वाराणसी में मोदी के खिलाफ कांग्रेस ने अजय राय को उतारा

वाराणसी में मोदी के खिलाफ कांग्रेस ने अजय राय को उतारा

By: | Updated: 08 Apr 2014 10:58 AM
नई दिल्ली: कांग्रेस ने वाराणसी से बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. कांग्रेस ने विधायक अजय राय को टिकट दिया है.

 

मंगलवार को कांग्रेस ने अजय राय के नाम का एलान किया. अजय राय फिलहाल वाराणसी के पिंडरा से कांग्रेस के विधायक हैं. पूर्वांचल में अजय राजय की पहचान एक बाहुबली नेता की है.

 

बीजेपी में रह चुके अजय राय को 2009 में लोकसभा का टिकट नहीं मिला था जिसकी वजह से वह समाजवादी पार्टी में चले गये थे. 2009 में अजय राय समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार थे. इसके बाद वह कांग्रेस में चले गये थे और अभी कांग्रेस से विधायक हैं.

 

बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी में कांग्रेस ने अजय राय को टिकट दिया है . अजय राय अभी कांग्रेस के विधायक हैं और पूर्वांचल में इनकी बाहुबली नेता की छवि है . अजय राय पहले बीजेपी में ही थे लेकिन 2009 में लोकसभा का टिकट नहीं मिला तो पार्टी छोड़ दी थी . पिछला चुनाव अजय राय समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़े थे.

 

वाराणसी के बाहुबली नेता और कांग्रेस के विधायक अजय राय कई सालों से संसद पहुंचने का सपना देख रहे हैं .  इस बार ये तय माना जा रहा था कि वाराणसी से कांग्रेस अजय राय को ही टिकट देगी . लेकिन मोदी के मैदान में आने से समीकरण बदल गये थे. जब कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को लड़ाने की चर्चा हो रही थी. तो यही वजह है कि अजय राय ने इशारों में ही सही नेतृत्व को अपनी नाराजगी जता दी थी.

 

अजय राय वाराणसी में मोदी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं . वाराणसी मे भूमिहार और ब्राह्मण वोटरों की संख्या करीब चार लाख के आसपास है . एक लाख भूमिहार वोटरों पर अजय की अच्छी पकड है. अजय को कांग्रेस उतार देती है तो फिर मोदी को मिलने वाले हिंदू वोटों का बंटवारा तय है ऐसे में मोदी के लिए वाराणसी की राह में रोड़ा बन सकते हैं .

 

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में अजय राय को बीजेपी से टिकट मिलने की उम्मीद थी लेकिन बीजेपी ने मुरली मनोहर जोशी को वाराणसी से उतारा. नाराज होकर अजय राय एसपी के टिकट पर वाराणसी के अखाड़े में उतर गए . करीब 18 फीसदी वोट मिला और तीसरे नंबर पर रहे . 2012 में अजय राय कांग्रेस में गए और पिंडरा सीट से विधायक बने .

 

अपने इलाके में अजय राय की छवि भी रॉबिन हुड वाली है . साल 1996 में अजय राय का नाम सबसे पहली बार सुर्खियों में तब आया जब उन्होंने सीपीएम के 9 बार के विधायक रहे रुदल को चार सौ वोटों से हराकर जीत हासिल की . ऐसे में अजय राय की ताकत को कम करके आंकने की भूल कोई नहीं कर सकता . अब सवाल ये है कि अजय राय को कांग्रेस उतार रही है तो बीजेपी की रणनीति क्या होगी ?

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