आज की फिल्में कहीं ज्यादा वास्तविक: जावेद अख्तर

आज की फिल्में कहीं ज्यादा वास्तविक: जावेद अख्तर

By: | Updated: 28 Apr 2013 03:02 AM

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<b>मुंबई: </b>मशहूर लेखक व
गीतकार जावेद अख्तर मानते
हैं कि कुछ वर्ष पहले बनी
फिल्मों की तुलना में आज की
फिल्में कहीं ज्यादा
वास्तविक हैं.
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शुक्रवार को 'बांबे टॉकीज' के
विशेष प्रदर्शन के मौके पर 68
वर्षीय अख्तर ने कहा, "आज की
फिल्मों में नाटकीयता नहीं
है. मैं अच्छी फिल्मों की बात
कर रहा हूं. आज की फिल्मों के
संवाद और चरित्र वास्तविकता
के करीब हैं."
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भारतीय सिनेमा में बदलाव के
संबंध में जावेद ने कहा, "इसका
कोई कठोर और स्पष्ट नियम नहीं
है. कुछ चीजें बदली हैं और कुछ
जस की तस हैं. दोनों में
हालांकि एक जुड़ाव है.
हमलोगों को आज भी पुरानी
फिल्में अपील करती हैं."
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जावेद महसूस करते हैं, "आज की
अच्छी फिल्मों का कुछ दूसरा
ही मिजाज है."
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जावेद ने 'अंदाज', 'सीता और
गीता', 'यादों की बारात',
'जंजीर', 'त्रिशूल', 'डॉन', 'काला
पत्थर' और 'शान' को कलमबद्ध
किया. इसके लिए उन्होंने अपनी
जोड़ी सलीम खान के साथ बनाई
थी. उन्होंने अकेले भी लेखन
कार्य किया. वे कई लोकप्रिय
गानों के रचयिता हैं.<br />
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