ब्लॉग: क्या आम आदमी पार्टी को सर्विसिंग की जरूरत है?

By: | Last Updated: Thursday, 16 January 2014 5:05 PM

अरविंद केजरीवाल की पार्टी एक साल में दिल्ली में अपने पैर पर खड़ी हुई और दिल्ली के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया. बहुमत नहीं मिलने के बावजूद भी कांग्रेस से कशमकश के 20 दिन बाद दिल्ली में केजरीवाल मुख्यमंत्री बने लेकिन इतने ही दिन बाद आम आदमी पार्टी में बवाल शुरू हो गया.

 

पार्टी के गठन से लेकर सरकार बनाने तक पार्टी के अंदर और पार्टी के बाहर फीड गुड फैक्टर चल रहा था लेकिन अचानक बुधवार को पार्टी में भूचाल आ गया, यूं कहें तो बुधवार आम आदमी पार्टी के लिए काला दिन साबित हुआ. दिल्ली की सत्ता में आने के बाद से आम आदमी पार्टी के लिए हनीमून पिरीएड था लेकिन चौतरफा हमले से पार्टी में अफरातफरी मच गई. एक तरफ पार्टी के ही विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने केजरीवाल के खिलाफ विरोध का बिगुल बजा दिया तो टीना शर्मा ने पार्टी में बंद कमरे में फैसले लेने का आरोप लगाया वहीं हाल ही में पार्टी से जुड़ने वाले कैप्टन गोपीनाथ ने एफडीआई के मुद्दे पर दिल्ली सरकार के फैसले का विरोध कर दिया.

 

विरोध यहीं नहीं थमा बल्कि अमेठी में कुमार विश्वास पर अंडे फेंके गये वहीं कुरुक्षेत्र में योगेन्द्र यादव को और  ऋषिकेष में संजय सिंह- आशुतोष को विरोध झेलना पड़ा . रही कसर दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती और दिल्ली पुलिस के एक एसीपी के बीच हो गयी तीखी बहस से खत्म हुई.

 

बिन्नी क्यों विभीषण का रोल निभा रहें हैं?

 

विनोद कुमार बिन्नी जो भ्रष्ट्राचार के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल के साथ ताल में ताल मिलाकर चल रहे थे, अचानक बागी कैसे हो गये. क्या बिन्नी की नजर मंत्री पर टिकी थी या वो लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे या अरविंद केजरीवाल के तानाशाही रवैये से परेशान थे, जो भी वजह हो लेकिन अरविंद केजरीवाल टीम की नींद हराम हो ही गई. आम आदमी पार्टी के बागी नेता विनोद कुमार बिन्नी ने आज मुख्यमंत्री केजरीवाल पर जमकर हमला बोला.

 

बिन्नी ने केजरीवाल को तानाशाह से लेकर धोखेबाज तक करार दिया. बिन्नी ने केजरीवाल पर ये आरोप भी लगाया कि उन्होंने बिजली-पानी के मुद्दे पर जनता को धोखा दिया है. बिन्नी के हमले से तिलमिलाए योगेन्द्र यादव, आशुतोष और संजय सिंह केजरीवाल को बचाव में उतरना पड़ा. पार्टी ने फैसला किया है कि बिन्नी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा. बिन्नी का मामला शांत भी नहीं हुआ था दिल्ली कैंट से आप के विधायक कमांडो सुरेंद्र सिंह ने कहा है कि बिन्नी ने जो मुद्दे उठाए हैं वो सही हैं लेकिन उनका तरीका गलत है.

 

क्यों हो रहा है आम आदमी पार्टी में बवाल?

 

बीजेपी और कांग्रेस से अलग दिखने वाली आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के चुनाव में कमाल कर दिया और दिल्ली में जीत और सरकार बनाने के बाद पार्टी की लोकप्रियता देश में दिनोंदिन बढ़ती जा रही है ये अलग बात है कि आम आदमी पार्टी का असर बड़े शहरों में है जबकि ग्रामीण इलाकों में ना के बराबर है.

 

कहा जाता है कि बहुत तेज दौड़ने वाला व्यक्ति अक्सर मुंह के बल गिरता है. ये इसीलिए क्योंकि आम आदमी पार्टी सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहती है उसकी नजर दिल्ली के मुद्दों से दूर लोकसभा चुनाव और प्रधानमंत्री पद पर है. सस्ती लोकप्रियता के चक्कर में आनन-फानन घोषणाओं का पिटारा खोल दिया है लेकिन तेज दौड़ने की वजह से पार्टी में बवंडर खड़ा हो गया है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी पार्टी की जड़ मजबूत होने के दो वजहें होती है एक है विचारधारा और दूसरा है संगठन. सत्ता की भागमभाग में आम आदमी पार्टी ने ना तो विचारधारा बनाने की कोशिश की है और ना ही संगठन मजूबत किया है. पार्टी कमजोर नींव पर सपनों का महल बनाना चाहती है लेकिन नींव कमजोर होने से महल बनने से पहले ही दीवार दरकने लगी है, इसी का नतीजा है कि पार्टी में विरोध शुरू हो गया है.

 

क्या केजरीवाल को सबक सीखने की जरूरत है?

 

अरविंद केजरीवाल पार्टी की जीत की कई वजह है. एक वो कांग्रेस और बीजेपी के खिलाफ अल्टरनेटिव पार्टी खड़ा करना चाहते थे वो तो दिल्ली में खड़ी हो गई. भ्रष्ट्राचार के मुद्दे पर अन्ना के नेतृत्व में जनलोकपाल बिल पर आंदोलन से केजरीवाल की लोकप्रियता काफी बढ़ी लेकिन दिल्ली में जीत की वजह सिर्फ भ्रष्ट्राचार नहीं है बल्कि मुफ्त पानी और बिजली के बिल में 50 फीसदी कटौती भी अहम मुद्दा था.

 

इतिहास गवाह है कि मुफ्त देने के वायदे के नाम पर वीपी सिंह से लेकर जयललिता, करुणानिधि से लेकर प्रकाश सिंह बादल, रमन सिंह से लेकर अखिलेश सिंह चुनाव जीत चुके हैं. आप की जीत में मीडिया का अहम रोल है. सीएसडीएस सर्वे के मुताबिक ज्यादा मीडिया देखने वाले और पहली बार वोट करने नौजवानों ने आप के समर्थन में जमकर वोट किया.

 

शायद आप को भी मालूम नहीं था कि इतनी बड़ी जीत होगी लेकिन इस जीत का अब साइड इफेक्ट दिखने लगा है, यही वजह है कि जो पार्टी आगे की तरह बढ़ रही थी अब बात शुरू हो गई है कि पार्टी डगमगाने लगी है. वैसे नई पार्टी और नई गाड़ी में शुरुआती समय में दिक्कतें आती है लेकिन बाद में मामला सामान्य हो जाता है. अब सवाल ये उठता है कि आम आदमी पार्टी को क्या सर्विसिंग की जरूरत है. अब वक्त आ गया है कि पार्टी में क्या कमी है उसे ठीक ढंग से अध्ययन करके उसका निवारण किया जाए क्योंकि देश में पार्टी को आसमान चढ़ने और गिरने में भी वक्त नहीं लगता है.

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