यादें हैं जिंदा: यकीन नहीं होता कि नहीं रहे काका

यादें हैं जिंदा: यकीन नहीं होता कि नहीं रहे काका

By: | Updated: 18 Jul 2012 11:09 PM

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<b>अमृतसर /
बागपत: </b>राजेश खन्ना का
पुश्तैनी घर अमृतसर के गली
तिवाड़िया में है.
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यहां के लोगों के दिलों में
आज भी काका की यादें जिंदा
हैं. अमृतसर में ही वो गली है
जहां कभी राजेश खन्ना खेला
करते थे. <br /><br />इस गली में राजेश
खन्ना की यादें अब भी ताजा
हैं. तिवाड़िया नाम की इस गली
में राजेश खन्ना सात साल की
उम्र तक रहे थे. यहीं राजेश
खन्ना का पुश्तैनी घर भी है.
<br /><br />राजेश खन्ना के निधन की
खबर सुनते ही यहां शोक की लहर
दौड़ गई. राजेश खन्ना के साथ
बचपन में क्रिकेट खेलने वाले
उनके चचेरे भाई गुलजार के लिए
तो ये किसी सदमें से कम नहीं
है. <br /><br /><b>बागपत में भी शोक</b><br /><br />राजेश
खन्ना की मौत से यूपी के
बागपत का मितली गांव सकते में
है. इस गांव में कभी बॉलीवुड
के इस सुपरस्टार ने मक्के की
रोटी और सरसों का साग खाया था.<br /><br />देश
के पहले सुपरस्टार राजेश
खन्ना के निधन से तो पूरे देश
में शोक है लेकिन बागपत के
मितली गांव में तो सन्नाटा
पसरा हुआ है. इसी गांव की
निवासी उषा के घर राजेश खन्ना
ने मक्के की रोटी और सरसों का
साग खाया था. <br /><br />राजेश खन्ना
के निधन की खबर मिलते ही पूरा
गांव टीवी के सामने हर पल की
खबर जानने के लिए बैठ गया.
राजेश खन्ना ने गांव वालों को
"पब्लिक है सब जानती है" गाना
भी सुनाया था. <br /><br />दरअसल यहां
राजेश खन्ना अपनी किसी
बीमारी का इलाज करवाने आये
थे. उसी दरम्यान उन्होंने
मक्के की रोटी और सरसों का
साग खाने की इच्छा जताई थी
फिर उषा नाम की महिला ने
उन्हें रोटी और साग बनाकर
खिलाया था. <br /><br />जाते समय
राजेश खन्ना ने फिर से आने का
वादा किया था लेकिन वो वादा
पूरा करने से पहले ही इस
दुनिया को छोड़ गए.<br />
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