'होम्योपैथी एवं परामर्श से छूट सकती है स्मोकिंग की लत'

By: | Last Updated: Tuesday, 2 June 2015 1:22 PM
SMOKING

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: धूम्रपान की आदत छोड़ने का प्रयास कर रहे लोगों के लिए होम्यापैथी का उपचार भी मददगार साबित हो सकता है क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि परामर्श और होम्योपैथी उपचार से इस आदत से निजात पाया जा सकता है.

 

होम्योपैथी कंस्लटेंट डा. ए के गुप्ता के अनुसार होम्योपैथी दवाएं धूम्रपान छोड़ने या कम करने से उत्पन्न होने वाली कई परिस्थितियों एवं लक्षणों जैसे बेचैनी, घबराहट, थकान, चिड़चिड़ापन, पेट में खिंचाव, रक्तचाप एवं नब्ज दर में उतार.चढ़ाव का उपचार कर सकती हैं.

 

गुप्ता ने कहा, ‘‘ये लक्षण कुछ समय तक चलते हैं. समग्रता के आधार पर इन लक्षणों का होम्योपैथी से काफी सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है. कुछ ऐसी दवाएं होती हैं जो क्रमिक रूप से तंबाकू के प्रति अनिच्छा विकसित करती है और अन्य हालात का उपचार भी करती हैं.’’ बहरहाल, उन्होंने बल दिया कि लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करना उपचार की मुख्य चीज है.

 

गुप्ता ने कहा, ‘‘आत्याधुनिक उपचार पद्धतियां भी तब तक निर्थक रहेंगी जब तक रोगी सहयोग न करे. हमेशा के लिए निकोटिन की लत से निजात पाने के सरल लेकिन प्रभावी कदम उठाये जा सकते हैं जिनमें सिगरेट का कोई पैक अपने पास नहीं रखना और यदि सिगरेट पीने की बहुत तेज इच्छा उठ रही हो तो केवल एक सिगरेट खरीदना जैसे उपाय शामिल हैं.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘धूम्रपान के बाद टोटों को फेंके नहीं. उन्हें किसी पारदर्शी पात्र में एकत्र करें. उनको दिन, हफ्ते या महीने के अंत में देखने से भी प्रभाव पड़ता है.’’ उन्होंने कहा कि धूम्रपान छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए वह निशुल्क परामर्श शिविर लगाते हैं.

 

नेहरू होम्योपैथी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के मेडीसिन विभाग के रीडर डा मोहित माथुर ने बताया, ‘‘उपचार के साथ परामर्श बहुत महत्वपूर्ण होता है. रोगी को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण होता है. धूम्रपान और तंबाकू खाने की आदत को छोड़ने के लिए रोगी में दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए. पूरी तरह से दवाओं पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है. ’’ प्रक्रिया के प्रारंभ में उस परिस्थिति एवं कारण का विश्लेषण किया जाता है जब कोई व्यक्ति धूम्रपान शुरू करता है. इसके बाद परामर्श या दवाएं दी जाती है क्योंकि विभिन्न व्यक्तियों में अलग अलग लक्षण होते हैं.

 

उन्होंने कहा कि तंबाकू पैक पर चित्रात्मक एवं अन्य प्रकार की चेतावनी से मदद मिलती है क्योंकि इस बात की संभावना रहती है कि लोगों पर असर हो और वे अपनी आदत के बारे में सोचें.

 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने हाल में एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए तंबाकू कवर पर कड़ी चित्रात्मक चेतावनी देने की मांग की थी. इस सर्वेक्षण में पाया गया कि तंबाकू उत्पादों के सेवन के कारण युवाओं में प्रजनन क्षमता घटने एवं जल्द उम्रदराज होने के लक्षण उत्पन्न होने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है.

 

इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी में छह दिन का शिविर आयोजित किया जा रहा है. इसमें किसी भी प्रकार के तंबाकू सेवन को त्यागने के इच्छुक लोगों को सलाह मशविरा देने के लिए होम्योपैथिक विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे.

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