मेरे जीवन में भगवान का महत्व हमेशा कम रहा: महेश भट्ट

By: | Last Updated: Monday, 28 October 2013 3:33 AM

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<b>नई
दिल्ली: </b>फिल्म
निर्देशक-निर्माता-लेखक
महेश भट्ट का कहना है कि उनके
जीवन में हमेशा से भगवान का
कम महत्व रहा है और उनका यह
असंतोष मूलभूत लालसाओं के
पूरा ना होना से उपजा.<br /><br />भट्ट
ने यहां कहा, ‘‘मैंने अपने
बचपन में ही अपने जीवन में
भगवान के महत्व को खो दिया.
मैं हमेशा चाहता था कि मेरे
पिता मेरे साथ रहें लेकिन जब
ऐसा नहीं हुआ तो मैंने भगवान
में अपना विश्वास खो दिया.
मेरे आसपास के लोगों में उसका
महत्व था इसलिए मैंने कभी
शिकायत नहीं की लेकिन मैं
उसके लिए अलग सा महसूस करने
लगा.’’ <br /><br />भट्ट राजधानी में
भारतीय भाषा महोत्सव,
‘समन्वय’ के तीसरे संस्करण
में शामिल होने आए थे.
‘समन्वय’ पिछले हफ्ते
इंडिया हैबिटेट सेंटर में
शुरू हुआ था.<br /><br />अपने अतीत की
यादें साझा करते हुए भट्ट ने
कहा, ‘‘मेरी फिल्में जब सही
नहीं जा रहा थी तब मैंने मादक
पदार्थ लेने शुरू कर दिए. बाद
में जब मैं यूजी कृष्णमूर्ति
:प्रसिद्ध विचारक: से मिला तो
उनकी वजह से मुझे महसूस हुआ
कि समाज के अपने मापदंड हैं
और हमें इसकी सीमाओं में रहना
चाहिए.’’ उन्होंने कहा,
‘‘मुझे ‘सारांश’ के बाद अपना
कुछ अर्थपूर्ण अस्तित्व
होने जैसा महसूस हुआ,
‘सारांश’ एक वृद्ध दंपति की
कहानी थी जो अपना बेटा खो
देते हैं. मैंने दूसरे लोगों
के साथ मिलकर पुनर्जन्म के
सिद्धांत की दोबारा जांच
की.’’ भट्ट के अनुसार 1990 के दशक
में फिल्म जगत का नजरिया भी
प्रतिकूल हो गया था.<br /><br />
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