शहाबुद्दीन को श्रद्धांजलि: ऐसे बेबाक जिनमें हर बड़ी ताक़तों से टकरा जाने का हौसला था

Sunday, 5 March 2017 4:21 PM | Comments (0)
शहाबुद्दीन को श्रद्धांजलि: ऐसे बेबाक जिनमें हर बड़ी ताक़तों से टकरा जाने का हौसला था

अब्दुल वाहिद आज़ाद

सीनियर प्रोड्यूसर, एबीपी न्यूज़

मौत एक अटल हकीकत है और जो भी इस दुनिया में आया है, उसे एक दिन इस दार-ए-फानी से जाना पड़ता है. लेकिन कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं कि जिनके चले जाने का ग़म मुद्दतों सताता रहता है. सैयद शहाबुद्दीन का इंतेकाल भी भारत के मुसलमान के लिए ऐसा ही दर्द है.

सैयद शहाबुद्दीन की शख्सियत के कई रंग हैं. ये आपकी ही शख्तियत का कमाल है कि आपके वैचारिक विरोधी भी आपका ज़िक्र निहायत ही इज़्ज़त और एहतराम से करते हैं और आप से बेइंतेहा मुहब्बत करने वाले भी खफा-खफा से हो जाते हैं. भारतीय मुसलमानों के बीच आपकी हैसियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के बाद जितने भी बड़े मुस्लिम रहनुमा हुए उनमें आपका नाम पहली पंक्ति के नेताओं में शुमार होता है. बल्कि उत्तर भारत के मुसलमान डॉक्टर जाकिर हुसैन के बाद आपको ही अपना क़ायद मानते हैं.

यूं तो शहाबुद्दीन छात्र जीवन से ही सियासी और समाजी मुद्दों को लेकर आवाज़ उठाते रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी जिंदगी के सफर में हर मोड़ पर जिस खूबी की सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ी वो उनकी बेबाकी थी. शहाबुद्दीन का जुनून ऐसा कि समंदर की खतरनाक लहरें हों या जंगल की खामोशी हो या पहाड़ों की अना… बिना अंजाम की परवाह किए तने-तनहा लड़ जाते थे और इसकी नींव छात्र जीवन में ही पड़ गई. तभी तो पहली ही मुलाकात में पंडित नेहरू ने न सिर्फ पहचान लिया बल्कि उन्हें ‘बिहार का नॉटी ब्वॉय’ तक कहा. एमएससी तक हर जगह गोल्ड मेडिलिस्ट रहे शहाबुद्दीन ने 1955 में पटना यूनिवर्सिटी में छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया और इसी वजह से उनका आईएफएस में ज्वाइन करना नामुमकिन सा हो गया था. एक साल तक उन्हें ज्वाइन नहीं कराया गया.

बाबरी मस्जिद और शहाबुद्दीन

जिस वजह से शहाबुद्दीन सबसे ज्यादा याद किए जाएंगे या कोसे जाएंगे उनमें बाबरी मस्जिद बनाम राम जन्म भूमि आंदोलन और शाहबानो केस के दौरान उनके नेतृत्व का मुद्दा सबसे अहम होगा.

जब 80 के आखिरी दशक और 90 के शुरुआती दशक में जय श्री राम जैसे धार्मिक नारे की गूंज से मुसलमान के घरों, मुहल्ले और बस्तियों में खौफ और सन्नाटा पसर जाता था, तब शहाबुद्दीन मुसलमानों के सबसे बड़े मसीहा और रहनुमा थे. उस नफरत, खौफ और मायूसी के दौर में जब सब ज़बानें सिली हईं थीं, शहाबुद्दीन अपने कलम और तर्क से डटे हुए थे, बल्कि दहाड़ रह थे. हालांकि, उस दौर के उनके सियासी अंदाज़ को लेकर उनके चाहने वाले भी सवाल उठाते हैं. उनकी बेबाकी, उनके जोश, जुरुअत और जुनून को कटघरे में खड़ा करते हैं. लेकिन यह भी हकीकत है कि वो ही लोग उनकी ईमानदारी और उनके इरादे पर फिदा हो जाते हैं और यहां तक कहते हैं कि मुसलमानों की तरक्की को लकेर उनमें मौलाना आज़ाद जैसी तदबीर (कोशिश) और अल्लमा इकबाल जैसी तड़प थी.

