राहुल गांधी को पीएम उम्मीदवार बनाने पर सस्पेंस, 17 जनवरी को टल सकता है एलान

By: | Last Updated: Wednesday, 15 January 2014 3:43 AM

नई दिल्ली: 17 तारीख को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में राहुल गांधी के पीएम उम्मीदवारी का एलान टल सकता है.

 

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक राहुल गांधी के नाम का एलान पार्टी 17 तारीख को नहीं करेगी. हालांकि पार्टी के कई बड़े नेताओं का मानना है कि इसके बाद कभी भी एलान से इनकार भी नहीं किया जा सकता है.

 

अखबार में छपी खबर के मुताबिक चुनाव प्रचार की रणनीति बनाने में प्रियंका गांधी अहम भूमिका निभाएंगी . हालांकि प्रियंका कोई पद नहीं लेंगी.

 

प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने के सवाल पर राहुल गांधी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा था कि  पार्टी जो जिम्मेदारी देगी उसे वो निभाएंगे.  पढ़िए राहुल गांधी ने क्या कहा है-

 

क्या आप पीएम पद की जिम्मेदारी लेंगे?

हम एक लोकतांत्रिक संगठन हैं. हमें लोकतंत्र पर विश्वास है. भारत की जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों के जरिए तय करेगी कि देश का प्रधानमंत्री कौन होगा. देश हित में कांग्रेस का सत्ता में आना जरूरी है और उसके लिए संगठन ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है या देगी मैं उसे पूरी निष्ठा से उसका निर्वाह करूंगा.

 

नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर आप क्या कहेंगे-

आज बीजेपी व्यक्ति आधारित सत्ता चाहती है जो देशहित में नहीं है.  सत्ता किसी एक व्यक्ति की सोच और उसके अपने तरीके से नहीं चलनी चाहिए. सबको साथ लेकर चलने से ही 120 करोड़ लोगों के भविष्य को संवारा जा सकता है. कांग्रेस इस देश के डीएनए में है. बीजेपी कांग्रेस मुक्त भारत की बात कर रही है. बीजेपी ये नहीं समझती है कि कांग्रेस ही एक ऐसी राजनीतिक शक्ति है जिसने लोगों को देश में जोड़कर रखा है.

 

चुनावों में प्रियंका की क्या भूमिका होगी, चुनाव लड़ेंगी?

प्रियंका मेरी बहन और मेरी दोस्त है. वह संगठन की सक्रिय कार्यकर्ता है इसके नाते वे मुझे और संगठन को मजबूत करने के लिए मदद कर रही हैं. मुझे नहीं लगता कि उनकी कोई चुनावी भूमिका होगी.

 

क्या आप जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते हैं?

‘सत्ता जहर है’ इसका मतलब यह नहीं है कि मैं जिम्मेदारी लेने को तत्पर नहीं हूं. देखिये मेरी जिंदगी में रिलेक्टेंस नाम का कोई शब्द नहीं है. ‘सत्ता जहर है’ से यह ऑब्जर्वेशन है कि पावर जब आती है तो उनसे कैसे निपटना है. ‘सत्ता जहर है’ से अर्थ है कि पावर का इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए करो. खुद को ताकतवर बनाने के लिए इसका इस्तेमाल मत करो. मैं कांग्रेस का सिपाही हूं जो भी मुझे आदेश मिलेगा मैं उसका पालन करूंगा.

 

मेरा सवाल यह है कि हमारी बहस एक पोस्ट को लेकर क्यों रूक जाती है? राष्ट्रीय स्तर यह बहस क्यों होती है? एक व्यक्ति विशेष और विशेष पद की बात क्यों होती है? राजनीति में सुधार की बात क्यों नहीं होती? कोई भी सिस्टम को बदलने की बात पर तैयार नहीं है. बात यह होनी चाहिए कि हम पॉलिटिकल सिस्टम को कैसे बदलें?

 

 

क्या आपको चुनाव में कांग्रेस की जीत का पूरा भरोसा है?

पिछले 10 वर्षों में हमने काफी अच्छा काम किए हैं. विकास के ढांचे को बदला है जिसमें मनरेगा, शिक्षा का अधिकार, भूमि अधिग्रहण और लैंडमार्क फैसले लिए गए हैं. कांग्रेस अधिकार दिए जा रही है. हमने आरटीआई दिया, राइट टु फारेस्ट दिया, राइट टु आडेंटिटी-आधार कार्ड दिया, भोजन का अधिकार दिया. यूपीए सरकार लोगों को अधिकार  देने वाली सरकार के रूप में इतिहास में दर्ज होगी. आमतौर पर कांग्रेस को कम आंका जाता है जैसा 2004 और 2009 में हुआ था लेकिन ऐसा नहीं है. अब होने  वाले आम चुनाव बहुत दिलचस्प हैं और मुझे भरोसा है कि हम अच्छा करेंगे.

 

माना जा रहा है कि कांग्रेस से अब मैदानी संघर्ष नहीं हो रहा है. सांसद-विधायक मैदान में नहीं जाते?

नहीं, ऐसा नहीं है. यह बहुत बड़ा जनरलाइजेशन है. कांग्रेस में बहुत योग्य लोग हैं. जमीन से जुड़े लोग हैं. सांसद-विधायक फील्ड में नहीं जाते, इस बात से भी मैं सहमत नहीं हूं. पार्टी से युवाओं को जोडऩे की जरूरत है. हमने पिछले सालों में इसमें काम किया है. और आगे भी करेंगे.

 

आप कह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी से सीखेगी कांग्रेस?

कांग्रेस पार्टी एक मजबूत और गतिशील संगठन है. कांग्रेस ने पहले भी देश की राजनीति के स्वरूप को बदला है और आगे भी बदलेगी. जबसे मैं राजनीति में आया हूं तबसे हम यह सब बातें उठाते रहे हैं. इसमें से कुछ चीजें आम आदमी पार्टी ने अमल की हैं. पर हमारा और उनका रवैया अलग-अलग है. मैं उनके कई तरीकों से सहमत नहीं हूं. हमारे निर्णय लोगों के हित में शार्ट टर्म गेन के बजाए उनके सुरक्षित भविष्य को देखकर होने चाहिए.

 

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Web Title: राहुल गांधी को पीएम उम्मीदवार बनाने पर सस्पेंस, 17 जनवरी को टल सकता है एलान
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