MUST READ: क्या कहते हैं बिहार के 2014 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े?

By: | Last Updated: Wednesday, 9 September 2015 8:18 AM

नई दिल्ली: ये तो आपके याद ही होगा कि 2014 की मोदी लहर में बिहार की 40 लोकसभा सीटों में एनडीए ने 31 सीटों पर क़ब्ज़ा कर लिया था और यही नतीजा नीतीश और लालू के एक होने की बड़ी वजह बना था. अलग लड़ी लालू की पार्टी को सिर्फ़ 4 सीट मिलीं, नीतीश को 2 सीट मिलीं, कांग्रेस को भी 2 सीट मिलीं और एनसीपी को एक. साफ़ था कि मोदी ने सबको पस्त कर दिया था. लेकिन अगर लोकसभा चुनाव में मिले वोटों को विधानसभा क्षेंत्रों के हिसाब से बांट कर देखें तो क्या तस्वीर बनती है? विधानसभा चुनाव से पहले ये आंकड़ा देखना अहम है.

 

लोकसभा सीटें तो हम जानते हैं ऐसे बंटी थीं. एनडीए की 31 सीटों में बीजेपी को मिली थीं 22 सीटें, पासवान की एलजेपी को 6 और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी को 3 सीटें मिली थीं. लेकिन लोकसभा चुनाव में पड़े वोटों को विधानसभा क्षेत्रों में बांटिये तो देखिए क्या होता. 243 क्षेत्रों में 122 क्षेत्रों में बीजेपी आगे थी, 34 क्षेत्रों में एलजेपी आगे थी और 17 क्षेत्रों में कुशवाहा की पार्टी आगे थी. यानी 243 में 173 क्षेत्रों में एनडीए आगे था. अब देखिये अलग-अलग लड़े बाक़ी दलों का विधानसभा क्षेत्रों में क्या हाल था. 2014 के लोकसभा चुनाव में पड़े वोटों को विधानसभा क्षेत्रों में बांटें तो लालू की पार्टी 32 क्षेत्रों में आगे थी, नीतीश की पार्टी 18 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी और नीतीश के साथ चुनाव लड़ने वाली सीपीआई 1 क्षेत्र में आगे थी. कांग्रेस 14 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी और एनसीपी 5 में.

 

अब इन्हीं विधानसभा क्षेत्रों को बिहार के प्रमुख इलाक़ों में बांटें तो देखिए क्या तस्वीर थी. बिहार को मोटे तौर पर 5 इलाक़ों में बांटा जा सकता है. उत्तर प्रदेश के करीब गंगा के उत्तर में पड़ने वाला इलाक़ा तिरहुत-सारण, उसीके बगल का इलाक़ा मिथिला, तिरहुत-सारण के दक्षिण में नक़्शे पर गंगा के नीचे का इलाक़ा मगध-भोजपुर, कोसी के पूर्व में बंगाल के क़रीब का इलाक़ा कोसी-सीमांचल और उसीके दक्षिण में झारखंड के पास का इलाक़ा अंगिका.

 

तिरहुत-सारण में कुल 73 विधानसभा सीटें आती हैं. यहां तो एनडीए ने स्वीप कर दिया था. इनमें बीजपी 48 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी, एलजेपी 12 में और आरएलएसपी 6 विधानसभा क्षेत्रों में. यानी 73 में 66 विधानसभा क्षेत्रों में एनडीए आगे था. जबकि लालू की आरजेडी 5 क्षेत्रों में आगे थी, 1 क्षेत्र में नीतीश की जेडीयू और 1 में कांग्रेस.

 

मिथिला में कुल 37 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें बीजपी 24 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी और पासवान की एलजेपी 3 में. यानी 37 में 27 विधानसभा क्षेत्रों में एनडीए आगे था. जबकि लालू की आरजेडी 6 क्षेत्रों में आगे थी, 1 क्षेत्र में नीतीश की जेडीयू और तीन विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस आगे थी.

 

मगध-भोजपुर के इलाक़े में 69 विधानसभा सीटें आती हैं. यहां भी एनडीए का बोलबाला था और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के भी उम्मीदवारों यहीं मोदी लहर का ज़्यादा फ़ायदा मिला था. मगध-भोजपुर में बीजपी 42 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी और पासवान की एलजेपी 5 में. उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी 11 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी. यानी 69 में 58 विधानसभा क्षेत्रों में एनडीए आगे था. जबकि लालू की आरजेडी 6 क्षेत्रों में आगे थी, 4 क्षेत्रों में नीतीश की जेडीयू और 1 विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस आगे थी.

 

बीजेपी पीछे रही थी कोसी-सीमांचल के इलाक़े में. यहां मोदी लहर बिलकुल भी नहीं चल पाई थी. कोसी-सीमांचल में 37 विधानसभा सीटें पड़ती हैं. इनमें बीजेपी 3 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी और एलजेपी 1 में. यानी एनडीए को 37 में 4 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल थी. जबकि लालू की आरजेडी 8 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी. नीतीश की पार्टी 11 विधानसभा क्षेत्रों में आगे थी, कांग्रेस 8 विधानसभा क्षेत्रों में और 5 विधानसभा क्षेत्रों में एनसीपी आगे थी. इसीलिए बीजेपी को उम्मीद है कि इस इलाक़े में पप्पू यादव और असदुद्दीन ओवैसी लालू-नीतीश-कांग्रेस गठबंधन को नुक़सान पहुंचाएं.

 

झारखंड के पास के बिहार के अंगिका के इलाक़े में 27 विधानसभा सीटें पड़ती हैं. पासवान की पार्टी के उम्मीदवारों को इस इलाक़े में मोदी लहर का अच्छा फ़ायदा मिला था. लोकसभा चुनावों में अंगिका में 5 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी आगे थी और 13 क्षेत्रों में पासवान की पार्टी. यानी 27 विधानसभा क्षेत्रों में 18 क्षेत्रों में एनडीए आगे था. जबकि लालू की पार्टी 7 क्षेत्रों में आगे थी और नीतीश की पार्टी 1 विधानसभा क्षेत्र में आगे थी. नीतीश के साथ लोकसभा चुनाव लड़ी सीपीआई अंगिका के एक विधानसभा क्षेत्र में आगे रही थी.

 

ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि नीतीश को क्यों लालू का हाथ थामना पड़ा और क्यों लालू को विष का घूंट पीना पड़ा. अगर लालू की पार्टी, नीतीश की पार्टी और कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में मिले वोट हर विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से जोड़ दिए जाएं तब क्या तस्वीर बनती है? सबसे दिलचस्प तो वही देखना होगा. वो देखेंगे अगली किश्त में.

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Web Title: 2014 Lok Sabha elections statistics in Bihar
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