चाहने वाले क्यों नाराज़ हुए?

शहाबुद्दीन ने दो अहम मुद्दों पर सबसे ज्यादा लड़ाई लड़ी. बाबरी मस्जिद और शाहबानो केस. शाहबानो केस में वे सरकार को झुका तो पाए, लेकिन इसके बदले मुसलमानों की इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी. कानून के रखवालों के सामने बाबरी मस्जिद तोड़ी गई और देशभर में भारी दंगे हुए और इस तरह मुसलमानों के बुनियादी सवालों पर बहस नहीं हो सकी. हालांकि, मुसलमानों के एक तबके का मानना रहा कि 80 के दशक में शहाबुद्दीन की जो सियासी हैसियत थी अगर वो उस वक़्त मुसलमानों के शिक्षा, रोज़गार और आरक्षण जैसे मुद्दे को उठाते तो अपने समाज का ज्यादा भला कर पाते.

वो खूबी जिसका सभी कायल थे

शहाबुद्दीन एक ज़हीन शख्सियत के मालिक थे. इसका अंदाज़ा तो इसी से लगाया जा सकती है वो हमेशा गोल्ड मेडेलिस्ट रहे. भौतिकी शास्त्र में एमएससी करने के बावजूद अंग्रेजी, उर्दू, फारसी और अरबी के जानकार थे. उर्दू साहित्य से गहरी दिलचस्पी थी. हमेशा सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी मुद्दों पर लिखते रहे. लेकिन ये लिखना कोई आम लिखना नहीं था… इस मजबूती के साथ लिखते थे कि सरकारें हिल जाती थी. विरोधी की जबानें सिल जाती थीं. मुसलमानों की बदहाली का सच सच्चर कमेटी ने बताया, लेकिन उस रिपोर्ट से सालों पहले शहाबुद्दीन यही दावा करते रहे, और ज़बानी नहीं, बल्कि दस्तावेजों और आंकड़ों के साथ ये दावा किया. उनकी इस खूबी का सभी कायल रहे.

जब शाही इमाम से भिड़ गए

बाबरी मस्जिद आंदोलन के दौरान शहाबुद्दीन की लड़ाई सरकार से तो थी ही, लेकिन उस वक़्त के शाही इमाम अब्दुल्लाह बुखारी से भी उनकी खूब तनातनी रही. इंडिया गेट के वोट कल्ब पर धरने के दौरान तो दोनों बड़ी शख्सियतें गुत्थम गुत्था हो गई. लेकिन जब 2008 में शाही इमाम के निधन पर मैंने शहाबुद्दीन से इस वाक्य पर पूछा तो उनका कहना था कि इमाम साहिब से उनके रिश्ते अच्छे थे, लेकिन वो इस बात के खिलाफ थे कि मस्जिद के मेंबर को सियासत का अड्डा बनाया जाए.

क्यों मुसलमानों की सियासत

शहाबुद्दीन न बहुत धार्मिक थे और न ही टिपिकल मुसलमानों जैसा रहन सहन था. छात्र जीवन में अपने नेतृत्व क्षमता से सबको आगाह किया था. तब उन्हें कम्युनिस्ट होने का तमग़ा मिला, लेकिन उन्होंने इनकार किया और कहा कि वो सेकुलर समाजवादी हैं. आउटस्टेंडिंग वॉयस ऑफ मुस्लिम इंडिया में शहाबुद्दीन का कहना है कि उन्होंने कानून और संविधान के भीतर मुसलमानों के हक और इंसाफ की लड़ाई लड़ी और इसपर उन्हें गर्व है.

