अमेरिकी किसान और खाद्य उद्योग जीएमओ लेबल के खिलाफ एकजुट

By: | Last Updated: Friday, 7 February 2014 8:22 AM
अमेरिकी किसान और खाद्य उद्योग जीएमओ लेबल के खिलाफ एकजुट

वाशिंगटन: ग्राहको के बढ़ते दबाव और चीन के साथ चल रहे व्यापारिक विवाद के बीच अमेरिकी किसानों एवं खाद्य उद्योग ने जीएम (जेनेटिकली मोडिफाईड) उत्पादों पर लेबल लगाने के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा खोला है. अमेरिका के आधे से ज्यादा राज्य पिछले साल जीएमओ लेबल की जरूरत वाले बिल लेकर आए थे. अमेरिका में 80% खाद्य सामग्री जीएम उत्पादों से बनी होती है. हालांकि, सिर्फ दो ही राज्यों ने इन उपायों को पारित किया है और किसी ने भी अभी तक लेबल लगाने की व्यवस्था को लागू नहीं किया है. किसान इस संबंध में चिंतित हैं.

 

अमेरिका के 6 लाख किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाली अमेरिकन सोयबीन एसोसिएशन के अध्यक्ष रे गेसर ने कहा कि अगर हर राज्य में लेबल से जुड़ी अलग जरूरत होगी तो हमारे किसान उससे तालमेल नहीं बैठा पाएंगे. गेसर ने कहा कि हर राज्य में अलग लेबल नियम होने से कीमतों में 15-30% की वृद्धि होगी. सुरक्षित और सस्ते भोजन के लिए 30 सदस्यीय गठबंधन बनाने के लिए गेसर ने मक्का किसानों, बेकरों, रेस्तराओं, मत्स्य पालकों, पशु भोजन समूहों और किराने की दुकानों के समूहों को एक साथ जुटाया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जीएमओ से होने वाले नुकसान का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

 

ग्रॉसरी मैनुफैक्चर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पामेला बैली ने कहा कि इस मुख्य समूह का लक्ष्य ‘‘जीएमओ लेबल नियमों के लिए 50 राज्यों के अलग-अलग, गैर जरूरी और उलझाव वाले नियमों का विरोध है.’’ उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि सदस्य ऐसे संघीय हल की अपील कर रहे हैं, जो जीएमओ लेबलिंग को जरूरी बनाएगी. ऐसा तब होगा जब ‘‘अगर हमारे देश में खाद्य सुरक्षा का सबसे बड़ा प्राधिकरण एफडीए मानता है कि स्वास्थ्य या सुरक्षा को कोई खतरा है .’’ बेली ने कहा, ‘‘अब तक एफडीए ने कहा है कि जीएमओ तकनीक सुरक्षित है और किसी जीएम उत्पाद पर लेबल लगाना अनिवार्य किए जाने से भ्रम की स्थिति पैदा होगी.’’

 

यह बताते हुए कि कुछ ग्राहक जानना चाहते हैं कि आखिर उनके खाने में है क्या, बेली ने एफडीए से लेबलिंग के स्पष्ट मानक तय करने को कहा, जिन्हें कंपनियां ऐच्छिक तौर पर इस्तेमाल कर सकती हैं. अमेरिका में कई सालों से मक्का, सोयाबीन और चुकंदर को जैविक रूप से संवर्धित किया जाता रहा है. किसानों का कहना है कि ये परिष्कृत बीज कीटनाशकों और खराब मौसम को ज्यादा अच्छी तरह सहन कर सकते हैं. गेहूं एकमात्र ऐसी बड़ी फसल है, जिसके जैव संवर्धन की अनुमति नहीं मिली है क्योंकि इसका विदेशी निर्यातक (खासकर एशिया में) विरोध करते हैं. मक्का विदेशों में जीएमओ के रूप में स्वीकार की जाती है. चीन के साथ चल रहा विवाद अभी तक सुलझा नहीं है और इससे वश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है.

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Web Title: अमेरिकी किसान और खाद्य उद्योग जीएमओ लेबल के खिलाफ एकजुट
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