… जब डिस्को में बजी रामधुन

By: | Last Updated: Friday, 13 September 2013 9:43 PM
… जब डिस्को में बजी रामधुन

<p style=”text-align: justify;”>
<b>नई
दिल्ली: </b>70 साल से ज्यादा का
वक्त बीत गया.  तब ना भारत में
डिस्को हुआ करते थे और ना इस
तरह रामधुन बजा करती थी.
गांधीजी के प्रिय भजन
‘रघुपति राघव राजा राम…’ ने
एक लंबा वक्त देखा है और इसी
वक्त का पहिया ऐसा घूमा है कि
अब युवाओं के लिए डिस्को में
इसके लफ्ज सुने जाएंगे… लोग
थिरकेंगे, गुनगुनाएंगे और
शायद आश्चर्य भी करें कि
रामधुन बॉलीवुड की फेवरेट
‘धुन’ बनती जा रही है.<br /><br />दो
हफ्ते के भीतर ही रिलीज हुई
तीन फिल्मों में भजन का
इस्तेमाल किया गया है. बस रूप
बदला है.. शब्द वही हैं..
प्रकाश झा की सत्याग्रह के
लिए गीतकर प्रसून जोशी ने
वक्त की तकलीफों को समेटा है
और ‘रघुपति राघव…’ का नया
वर्जन दर्शकों के सामने पेश
किया गया.<br /><br />पिछले ही
शुक्रवार की ‘सत्याग्रह’ के
ही साथ रिलीज हुई ‘जंजीर’ में
भी ‘रघुपति राघव..’ का
इस्तेमाल किया गया है.. ऐसा
समझ से परे है.. नायक जब अपने
काम पर या फिर यूं कहें कि
गुंडों की धुनाई के लिए जा
रहा होता है तो बैकग्राउंड से
‘रघुपति राघव…’ ट्रैक चलने
लगता है.<br /><br />कोई प्रासंगिकता
नहीं है फिर भी ‘नजर’ में
नायक के आने के लिए रामधुन
बजा दी जाती है ! थियेटर से
बाहर अब ऋतिक अपने सुपर अवतार
में रोमांस करने के लिए
इन्हीं शब्दों का प्रयोग कर
रहे हैं.. मुखड़ा कुछ ऐसा
है…’रघुपति राघव राजा
राम…नॉन स्टॉप पार्टी..आज की
पार्टी..सेलिब्रेशन तेरे
नाम…'<br /><br />यूट्यूब पर रिलीज
हुए इस गाने को पहले तीन
दिनों में 18 लाख लोगों से
ज्यादा ने देखा है. जाहिर है
इसमें गाने के मुखड़े
‘रघुपति राघव राजा राम’ का
कोई खास योगदान नहीं है और ना
ही हीरो ‘भजन’ गा रहा है! <br /><br />एक
रोमांटिक गाने में भावनाएं
जाहिर करने के लिए और शायद
तुकबंदी के लिए इत्तफाक से
इसे डाल दिया गया है.
सुपरहीरो और डांसिंग स्टार
का तमगा लिए ऋतिक जब इन
लाइनों पर थिरकते हैं तो
माहौल जोश से भर जाता है..
लेकिन इसमें रामधुन की जरूरत
समझ से परे है! हाल के सालों
में सूफी संगीत ‘दमादम मस्त
कलंदर’ का भी इसी तरह ‘दोहन’
किया गया है.<br /><br />पिछले तीस
सालों में पांच सौ से ज्यादा
फिल्मों के लिए चार हजार गाने
लिख चुके समीर ने भजन के साथ
ऐसा ‘खिलवाड़’ किया है! समीर
के सृजन पर पहले भी सवाल उठ
चुके हैं लेकिन शायद ये जवाब
मांगने का वक्त है कि चालू
गाना लिखने के लिए ऐसे शब्दों
का इस्तेमाल कितना जायज है! 
<br /><br />राकेश रोशन की
बहुप्रतीक्षित फिल्म में
संगीत उन्हीं के भाई राजेश
रोशन ने दिया है. राजेश रोशन
भी चालीस सालों से इंडस्ट्री
में सक्रिय हैं और उन्होंने
लंबा वक्त देखा है लेकिन हिट
गाने के लिए रामधुन के साथ
ऐसे ‘प्रयोग’ पर आश्चर्य
