विजय विद्रोही की त्वरित टिप्पणी...फहीम की सुनो नहीं तो फना हो जाओगे

By: | Last Updated: Wednesday, 29 January 2014 9:14 AM
विजय विद्रोही की त्वरित टिप्पणी…फहीम की सुनो नहीं तो फना हो जाओगे

चुनावी साल है . कांग्रेस को मुस्लिम वहटों की चिंता सता रही है . वक्फ विकास निगम बनाने की बात हो रही है . इसी के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह , कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान खान दिल्ली के विज्ञान भवन में एक मंच पर थे . सभी बखान कर रहे थे कि किस तरह से यूपीए सरकार ने मुस्लिमों के हित में महान काम किए हैं . बताया जा रहा था कि किस तरह से देश भर में बिखरी वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का लाभ मुस्लिमों को पहुंचाने के लिए नया राष्ट्रीय वक्फ विकास निगम बनाया जा रहा है . लेकिन तभी कोई बेनाम- सा आम-सा आदमी डॉ फहीम उठता है , वह शख्स बोलना शुरु करता है , वह बताने लगता है कि कैसे सूचना का अधिकार कानून का सहारा लेकर कुछ जानकारियां जुटाई गयी और उनके इलाके में विकास के सिर्फ झूठे दावे हो रहे हैं . आगे भी वह शख्स कुछ बताना चाह रहा था लेकिन दिल्ली पुलिस और खुफिया विभाग के लोग आए , किसी ने उधर खींचा तो किसी ने इधर खींचा , आवाज बुंलद रही तो मुंह पर हाथ रखा गया , देखते ही देखते डॉ बेनाम आम आदमी को बाहर ले जाया गया .

 

विज्ञान भवन में पीएम के कार्यक्रम में हंगामा, अल्पसंख्यकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए विरोध

 

यह पहला मौका नहीं है जब पीएम के किसी समारोह के मौके पर बवाल मचा हो . एक बार पहले भी एक शख्स कमीज उतार कर मेज पर चढ़ गया था , एक अन्य शख्स ने भी जोरदार तरीके से अपनी बात कहने की कोशिश की थी जिसे मंच से कहा गया कि अभी कार्यक्रम चलने दें और बाद में बात करें . हमें नहीं पता कि दोनों का क्या हुआ , उन दोनों की बातें सुनी गयी या नहीं , उन्होंने जो सवाल उठाए उन पर विचार हुआ या नहीं या फिर उन्हे कोई राहत मिली या नहीं . अब चुनावी साल है , बेनाम आदमी मुस्लिम है तो तुरंत ही बात पहुंचाई गयी कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रहमान खान फहीम साहब से मिलेंगे, यह भी कहा गया कि खुद मनमोहन सिंह भी डॉ फहीम से मिल सकते हैं . डॉ फहीम ने भी इन सुहानी घोषणाओं पर हैरानी जताई है . हमें नहीं पता कि डॉ फहीम की कितनी बात सुनी जाएगी और कितनी परेशानी दूर की जाएगी लेकिन इतना जरुर तय है कि अगर डॉ फहीम इस तरह सार्वजनिक रुप से अपनी बात नहीं रखते तो यूं ही प्रधानमंत्री के दफ्तर से लेकर रहमान खान के दफ्तर को खत पर खत लिखते ही रह जाते .

 

डॉ फहीम ने बाद में बताया कि उनके इलाके में 15 सूत्री कार्यक्रम पर अमल नहीं हो रहा है , वह यह बात हवा हवाई नहीं कर रहे थे , वह सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करके कागज पत्र जुटाने के बाद यह बात रख रहे थे . फहीम की बात अगर सही है तो कांग्रेस सरकार और कांग्रेस संगठन के लिए अच्छा खबर नहीं है . मनमोहन सिंह , सोनिया गांधी और राहुल तीनों ही यूपीए सरकार की उपलब्धियां गिनाते समय सूचना के अधिकार की वकालत करते नहीं दिखते . राहुल तो बार बार कहते रहे हैं कि उनकी सरकार ने सूचना का अधिकार दिया और इसी कारण भ्रष्टाचार की पोल खुली है . वह कहते रहे हैं कि यह अधिकार देकर उनकी सरकार ने भारतवासियों को मजबूत हथियार सौंपा है और भ्रष्टाचार से लड़ना सिखाया है . इस ओर रोजगार , शिक्षा , भोजन के अधिकार के नाम पर राहुल वोट मांगते हैं . लेकिन फहीम साहब ने सरकार की पोल सरकार के सामने ही खोल कर रख दी . सवाल उठता है कि ऐसे सूचना के अधिकार का फायदा ही क्या जिसमें आप घोटालों , गडबड़ियों और अनियमितताओं की जानकारी तो सारी ले सकते हैं लेकिन इसके लिए जिम्मेदार लोगों का कुछ बिगाड़ नहीं सकते .