राजनीति में कैसे आए

आम लोगों में यही राय है कि शहाबुद्दीन को तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सियासत स्पॉंन्सर की. लेकिन खुद शहाबुद्दीन इससे इनकार करते हैं. ऑउटस्टेंडिंग वॉयस ऑफ मुस्लिम इंडिया में खुद शहाबुद्दीन लिखते हैं कि वाजपेयी से उनके रिश्ते बहुत ही मधुर थे, लेकिन वाजपेयी ने उन्हें तीन बार इस्तीफा वापस लेने के लिए समझाया. राजनीति में आने का फैसला उनका खुद का था. नौकरी से इस्तीफे के बाद दिल्ली के बजाए पटना को अपना ठिकाना बनया और यहीं से सियासत का आगाज़ किया.

इंदिरा गांधी से टकराहट

शहाबुद्दीन की शख्सियत ही ऐसी थी कि किसी से भी टकरा जाते थे. इंदिरा गांधी ने इसे भलीभांति भांप लिया था, तभी इंदिरा गांधी ने शहाबुद्दीन को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी से लेकर मंत्री बनने तक के कई ऑफर दिए. 2004 में भी लोकसभा चुनाव से पहले सोनिया गांधी ने शहाबुद्दीन से मुलाकात की थी और उनसे मदद मांगी थी.

विरोधी भी करते हैं सलाम

शहाबुद्दीन के कलम के सभी कायल थे. जब कुछ साल पहले उन्होंने अपनी मैगजीन मुस्लिम इंडिया को बंद करने का एलान किया तो उनके विरोधी विचारधारा के लेखक सुधेंद्र कुलकर्णी ने इंडियन एक्सप्रेस में लेख लिखकर उनकी काबलियत को सलाम किया था.

कईं किंवदंतियां हैं…

शहाबुद्दीन को लेकर कई किंवदंतियां भी हैं. कई पार्टियों में जाने और खुद की इंसाफ पार्टी बनाने को लेकर मुसलमानों के भीतर उनके नेतृत्व पर सवाल उठते रहे हैं. इसपर शहाबुद्दीन का ये जवाब उड़ाया जाता रहा है कि जब अपने बेटे की प्यास बुझाने के लिए पानी की आस में मां हाजरा सात-सात बार सफा और मरवा की पहाड़ियों पर दौड़ सकती हैं तो क्या मैं कौम की मुहब्बत में सियासी पार्टी भी नहीं बदल सकता.

ALL BLOG POST

BLOG: तीन साल, मोदी त्रिशूल...नीति, वादे और व्यक्तित्व
BLOG: तीन साल, मोदी त्रिशूल...नीति, वादे और व्यक्तित्व

असीम अपेक्षाएं. बेतरतीब समस्याएं. वादों की लंबी लाइन. उनमें ज्यादातर पूरे नहीं. इतना ही नहीं सभी दावे…

Tags: ABP News BJP blog hindi news Latest Hindi news Modi Government Narendra Modi news in hindi PM Modi Rajkishor three years of Modi government

ब्लॉग: तुम्हारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारी वाली से बड़ी कैसे?
ब्लॉग: तुम्हारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारी वाली से बड़ी कैसे?

संविधान में दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस बार भाजपा सांसद और लोकप्रिय अभिनेता परेश रावल…

Tags: blog Freedom Of Speech Paresh Rawal shehla rashid vijayshankar chaturvedi

मोदी सरकार के तीन साल, नहीं सुलझा बेरोजगारी का सवाल
मोदी सरकार के तीन साल, नहीं सुलझा बेरोजगारी का सवाल

मोदी सरकार अपने तीन साल पूरे होने का जश्न मना रही है. केंद्र की तरफ से इस मौके पर…

Tags: employment Narendra Modi PM Modi

 बड़े बड़े स्टार तो फेल हो गए फिर किसने बनाया मुंबई को चैंपियन?
बड़े बड़े स्टार तो फेल हो गए फिर किसने बनाया मुंबई को चैंपियन?

