कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती...!

By: | Last Updated: Tuesday, 9 June 2015 4:00 PM
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नई दिल्ली: ‘लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’ पुराने समय में प्रख्यात कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कही हुई यह कविता एक बार फिर उस समय सच साबित हुई जब एक शख्स ने अपने मां-बाप का सपना पूरा करने के लिए 10वीं की परीक्षा 28वीं बार में पास की.

 

आज के दिन ही आई यह एक ऐसी खबर है जिसके दो चेहरे हैं. पहला दिल्ली के कानून मंत्री जीतेंद्र सिंह तोमर को लेकर है जिन्हें फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार कर लिया है और दूसरा महाराष्ट्र मंत्रालय में चपरासी के पद पर काम करने वाले अविनाश चोगले से जुड़ी है जिन्होंने मां-बाप का सपना पूरा करने के लिए 10वीं की परीक्षा 28वीं बार में पास की.

 

आपको बताते हैं कि इन दोनों के बीच कनेक्शन क्या है?

 

आज एक तरफ हैं महाराष्ट्र मंत्रालय में चपरासी के पद पर काम करने वाले अविनाश चौगुले और वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के कानून मंत्री जीतेंद्र सिंह तोमर हैं.

 

अविनाश सुर्खियों में इसलिए हैं क्योंकि 28 साल से दसवीं की परीक्षा देते आ रहे अविनाश इस बार पास हो गए हैं और उनकी इस हिम्मत और लगन के लिए खुद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने उन्हें बधाई दी है.

 

जबकि दिल्ली के कानून मंत्री जीतेंद्र सिंह तोमर इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि फर्जी डिग्री मामले में दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है. आपको बता दें कि तोमर पर आरोप है कि उनकी कानून की डिग्री फर्जी है. जिसके लिए कोर्ट ने तोमर को चार दिन की रिमांड पर भेज दिया है.

 

मामला कोर्ट में है फैसला कोर्ट ही करेगी कि डिग्री फर्जी है या नहीं लेकिन इन दोनों चेहरों की चर्चा इसलिए हो रही है कि 28 साल तक एक चपरासी दसवीं पास करने की कोशिश करता रहा इंतजार करता रहा लेकिन कभी फर्जीवाड़ा नहीं किया और दूसरी दिल्ली के कानून मंत्री की फर्जी डिग्री जैसे गंभीर मामले में गिरफ्तारी हुई है.

 

कौन हैं अविनाश चोगले?

 

जी हां! महाराष्ट्र के रहने वाले अविनाश चोगले वैसे तो इस समय मंत्रालय में चपरासी के पद पर कार्यरत है लेकिन बचपन से उनके उनके माँ-बाबा का सपना था वो क्लर्क बनें.

 

अपने मां-बाबा के सपने को पूरा करने के लिए अविनाश चोगले ने पहली बार 10वीं की परीक्षा साल 1987 में दी थी. आपको बता दें कि तब चोगले 4 विषयो में फेल हो गए थे.

 

हिंदी, इंग्लिश, मैथ्स और हिस्ट्री में फेल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और फिर 2-3 बार परीक्षा दी. कठिन परिश्रम और अथक मेहनत के बल पर अविनाश ने हिंदी, इंग्लिश और हिस्ट्री में सफलता तो हासिल कर ली लेकिन अभी भी वो मैथ्स के मकड़जाल को सुलझा नहीं पाएं.

 

मां बाप का सपना पूरा करने के लिए 28वीं बार में पास की 10वीं की परीक्षा

 

अविनाश के लिए मैथ्स अभी भी एक चुनौती थी और उन्होंने हार नहीं मानी और उन्होंने मंत्रालय में चतुर्थ श्रेणी के तौर पर 1990 में काम करना शुरू किया. आपको बता दें कि अविनाश के माँ-बाबा का सपना था वो क्लर्क बनें और क्लर्क के लिए 10वीं पास होना जरुरी था इसलिए अविनाश दसवी की परीक्षा बार-बार देते रहें.

 

अथक परिश्रम और दृढ़ निश्चय की बदौलत अविनाश चोगले ने 28 बार 10वीं की परीक्षा दी और आखिरकार 28वें बार में उन्होंने परीक्षा पास करके यह साबित कर ही दिया कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती…!

 

आपको बता दें कि अविनाश की इस लगन को देखते हुए खुद महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडनवीस ने उनकी सराहना की है. मुख्यमंत्री ने उनको बुलाकर उनका अभिनन्दन किया. आज अविनाश बहुत खुश है कि उन्होंने दसवीं की परीक्षा पास कर ली है. अब उन्हें आशा है कि उनका प्रमोशन होगा और वह क्लर्क बनकर अपने माँ-बाप का सपना पूरा करेंगे.

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