होना स्वाभाविक है. <br /><br />बीसवीं
सदी की शुरुआत में महात्मा
गांधी की रामधुन देश के रगों
में हमेशा के लिए रच बस गई थी.
आजादी के आंदोलन से जुड़ी ये
विरासत 17 सदी के संत रामदास से
जुड़ी हुई बताई जाती है.
उन्होंने पूरा भजन भगवान राम
की स्तुति में रचा था लेकिन
महात्मा गांधी के युग में इसे
आपसी भाईचारे के संदेश में
बदल दिया. उसी दौर में मराठी
संगीतकार डी वी पलुस्कर ने
रेडियो के माध्यम से इसे इसकी
जानी पहचानी धुन भी दी जो आज
भी लोकप्रिय है.<br /><br />भजन की
लोकप्रियता ने इसे फिल्मी
दुनिया तक भी पहुंचाया. पहला
जिक्र 1942 की फिल्म ‘भरत
मिलाप’ का है जिसमें राम की
अयोध्या वापसी के दृश्य में
इसका इस्तेमाल हुआ.<br /><br />वक्त
के साथ ये भजन भगवान राम से
कहीं ज्यादा साबरमती के उस
संत से ही जोड़कर देखा जाने
लगा जिसने इसे लोकप्रियता के
चरम पर पहुंचाया था और
‘जागृति’ में इस तरह रामधुन
सुनी गई थी.<br /><br />ये सिलसिला
बाद में रिचर्ड एटनबरो की
फिल्म गांधी और फिर हिंदी
फिल्म ‘गांधी माई फादर’ में
भी जारी रहा. अनमोल बोलों की
धरोहर बची भी रही और बदलाव भी
होते रहे. एक बड़ी कोशिश तो
खुद भारत कुमार यानी मनोज
कुमार ने की. उन्होंने इस
गाने का दर्द भरा संस्करण
तैयार किया।. <br /><br />‘पूरब और
पश्चिम’ फिल्म में मनोज
कुमार ने पश्चिमी साजों के
साथ प्रयोग किया लेकिन भजन के
शब्दों के इस्तेमाल से परहेज
कर गए. मामला सिर्फ संगीत का
ही रहा. सबसे चर्चित बदलाव 15
साल पहले 1998 में आई फिल्म ‘कुछ
कुछ होता’ में किया गया जब
पश्चिमी तेज संगीत की धुन में
पहली बार ढला ये भजन. और अब एक
हफ्ते के भीतर ही रामधुन
लगातार सुनी जा रही है.<br /><br />अन्ना-केजरीवाल
के आंदोलन में रामधुन के
इस्तेमाल ने गांधीजी के इस
भजन को आज भी प्रासंगिक बना
रखा है. सरकारी त्योहारों और
भाषण-रैलियों में भी रामधुन
बजती सुनाई पड़ जाती है लेकिन
पहली बार रामधुन को
व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए
बिना ठोस वजह के इस्तेमाल में
लाया गया है. <br /><br />इतने लंबे
वक्त में भजन के शब्दों को कई
तरीकों से इस्तेमाल हुआ और
संगीत तक लोकप्रिय होता रहा
है. अब कॉपीराइट के झंझट से
बचे गीतकार-संगीतकार इसका भी
संपूर्ण इस्तेमाल कर लेना
चाहते हैं।. <br /><br />‘रघुपति राघव
राजा राम…’ का इस्तेमाल
जाहिर तौर पर लोकप्रियता को
ख्याल में रखकर ही किया गया
है. मुमकिन है कि इसके पक्ष
में भी काफी लोग खड़े होंगे
और विरासत को ‘सहेजने’ का इसे
कारगर तरीका भी बताएंगे
लेकिन बात फिर उसी नीयत पर आ
जाती है जहां गाने हिट कराने
के लिए बॉलीवुड में तमाम
पैंतरे इस्तेमाल करना
पुरानी बात हो गई है.<br /><br />
</p>

Bollywood News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: … जब डिस्को में बजी रामधुन
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017