वरिष्ठ खेल पत्रकार, शिवेंद्र कुमार सिंह आईपीएल में सितारों से सजी टीमों में इस सीजन की चैंपियन…

Tags: Hardik Pandaya IPL 10 IPL 2017 jaspreet bumrah Karn Sharma Krunal Pandya mumbai indians top players young players

BLOG: सिर्फ चार ओवर में कैसे बदल गया चालीस ओवर का खेल?
BLOG: सिर्फ चार ओवर में कैसे बदल गया चालीस ओवर का खेल?

हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम में मुंबई इंडियंस ने बेहद रोमांचक मुकाबले में पुणे सुपरजाएंट को हराकर आईपीएल-10 का…

Tags: IPL IPL10 IPL2017 Jasprit Bumrah lasith malinga mitchell johnson MS Dhoni ROHIT SHARMA Steve Smith

तीन तलाक: उलेमा की नजर में सज़ा और जुर्माने से लगेगी लगाम!
तीन तलाक: उलेमा की नजर में सज़ा और जुर्माने से लगेगी लगाम!

इन दिनों तीन तलाक का मुद्दा मस्जिदों, मदरसों और पाठशालाओं की परिधि से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर…

Tags: AIMPLB blog Khursheed Alam Triple Talaq

BLOG: लड़के पढ़ेंगे लिखेंगे तो बनेंगे नवाब लेकिन लड़कियां हो जाएंगी खराब! कब सुधरेंगे हम?
BLOG: लड़के पढ़ेंगे लिखेंगे तो बनेंगे नवाब लेकिन लड़कियां हो जाएंगी खराब! कब सुधरेंगे हम?

हमारी बच्चियां जीत गई हैं. हरियाणा के रेवाड़ी में 80 लड़कियों की भूख हड़ताल खत्म हो गई…

Tags: blog Girls Education India Masha survey

BLOG: मुंबई के खिलाफ कहां-कहां चूक गए गौतम गंभीर
BLOG: मुंबई के खिलाफ कहां-कहां चूक गए गौतम गंभीर

दो बार की आईपीएल चैंपियन कोलकाता नाइटराइडर्स की टीम दूसरे क्वालीफायर में मुंबई इंडियंस के खिलाफ एक…

Tags: gautam gambhir IPL IPL 2017 kolkata knight riders mumbai indians ROHIT SHARMA

BLOG: क्या आज मैदान में लौटेगा सन ऑफ सरदार ?
BLOG: क्या आज मैदान में लौटेगा सन ऑफ सरदार ?

बैंगलोर के चिन्नास्वामी स्टेडियम में आज कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस की टीमें आमने सामने होंगी….

Tags: Harbhajan singh IPL IPL10 IPL2017 kolkata knight riders mumbai indians

BLOG: फाइनल से पहले ही देखने को मिलेगी चैंपियंस की लड़ाई
BLOG: फाइनल से पहले ही देखने को मिलेगी चैंपियंस की लड़ाई

शुक्रवार को आईपीएल का दूसरा क्वालीफायर खेला जाना है. बैंगलोर के चिन्नास्वामी स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट…

Tags: gautam gambhir IPL IPL2017 kkr MI play off ROHIT SHARMA

BLOG: जिसकी बॉलिंग इतनी ‘सुंदर’ वो कितना सुंदर होगा!!!
BLOG: जिसकी बॉलिंग इतनी ‘सुंदर’ वो कितना सुंदर होगा!!!

2013 का साल था. 13 साल के एक लड़के को तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन की तरफ से ‘बेस्ट स्कूल क्रिकेटर’…

Tags: IPL IPL10 IPL2017 RPS Washington Sundar

Blog: यात्रा करने मात्र से नर्मदा सदानीरा नहीं होनेवाली!
Blog: यात्रा करने मात्र से नर्मदा सदानीरा नहीं होनेवाली!

