जब 51 सालों से बेघर कवि को फेसबुक ने पहुंचाया घर

By: | Last Updated: Thursday, 13 February 2014 9:55 AM
जब 51 सालों से बेघर कवि को फेसबुक ने पहुंचाया घर

नई दिल्ली: पिछले दिनों फेसबुक ने अपनी दसवीं सालगिरह मनाई है. इस मौके पर फेसबुक ने अपने यूजर्स को उनके यादगार लम्हों की मूवी बना ‘लुकबैक’ का शानदार तोहफा दिया था. अपने दस साल के बेहतरीन सफर में फेसबुक ने लोगों को जुड़ने के नए मौके दिये हैं  और कई बार इससे चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं.

 

 

 

 

 

हम आपको बता रहे हैं फेसबुक द्वारा चुनी गई टॉप दस कहानियों में से एक ब्राजील के एक कवि की कहानी. जानिए कैसे फेसबुक ने दी उनकी कविताओं को आवाज और फेसबुक के जरिये सोब्रिनो दोबारा अपने परिवार से कैसे मिले?

75 वर्षीय रैमुंडो अरुडा सोब्रिनो लगभग 35 साल से ब्राजील के साउ पाउलो में बेघर थे और रोज एक ही जगह पर बैठकर कविता लिखते रहते थे. वह 51 सालों से अपने परिवार से दूर थे और बेघरों की तरह जिंदगी जी रहे थे. अप्रैल 2011 में शाला मोंटेरियो नाम की एक महिला से उनकी दोस्ती हो गई.

 

 

 

 

शाला उनकी कविताओं से बहुत ज्यादा प्रभावित हुईं और सोब्रिनो की किताब छपने की ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उन्होंने ‘रैमिंडोज राइटिंग’ के नाम से एक फेसबुक पेज बनाया. शाला को ये नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला है.

 

फेसबुक पर पेज बनने के बाद सोब्रिनो के घर वालों ने उन्हें ढूंढ निकाला और अब वो अपने छोटे भाई, उनकी पत्नी और बच्चों के साथ अपने होम टाउन गुयानिया में रह रहे हैं.

 

शाला द्वारा बनाए गए फेसबुक पेज पर 2011 और 2012 में सोब्रिनो की कविताओं समेत कई इंटरव्यू की जानकारी मौजूद है. इसके अलावा ब्राजील में शूट किये गए कुछ दृश्य भी मौजूद हैं.

 

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