम आदमी पार्टी पर स्टिंग का दूसरा अटैक हुआ. ओखला से कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ खान ने आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह के स्टिंग का दावा किया. आसिफ का कहना है कि संजय सिंह ने उनसे कांग्रेस विधायकों को तोड़ने के लिए कहा था औऱ बदले में उन्हें नई सरकार में मंत्री बनाने का लालच दिया था. उन्होंने संजय सिंह के साथ बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया है.

 

एक के बाद एक स्टिंग में फंसती जा रही आम आदमी पार्टी के माइनारिटी सेल ने भी बगावत कर दी. सेल के जनरल सेक्रेटरी शाहिद आजाद ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक सनसनीखेज ऑडियो जारी किया है शाहिद आजाद का आरोप है कि केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को उनकी जनसंख्या के हिसाब से टिकट देने की बजाए नरेंद्र मोदी की दहश्त दिखा कर टरका.

 

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपना पहला एक महीना तो पूरा कर लिया है लेकिन मुख्यमंत्री केजरीवाल के काम की बजाए उनकी पार्टी में आया स्टिंग का भूचाल ज्यादा चर्चा में है. अरविंद केजरीवाल पर पार्टी के अंदर और बाहर दोनों तरफ से जोरदार हमले हो रहे है. फिलहाल केजरीवाल मीडिया में उठे इस तूफान से दूर अपना इलाज करा रहे है लेकिन उन पर जो आरोप लग रहे हैं, उनकी पार्टी पर जो सवाल खड़े हो रहे हैं उनका मुकम्मल जवाब सामने आना बाकी है. और केजरीवाल के लिए ये जवाब इसलिए भी जरुरी है क्योंकि स्टिंग सामने आने के बाद राजनीति का कीचड़ साफ करने का दावा करने वाले केजरीवाल की नीयत और उनकी पार्टी की हरकत पर ही सबसे बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है.

 

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