 

क्या विडंबना है . प्रधानमंत्री के सामने देश का एक नागरिक बोल रहा है और पुलिस उसका मुंह बंद करने की कोशिश कर रही है . यह पूरा देश लाइव देख रहा है . वह आदमी अपने लिए कुछ नहीं मांग रहा है , वह अपने बच्चों के लिए नौकरी नहीं मांग रहा है , वह अपने लिए कोई बड़ा घर भी नहीं चाह रहा है . वह तो सिर्फ यही कह रहा है कि उनके इलाके में सरकार की योजनाएं ठीक ढंग से काम नहीं कर रही हैं , इससे सरकार को तो वित्तीय नुकसान हो ही रहा है उधर उस आम जनता का फायदा नहीं हो रहा है जिनके लिए यह योजनाएं शुरु की गयी हैं . वह अपनी बात साबित करने के लिए कुछ दस्तावेज भी लेकर आया है . ऐसे में मंच पर चुपचाप बैठे रहते हैं प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी भी खामोशी नहीं तोड़ती है . ( हालांकि बाद में फहीम तक संदेश पहुंचाया गया कि वह संबंधित मंत्री से मिलें ) सवाल उठता है कि यह सरकार खुद को आम आदमी की सरकार कहती है , राहुल गांधी तो खुल कर कह चुके हैं कि आप पार्टी से सीखना चाहिए कि वह कैसे आम आदमी तक पहुंचती है , खुद राहुल गांधी इन दिनों चुनावी घोषणा पत्र के लिए कहीं अल्पसंख्यकों से मिल रहे हैं तो कहीं महिलाओं से तो कहीं मजदूरों से . लेकिन दिल्ली में कोई आम बेनाम आदमी सवाल करता है तो उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है . क्यों उस शख्स का मुंह बंद किया गया …क्यों नहीं मंच से ही मनमोहन या सोनिया ने आवाज लगाई कि उस आदमी को मंच पर इज्जत के साथ लाया जाए और सबके सामने उसकी पूरी बात सुनी जाए . वहीं उनकी समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाए .

 

 29 जनवरी के अखबारों में भी जो विज्ञापन छपा है उसमें भी बताया गया है कि भारत में दुनिया की सबसे ज्यादा वक्फ की संपत्तियां हैं . यहां छह लाख एकड़ में यह संपत्तियां फैली है जिसकी बाजारी कीमत एक लाख बीस हजार करोड़ रुपया बतायी जाती है . यही विज्ञापन बताता है कि सिर्फ पांच लाख रजिस्टर्ड संपत्तियां हैं जिनसे सिर्फ 163 करोड़ रुपये की ही सालाना आय होती है . वक्फ की संपत्तियों पर कब्जे की बहुत पुरानी शिकायतें हैं , सैंकड़ों मुकदमें भी चल रहे हैं , लाखों एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है , किराये पर दी गयी संपत्तियों को लेकर अलग मुकदमेबाजी हो रही है . हर बार सरकार वायदे करती है लेकिन चुनाव आने तक भूल जाती है . अगर इन संपत्तियों पर से अतिक्रमण हटाए जाएं , अदालतों के बाहर मुकदमों का निपटारा कर लिया जाए तो सरकार को अरबों रुपयों की कमाई हो सकती है जिसका इस्तेमाल अल्पसंख्यकों के हितों को पूरा करने में किया जा सकता है . फहीम यही बताने आए थे कि कैसे उस आम मुस्लिम का भला हो सकता है जिसके लिए इतना तामझाम लगाकर आयोजन किया जा रहा है , वक्फ विकास निगम बनाया जा रहा है . इस फहीम की सुनो नहीं तो फना हो जाओगे .

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Web Title: विजय विद्रोही की त्वरित टिप्पणी…फहीम की सुनो नहीं तो फना हो जाओगे
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