फिल्म समीक्षा: अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो कुछ ‘हटके’ हों, तो जरूर देखें 'हाइवे'

By: | Last Updated: Friday, 21 February 2014 6:53 AM
फिल्म समीक्षा: अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो कुछ ‘हटके’ हों, तो जरूर देखें ‘हाइवे’


रेटिंग- ढ़ाई स्टार

नई दिल्ली: निर्देशक इम्तियाज़ अली की ‘हाईवे’ एक नए तरह की फिल्म है. अंत तक पहुंचते हुए ये फिल्म, बड़े सलीके से कुछ अहम मुद्दों को छू जाती है. काश इस फिल्म की रफ़्तार तेज़ होती.

 

इम्तियाज़ की फिल्मों की विशेषता होती है कहानी के मुख्य किरदारों का सफ़र. चाहे वो ‘जब वी मेट’ की करीना हों, ‘लव आजकल’ के सैफ-दीपिका या ‘रॉकस्टार’ के रणबीर. हर एक सफ़र नए-नए रोमांटिक अनुभव दर्शाता है. ‘हाईवे’ में सफ़र पर निकले हैं रणदीप हुडा और आलिया भट्ट. मगर ये सफ़र पिछली फिल्मों से काफ़ी अलग और अनोखा है.

 

कहानी-

दिल्ली के अमीर बिज़नेस घराने की लड़की वीरा (आलिया भट्ट) की शादी कुछ दिन में होने वाली है. एक रात वीरा छुपकर मंगेतर के साथ घूमने निकल जाती है. उसी रात हाईवे के एक सुनसान पेट्रोल पंप पर उसका अपहरण कर लिया जाता है. उसका मंगेतर देखता रह जाता है, कुछ कर नहीं पाता. उसे अगवा करने वाला है महावीर भाटी (रणदीप हुडा) और उसके साथी. जब महावीर को पता चलता है कि वीरा अमीर बाप की बेटी है और पूरी पुलिस फोर्स उसके पीछे लग चुकी है तो वो घबरा जाता है. वीरा को कहीं रखने के बजाय अपने ट्रक में डालकर वो हाईवे पर दौड़ता रहता है.

शुरुआत में वीरा बेहद डरी हुई है, मगर जल्द ही उसे इस सफ़र में एक नई आजा़दी का अनुभव होता है. उसे महावीर को क़रीब से जानने का मौक़ा मिलता है और दोनों को अंदाज़ा होता है कि अपनी-अपनी जि़ंदगी में दोनों एक ही तरह के कड़वे अनुभवों से गुज़रे हैं. इस सफ़र पर दोनों में अपनेपन का रिश्ता बन जाता है. वीरा अब वापस नहीं लौटना चाहती. दोनों चाहते हैं कि हाईवे का ये खूबसूरत सफ़र कभी खत्म ना हो. मगर इस चाहत के पीछे उनके अतीत की घटनाएं भी हैं.

 

अभिनय-

फिल्म का पहला भाग बहुत बढ़िया है. फिल्म में आलिया भट्ट और रणदीप ने बहुत अच्छा अभिनय किया है. फिल्म में परिवार के सदस्य द्वारा शारीरिक शोषण का मुद्दा भी उठाया गया है. बड़े नए अंदाज़ में ये फिल्म दोनों किरदारों की आर्थिक और सामाजिक असामानता को समझाती है. ये भी बताती है कि किस तरह लड़कियां अपने घर में भी सुरक्षित नहीं हैं. कहानी में ये ट्विस्ट डाल कर निर्देशक इम्तियाज़ अली ने दर्शकों को झटका तो दिया है मगर जब तक ये ट्विस्ट आता है तब तक कहानी की धीमी रफ्तार से दर्शक बोर होने लगते हैं. साथ ही वो एक ही कहानी में अचानक बहुत ज़्यादा बातें कहना चाहते हैं. फिल्म का अंत भी जल्दबाज़ी में समेटा हुआ लगता है.

 

रणदीप और आलिया के साथ हाईवे भी फिल्म में एक किरदार ही है. फिल्म की सिनेमैटोग्राफी इतनी खूबसूरत है कि अक्सर धीमी रफ्तार से ध्यान हट जाता है. सांभर, बीकानेर, अजमेर, काज़ा, पहलगाम और अरू की सुंदरता देखते हुए कई बार आपको ऐसा लगेगा कि आप खुद एक सफ़र पर हैं.

 

संगीत-

इस सफ़र पर जो साथी आपके सबसे क़रीब आ जाएगा वो आपको दिखाई नहीं, बल्कि सुनाई देगा. संगीतकार ए आर रहमान का बैकग्राउंड म्यूज़िक और पटाका गुड्डी, सूहा साहा समेत फिल्म के दूसरे गीत बहुत मीठे हैं.

क्यों देखें-

ये एक नए अंदाज़ की शुद्ध रोमांटिक ‘रोड-मूवी’ है. मसाला फिल्में पसंद करने वालों को फिल्म की धीमी रफ्तार और ड्रामा और मनोरंजन का अभाव परेशान कर सकता है. यहां घटनाएं ऐसी शांत चलती है जैसे कोई सूफीयाना सफ़र हो. अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो कुछ ‘हटके’ हों, तो ये फिल्म ज़रूर देख लें. साथ में छ: राज्यों का शानदार सफ़र मुफ़्त मिलेगा.

 

(Follow Yasser Usman  on Twitter @yasser_aks, You can also send him your feedback at yasseru@abpnews.in)

 

Bollywood News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: फिल्म समीक्षा: अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो कुछ ‘हटके’ हों, तो जरूर देखें ‘हाइवे’
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: ????? ??????
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017