इन बातों का रखें ध्यान, बने रहेंगे जवान!

By: | Last Updated: Saturday, 11 October 2014 12:06 PM
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नई दिल्ली: क्या आपसे छोटे आपको भईया बुलाते हैं? क्या आप अपनी वास्तविक उम्र से बड़ा दिखने लगे हैं? यह कोई बिमारी नही बल्कि आपकी लापरवाहीयों  का नतीजा है. जी हां! अपनी दिनचर्या में कुछ बातों का ध्यान रखकर आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं.

 

आज के मॉडर्न जीवन में बहुत से ऐसे लोग हैं जो स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पाते हैं और समय से पहले ही बुढ़ापे के रोगों की चपेट में आ जाते हैं. बुढ़ापे के रोग यानी जल्दी बाल सफेद होना, शरीर कमजोर हो जाना, जल्दी थकान हो जाना, चेहरा निस्तेज हो जाना, पाचन तंत्र बिगड़ जाना, आंखें कमजोर हो जाना आदि.

 

आम तौर पर ये सभी रोग बुढ़ापे की अवस्था में होते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं है. जवानी के दिनों में ही बहुत से युवा इन रोगों से पीडित हो रहे हैं. इनसे बचने के लिए स्वास्थ्य संबंधी सावधानी रखनी चाहिए. 64 प्रकार के रोग होते हैं, जिनसे बुढ़ापा आता है और शरीर अस्वस्थ होता है.

 

मुख्यत: वात, पित्त और कफ ये तीनों रोग के तीन प्रकार हैं.

 

कफ बढ़ाने वाले सामान्य काम

 

– यदि कोई व्यक्ति भोजन के बाद तुरंत नहा लेता है तो इससे कफ बढ़ता है.

– बिना प्यास के जल पीना.

– बासी भोजन करना.

– शरीर पर तिल के तेल से मालिश करना.

– बहुत अधिक पके हुए केले खाना.

– रात को सोने से पहले दही का सेवन करना.

– वर्षा के जल में भीगना.

– अत्यधिक मूली खाना.

 

इन कामों से कफ की वृद्धि होती है. कफ के कारण पौरुष शक्ति कम होती है और व्यक्ति जल्दी बुढ़ा होता है. अत: इन सभी कामों से बचना चाहिए.

 

पित्त बढ़ाने वाले काम

 

यदि कोई व्यक्ति अधिक समय तक भूखा रहता है, समय पर संतुलित भोजन नहीं करता है, दूषित खाना ग्रहण करता है तो पित्त का प्रकोप हो सकता है. अत: खान-पान के समय के विषय में खास सावधानी रखनी चाहिए.

 

वात बढ़ाने वाले काम

 

– लगातार दुखी रहना. सदैव चिंता करना.

– बहुत अधिक रूखा भोजन करना.

– अधिक उपवास करना.

– अत्यधिक डर-डरकर जीवन व्यतीत करना.

इन कामों से वात यानी वायु रोगों की उत्पत्ति होती है. तीन प्रकार के वात रोग बताए गए हैं. पहला है शारीरिक क्लेश से उत्पन्न होने वाला वात रोग. दूसरा है मानसिक संताप से उत्पन्न होने वाला वात रोग. तीसरा है कामजनित वात रोग.

 

उपाय

 

भोजन के तुरंत बाद पैदल चलना, दौड़ना, आग तापना आदि. भोजन के तुरंत बाद कुछ देर वज्रासन में बैठना चाहिए. ऐसा करने पर वात रोग नहीं होते हैं.

 

सामान्य काम जो वृद्धावस्था को रखते हैं दूर

 

– वृद्धावस्था से बचने के लिए नेत्रों को साफ जल से धोते रहना चाहिए.

– प्रतिदिन कुछ समय व्यायाम करें.

– समय-समय पर पैरों के तलवों पर तेल मालिश करना चाहिए.

– समय-समय पर दोनों कानों में तेल डालना चाहिए.

– बालों की तेल मालिश करना चाहिए.

– भोजन भूख लगने पर ही ग्रहण करना चाहिए.

– भोजन के बाद पान का सेवन फायदेमंद होता है.

– नियम-संयम से जीवन व्यतीत करना चाहिए.

– ताजा मक्खन और मिश्री का सेवन करते रहना चाहिए.

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