भारत को अब बड़ी भूमिकाएं निभाने से बचने की आदत छोड़ देनी चाहिए: चीनी मीडिया

By: | Last Updated: Tuesday, 18 March 2014 8:49 AM
भारत को अब बड़ी भूमिकाएं निभाने से बचने की आदत छोड़ देनी चाहिए: चीनी मीडिया

बीजिंग: चीन के सरकारी मीडिया में आए एक लेख में भारत की विदेश नीति को अस्पष्ट और विरोधाभासी बताते हुए कहा गया है कि नयी दिल्ली की विदेश नीति में लंबे समय तक सोच का अभाव है. इसके साथ ही लेख में यह भी कहा गया है कि ‘‘नयी दिल्ली की वैश्विक व्यवस्था में भागीदारी को लेकर हिचकिचाहट से इसकी प्रगति रुक रही है.’’

 

सरकारी ग्लोबल टाईम्स की वेबसाइट पर लिखे एक लेख में कहा गया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग ने सीमा मुद्दों पर संयम से जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन चीन-भारत की सीमा पर भारत की ओर से अक्सर झगड़े शुरू किए जाते रहे हैं.

 

इसमें कहा गया, ‘‘इसीलिए जब भी हम बीजिंग और नयी दिल्ली के बीच आर्थिक संबंध मजबूत करने की बात करते हैं, चीन की ओर से कथित खतरा भारत के लिए अपनी सैन्य और परमाणु हथियारों की तैयारी के लिए एक बहाना बना रहता है.’’

 

लेख में कहा गया, ‘‘इस तरह के विरोधाभास कैसे परिभाषित होते हैं? सबसे पहले, नयी दिल्ली अपनी विदेश नीति के लक्ष्यों के बारे में ब़डी मुश्किल से ही लबें समय के लिए विचार करती है.’’

 

यूक्रेन संकट पर भारत की घोषणाओं को विरोधाभासपूर्ण बताते हुए लेख में कहा गया है ‘‘बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में भारत से संतुलन स्थापित करने वाले एक स्थिर क्षेत्रीय शक्ति की भूमिका की अपेक्षा की जाती है.’’ इसमें कहा गया, ‘‘लेकिन भारत अपना काम इतने बढ़िया तरीके से कर रहा है कि वह बड़े मुद्दों पर विभिन्न नजरिया होने के बावजूद लगभग सभी बड़े ताकतवर देशों का मित्र बन रहा है.’’

 

इसमें कहा गया है ‘‘इससे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उसके बर्ताव में हमेशा असमानता के साथ यह भारत के रणनीतिक उद्देश्य (यदि कोई है तो) बनाते हैं.’’ यह लेख दोनों देशों के बीच तीसरी रणनीतिक आर्थिक बातचीत से पहले आया है.

 

इसमें कहा गया, ‘‘भारत अपने लोकतांत्रिक मॉडल की बात तो करता है लेकिन वह अपनी विदेश नीति में इस मूल्य को लाने का इच्छुक नहीं दिखता. वह किसी नए वादे या संसाधनों का प्रस्ताव दिए बिना एशियाई नेतृत्व का आवरण पहनने की कोशिश कर रहा है. विश्लेषक इस तरह के विरोधाभास से हमेशा परेशान हो जाते हैं.’’

 

इसमें यह भी कहा गया कि भारत ने जापान द्वारा हाल ही में दक्षिणी पंथ की ओर मुड़ जाने पर चिंता जताने से इंकार कर दिया था. लेख में कहा गया, ‘‘अब भारत विश्व के लगभग सभी महत्वपूर्ण मुद्दों में एक अहम भागीदार है. वैश्विक व्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने से बचने की भारत की प्रवृत्ति उसकी (वैश्विक शासन की) प्रगति को अवरूद्ध कर रही है और अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय सहयोग को भी बाधित कर रही है.’’

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Web Title: भारत को अब बड़ी भूमिकाएं निभाने से बचने की आदत छोड़ देनी चाहिए: चीनी मीडिया
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