फिल्म समीक्षा: कंगना रानौत के लिए फिल्म ‘क्वीन’ को ज़रूर देखिए

By: | Last Updated: Friday, 7 March 2014 2:33 AM


रेटिंग:  साढ़े तीन स्टार

फिल्म ‘क्वीन’ में कंगना ने ये साबित किया है कि वो इस दौर की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक हैं. अगर उन्हें मज़बूत रोल दिए जाएं तो वो पूरी फिल्म संभाल सकती हैं. ये फिल्म आपको श्रीदेवी की फिल्म इंग्लिश-विंग्लिश की याद भी दिलाएगी. लेकिन एक बात तय है कि कंगना रानौत का किरदार अपनी सरलता से आपका दिल जीत लेगा.

कहानी:

ये कहानी है दिल्ली के राजौरी गार्डन की रानी (कंगना रानौत) की जिसकी दो दिन बाद विजय (राजकुमार राव) से शादी होने वाली है. रानी शादी के सपनों में खोई है. फ्रांस और एम्सटर्डम में हनीमून के पैकेज की बुकिंग भी करा चुकी है. लेकिन शादी से दो दिन पहले विजय उसे बताता है कि वो उससे शादी नहीं कर सकता. रानी को झटका लगता है लेकिन इससे उबरने के लिए वह अकेले ही फ्रांस और एम्सडर्डम जाने का फैसला करती है. इस फैसले में उसका परिवार भी उसका साथ देता है. आगे की फिल्म रानी के सफ़र की दास्तान है. फ्रांस में कल्चर शॉक, अंजानी भाषा, लोगों और मुश्किलों का सामना करके किस तरह वह अपना हौसला वापस पाती है, क्वीन में बड़े मज़ेदार तरीक़े से ये दर्शाया गया है.  

इस सीधी सी कहानी के कई सीन बहुत ही शानदार लिखे गए हैं. सबसे अहम बात इस फिल्म के कहानी में हीरोइन को जज नहीं किया जाता. वो जो कर रही है वो सही है या ग़लत. उसे परंपराओं का ख्याल रखना चाहिए या नहीं वगैरह-वगैरह. कंगना का किरदार असलियत के क़रीब लगता है और उसकी बेवफ़ूकी की हरकतों पर भी आपको उस किरदार से हमदर्दी होती है. इसके अलावा दादी का किरदार भी बहुत अच्छा है.

अभिनय-

कंगना ने कमाल कर दिया है. कॉमेडी सीन हों या फिर फिल्म का क्लाईमेक्स, कंगना इस फिल्म का पूरा बोझ अपने कंधे पर लेकर चली हैं. किस तरह उनकी बॉडी लैंग्वेज दुख से लेकर उत्साह और फिर हिम्मत और आज़ादी तक बदलती है, आप देख कर दंग रह जाएंगे. उनकी दोस्त के किरदार निभाने वाली लीज़ा हेडन भी पीछे नहीं रही हैं. राजकुमार राव का रोल बहुत ज़्यादा नहीं है मगर उन्होंने अच्छा अभिनय किया है.

 

अमित त्रिवेदी का म्यूजिक बहुत फ्रेश लगता है और फिल्म में उसका इस्तेमाल बेहतरीन है. खास तौर पर ‘लंदन ठुमकदा’ और ‘किनारे मिल गए’ बहुत असरदार है.


निर्देशन-

निर्देशक विकास बहल ने एक महिला प्रधान फिल्म में पूरा मनोरंजन करते हुए बेहतरीन संदेश दे दिया है. दिल टूटने से लेकर, अपनी शर्तों पर जीने का जज़्बा वापस पाने का, आत्मपरिवर्तन का जो सफ़र दिखाया है, वो क़ाबिले तारीफ़ है. ऐसा करते हुए ये फिल्म कहीं भी उपदेश नहीं देती. ये उनका निर्देशन ही है कि फिल्म में हीरो की कमी कहीं भी नहीं खलती.

 

ये इस साल की उम्दा फिल्मों से एक है. कंगना रानौत के लिए इस फिल्म को ज़रूर देखिए. कई सीन पर आप दिल से मुस्कुराएंगे.
 

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