कोर्ट का सरकार से सवाल: क्या केवल फिल्म स्टार ही मानवीय बर्ताव के हकदार है?

By: | Last Updated: Saturday, 1 March 2014 5:05 AM

नागपुर: अभिनेता संजय दत्त के सिलसिले में महाराष्ट्र सरकार द्वारा नरम रूख अपनाए जाने का परोक्ष हवाला देते हुए बंबई उच्च न्यायालय ने 1993 के मुम्बई सिलसिलेवार विस्फोट कांड के एक अन्य मुजरिम को पैरोल दे दी है.

 

मोहम्मद याकूब अब्दुल मजीद नागुल की याचिका पर न्यायमूर्ति भूषण गवई और न्यायमूर्ति अतुल चंदूरकर की खंडपीठ ने कल कहा कि यह देखकर बड़ी तकलीफ हुई कि एक व्यक्ति अपनी बेटी गंवा चुका है लेकिन उसके बाद भी उसे पैरोल से वंचित किया गया.

 

संजय दत्त के मामले की ओर इशारा करते हुए खंडपीठ ने कहा, ‘‘क्या आपका कोई मानवीय दृष्टिकोण नहीं है या फिर केवल फिल्म स्टार ही हैं जिनके लिए आप मानवीय ढंग से कदम उठाते हैं.’’ विस्फोट कांड में ही अवैध हथियार रखने के जुर्म में दोषी ठहराए गए संजय दत्त की पैरोल की अवधि कई बार बढ़ायी गयी है.

 

मुम्बई निवासी नागुल उम्रकैद की सजा काट रहा है. उसके वकील मीर नागमन अली ने दलील दी कि नागुल की पत्नी ने पैरोल पर अपने पति की रिहाई की मांग करते हुए 14 फरवरी को नागपुर के संभागीय आयुक्त और जेल प्रशासन को पत्र लिखा था क्योंकि उनकी बेटी तीन दिन पहले गुजर चुकी थी. लेकिन दस दिन तक उस आवेदन पर कोई फैसला नहीं किया गया.

 

वकील ने बताया कि अदालत ने उसे तत्काल पैरोल देने का निर्देश दिया.

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Web Title: कोर्ट का सरकार से सवाल: क्या केवल फिल्म स्टार ही मानवीय बर्ताव के हकदार है?
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