मूवी रिव्यूः जंजीर

By: | Last Updated: Thursday, 5 September 2013 8:45 PM
मूवी रिव्यूः जंजीर

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पढ़ें यासिर की समीक्षा
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फिल्म का नाम: <b>ज़ंजीर</b>
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रेटिंग: <b>ढाई स्टार</b>
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नई फिल्म ज़जीर देखकर तीन
बातें साबित होती हैं:
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1). अमिताभ बच्चन बेहतरीन
अभिनेता हैं.
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2). अजीत एक बेहद स्टाइलिश
विलेन थे.
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3). सलीम-जावेद बहुत अच्छी
स्क्रिप्ट लिखते थे.
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आप कहेंगे कि ये तीनों बाते
तो सब जानते हैं और इन बातों
का नई ज़जीर से क्या ताल्लुक?
लेकिन इस नई ज़ंजीर को देखते
वक्त अफ़सोस होता है और फिर
बार-बार पुरानी ज़ंजीर ही याद
आती है. सवाल ये है कि आख़िर
रीमेक के नाम पर एक यादगार
फिल्म को इस तरह क्यों छेड़ा
गया है?
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href=”http://www.abpnews.newsbullet.in/photos/movies/52999-2013-09-05-05-24-05″><b>तस्वीरों
में: कितनी मजबूत है प्रियंका
की ‘जंजीर'</b></a><br />
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प्रकाश मेहरा की ज़जीर हिंदी
सिनेमा की एक अहम फिल्म मानी
जाती है. इस फिल्म ने सिनेमा
को एंग्री यंग मैन का किरदार
और सुपर स्टार अमिताभ बच्चन
दिया. वो फिल्म 1973 में रिलीज़
हुई थी और आज भी जब वो फिल्म
टेलीविजन पर आती है तो
दर्शकों को बांध लेती है.
लेकिन 40 साल बाद रिलीज़ हुई इस
नई ज़ंजीर के बारे में ऐसा
नहीं कहा जा सकता. 
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फिल्म की कहानी वही पुरानी
है. ईमानदार एसीपी विजय खन्ना
का आन्ध्र प्रदेश में 17 बार
ट्रांसफर किया जा चुका है.
18वीं पोस्टिंग पर वो मुंबई
आता है जहां उसकी टक्कर ऑयल
माफिया के सरताज
रूद्रप्रताप ‘तेजा’ (प्रकाश
राज) से होती है. तेजा ही वो
शख्स है जिसने बरसों पहले
विजय के माता-पिता की हत्या
की थी. नए तेजा के पास नई ‘मोना
डार्लिंग’ (माही गिल) भी है.
तेजा को खत्म करने में विजय
की मदद करता है शेरख़ान (संजय
दत्त) और पत्रकार जेडी (अतुल
कुलकर्णी). विजय की
गर्लफ्रेंड है अमेरिका से आई
एनआरआई गुजराती लड़की माला
(प्रियंका चोपड़ा).
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कहानी तो आपको
पता ही है लेकिन स्क्रीनप्ले
पर कोई मेहनत नहीं की गई है. एक
सीन देखते हुए ही अगले सीन का
साफ़ अंदाज़ा लग जाता है.
किसी रीमेक में अमिताभ बच्चन
का रोल निभाना अपने आप में
बेहद मुश्किल काम है और विजय
खन्ना के रोल में राम चरण
कमज़ोर पड़ गए हैं. वो फिल्म
के ज़्यादातर सीन्स में
ग़ुस्से में नज़र आते हैं,
हालांकि जब वो मुस्कुराते
हैं, रोते हैं या रोमांस करते
हैं, तब भी उनके चेहरे पर भाव
एक ही रहता है. ख़ास बात ये है
कि उन्हे जब भी गुस्सा आता है,
बैकग्राउंड में ‘रघुपति
राघव राजा राम’ बजने लगता है
और आप सोचते हैं कि इसका क्या
मतलब है?
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पुरानी ज़ंजीर में अभिनेता
प्राण का निभाया शेरख़ान का
किरदार उनके करियर का
बेहतरीन किरदार माना जाता
रहा लेकिन शेरख़ान के रूप में
संजय दत्त कहीं नहीं ठहरते.
पुरानी ज़ंजीर के सबसे
मज़बूत सीन्स में एक सीन वो
था जहां शेरख़ान पहली बार
पुलिस स्टेशन में विजय से
मिलने आता है और विजय कहता है,
ये पुलिस स्टेशन है
तुम्हारे बाप का घर नहीं.
यहां जब राम चरण, संजय दत्त से
सामने ये डायलॉग बोलते हैं तो
हंसी आती है.      
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अजीत वाले तेजा के रोल में
प्रकाश राज अपनी पिछली
फिल्मों जैसी एक्टिंग करते
ही नज़र आए. फिल्म में पुरानी
ज़ंजीर को ट्रिब्यूट भी दिया
गया है. एक सीन में तेजा और
मोना डार्लिंग (माही गिल)
टेलीविजन पर पुरानी ज़ंजीर
देख रहे हैं. फिल्म में अजीत
और बिंदु का सीन चल रहा है. सीन
देखकर माही गिल प्रकाश राज से
कहती हैं कि इस तेजा (अजीत) का
अंदाज़ तो तुमसे काफी मिलता
है. यानि दर्शकों को बताना
पड़ रहा है कि ये नया तेजा उस
पुराने तेजा से कमज़ोर नहीं
है. 
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फिल्म में प्रियंका चोपड़ा
अपने कमज़ोर रोल में भी अच्छी
लगी हैं. अपने स्क्रीन
प्रेज़ेंस से वो दूसरे
एकटर्स पर भारी रही हैं. माही
गिल ने भी अपना रोल ठीक से
निभाया है. पत्रकार के रोल
में अतल कुलकर्णी ने बेहद
ईमानदारी से सशक्त अभिनय
किया है. वो अपने हर सीन में
बहुत अच्छे लगे हैं.  
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फिल्म में प्रियंका, कविता
कौशिक और माही गिल के आइटम
सॉन्ग हैं. संगीत बेहद औसत
दर्जे का है. फिल्म का
निर्देशन अपूर्व लाखिया ने
किया है. लेकिन इसे देखकर
साफ़ है कि निर्देशक ने एक
औसत एक्शन फिल्म ही बनाई है
और वो कुछ नया नहीं कर पाए हैं.
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अगर आपने पुरानी ज़ंजीर नहीं
देखी है, तो इस एक्शन फिल्म को
आप देख सकते हैं, हो सकता है
आपको मज़ा भी आए. लेकिन अगर
आपने पुरानी ज़ंजीर देखी है
तो इस फिल्म को देखकर अपनी
अच्छी यादों में मिलावट ना
करें.     <br />
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Web Title: मूवी रिव्यूः जंजीर
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