जब किसी भारतवासी को पाप धोने होते हैं तो वह पवित्र नदियों की तरफ भागता है. इसी तर्ज़ पर…

Tags: Narendra Modi Narmada River shivraj singh chouhan

BLOG : तीन तलाक के सहारे कहीं और है मोदी सरकार का निशाना!
BLOG : तीन तलाक के सहारे कहीं और है मोदी सरकार का निशाना!

तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लगातार चल रही सुनवाई अचानक भटकती नजर आने लगी…

Tags: Modi Government Muslims Narendra Modi government Triple Talaq

देर से ही सही दुरुस्त आया विराट कोहली का ‘गब्बर’
देर से ही सही दुरुस्त आया विराट कोहली का ‘गब्बर’

देर से ही सही लेकिन विराट कोहली का ‘गब्बर’ दुरूस्त वापस आ गया है. गब्बर को उसका इनाम भी…

Tags: champions trophy 2017 shikhar dhawan Team India Virat Kohli

BLOG: किन खिलाड़ियों के लिए अब बंद हो गए हैं टीम इंडिया के दरवाजे?
BLOG: किन खिलाड़ियों के लिए अब बंद हो गए हैं टीम इंडिया के दरवाजे?

गौतम गंभीर और हरभजन सिंह. इन दो खिलाड़ियों के लिए अब टीम इंडिया के दरवाजे बंद हो गए हैं….

Tags: champions trophy gautam gambhir Harbhajan singh IPL Team India Virat Kohli

BLOG: बैंगलोर का जो हाल हुआ वो तो ठीक है लेकिन विराट को क्या हो गया है?
BLOG: बैंगलोर का जो हाल हुआ वो तो ठीक है लेकिन विराट को क्या हो गया है?

एक आम भारतीय क्रिकेट प्रेमी की फिक्र इस वक्त यही है. बैंगलोर के टूर्नामेंट से बाहर होने और लगातार…

Tags: IPL IPL10 IPL2017 RCB Team India Virat Kohli

BLOG: ऋषभ पंत को स्टार बनाने से पहले जरूर याद करें कुछ और खिलाड़ियों का बीता कल
BLOG: ऋषभ पंत को स्टार बनाने से पहले जरूर याद करें कुछ और खिलाड़ियों का बीता कल

मुंबई के ख़िलाफ़ शनिवार के मैच में बग़ैर खाता खोले आउट होने से पहले एक करिश्माई पारी की बदौलत…

Tags: Delhi Dardevils delhi daredevils IPL IPL 2017 IPL10 IPL2017 mumbai indians Rishabh Pant

मर्द पीटता है...फिर माफी मांगता है, बेडरूम की बात ड्राइंगरूम तक भी नहीं पहुंच पाती?
मर्द पीटता है...फिर माफी मांगता है, बेडरूम की बात ड्राइंगरूम तक भी नहीं पहुंच पाती?

काश नेहा रस्तोगी मध्य प्रदेश के सागर में 2017 की अक्षय तृतीया के दिन ब्याही जाती तो…

Tags: blog domestic violence India Masha Women

World Press Freedom Day: भारत पत्रकारों की जन्नत कब बनेगा?
World Press Freedom Day: भारत पत्रकारों की जन्नत कब बनेगा?

आज ‘विश्व पत्रकार दिवस’ पर अकबर इलाहाबादी का अंग्रेजों के ज़माने में कहा गया यह शेर जहन…

Tags: World Press Freedom Day

जेपी के 'चेलों' की राह पर अन्ना के सियासी 'शिष्य'!
जेपी के 'चेलों' की राह पर अन्ना के सियासी 'शिष्य'!

आजकल आम आदमी पार्टी में सियासत के शतरंज पर दो ‘भाई’ अपने-अपने मोहरे बिछाने में लगे हुए…

View More

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017