#20yearsofDDLJ | काजोल-शाहरूख की फिल्म में जो भी हुआ पहली बार हुआ

By: | Last Updated: Monday, 19 October 2015 9:00 AM
#20yearsofDDLJ

यूं तो हर कहानी के पीछे एक कहानी होती है लेकिन जब कहानी ऐसी हो जो बीस साल से पर्दे पर दिखाई जा रही है.. जिसने पीढ़ियों को प्यार करना सिखा दिया.. जिसने बॉलीवुड को दो कभी न ढलने वाले सितारे दिए.. और जिसने ऐसे रिकॉर्ड बना दिए जिसका टूटना अब नामुमकिन हो गया हो.. उस कहानी के पीछे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही होगी.. मात्र 24 साल की उम्र में पढ़ने-लिखने, समझने-सीखने की उम्र में एक नौजवान ने फिल्म बनाने का फैसला किया जो शायद 24 साल बाद भी पर्दे पर दिखे और लोगों के दिलों पर राज करे.. आज बीस साल बाद वो अनसुनी कहानियां जो फिल्मी क्लाईमेक्स से कम नहीं हैं !  फिल्म के लिए कहीं से कुछ कॉपी किया गया, तो किसी ने कुछ दे दिया.. किसी फिल्म से आइडिया आया तो किसी गाने से प्रेरणा मिली.. जो कुछ भी हुआ तब पहली बार ही हुआ

 

हॉलीवुड से चुराया ‘पलट’ वाला सीन !

डीडीलीएलजे का पॉपुलर सीन ‘पलट..पलट.. पलट’ का आइडिया आदित्य चोपड़ा को 1993 की हॉलीवुड की क्लाइंट ईस्टवुड सीरीज की फिल्म ‘इन द लाइन ऑफ फायर’ से कॉपी किया था.  उस फिल्म में एक सीन था जब ईस्टवुड की गर्लफ्रेंड जा रही होती है और वो टर्न..टर्न कह रहे होते हैं. ये सीन आदित्य के दिमाग में बैठ गया और जब वो फिल्म लिख रहे थे तो उन्होंने ‘पलट..पलट.. पलट’ का सीन भी डाल दिया। 

 

सलमान की फिल्म से सूझा क्लाईमेक्स का आइडिया 

आदित्य क्लाईमेक्स सीन के दौरान साधारण सा बैकग्राउंड म्यूजिक इस्तेमाल नहीं करना चाहते थे..छह साल पहले सलमान की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ के क्लाईमेक्स में उन्होंने ‘आई लव यू’ गाने का इस्तेमाल सुना था और उसी से प्रभावित होकर आदित्य ने डीडीएलजे के क्लाईमेक्स सीन में ‘मेहंदी लगाके रखना’ के ऑर्केस्ट्रा वर्जन का इस्तेमाल किया.. वो सीन मैंने प्यार किया के क्लाईमेक्स से भी ज्यादा पसंद किया गया.

 

जब धड़ाम से गिरी काजोल

 

रुक जा ओ दिल दीवाने.. के आखिरी शॉट में काजोल को फ्लोर पर गिराना था.. आदित्य और शाहरुख ने ये बात काजोल को नहीं बताई और काजोल को गिरा दिया ताकि नेचुरल एक्सप्रेशंस आ सके. काजोल का एक्सप्रेशन बिल्कुल हैरान करने वाले थे.. काजोल ने बताया था कि उन्हें चोट भी लगी.. काजोल गुस्सा हो गईं और आदित्य-शाहरुख से बातचीत बंद कर दी.. शाम तक काजोल को मना लिया गया लेकिन गाना खत्म होते ही बांहों से गिरा देना वाला वो शॉट हमेशा के लिए यादगार बन गया.

 

कैंची से छोटी कर दी काजोल की पहली ड्रेस

 

फिल्म में काजोल को इंट्रोड्यूस करने के लिए जो ड्रेस मनीष मल्होत्रा ने बनाई थी वो आखिरी वक्त में उन्हें कुछ बड़ी लग रही थी. मनीष को कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने कैची से ड्रेस छोटी कर दी लेकिन वो कुछ ज्यादा ही छोटी गई फिर भी काजोल उसे पहनकर शूट करने के लिए राजी हो गईं और तब ‘मेरे ख्वाबों में जो आए..’ गाना शूट हुआ।

 

काजोल को नचाने पर हुई बहस

 

‘मेहंदी लगा के रखना’ गाने की शूटिंग के दौरान सरोज खान और आदित्य चोपड़ा में बहस हो गई थी.. आदित्य चाहते थे कि सिमरन गाने के दौरान बैठी रही और आखिर में नाचने आए. लेकिन सरोज ने कहा कि ‘अगर हिरोइन गाने में नहीं नाचेगी तो गाना कैसे खिलेगा’ आदित्य ने इनकार कर दिया.. वो चाहते थे कि गाना खत्म होने के वक्त ही राज और सिमरन साथ में थोड़ा डांस करें.आखिरकार गाना वैसा ही शूट हुआ जैसा आदित्य चाहते थे.. और जब फिल्म सुपरहिट हुई तो सरोज ने आकर आदित्य के सामने अपनी गलती मानी।

 

फैन की डांट से माने शाहरुख ! 

शाहरुख तब एंटी हीरो फिल्में कर रहे थे.. आदित्य ने जब उन्हें ये कहानी सुनाई तो वो फिल्म के लिए राजी नहीं हुए.त्रिमूर्ति के सेट पर आदित्य ने देखा कि एक बूढ़ी महिला शाहरुख का इंतजार कर रही है. शाहरुख अक्सर फैंस से सेट पर मिल लिया करते थे.. बूढ़ी महिला ने पहले बताया कि वो उसे कितना पसंद करती हैं और फिर कहा कि उसे इस तरह के निगेटिव रोल नहीं करने चाहिए.. आदित्य ने भी वो बात सुनी और शाहरुख को समझाया कि डीडीएलजे करो या न करो लेकिन बिना रोमांटिक रोल किए हुए वो न तो एक बेहतर पति, बेटे, पिता का रोल ननिभा पाएंगी और न ही सुपरस्टार बन पाएंगे..  शाहरुख तब चुप रहे.. आदित्य के दिमाग में सैफ अली खान का नाम आया. लेकिन करन-अर्जुन के सेट पर शाहरुख-आदित्य की मुलाकात हुई और शाहरुख राजी हो गए.

 

 डीडीएलजे का राज कपूर कनेक्शन !

ये तो शायद पता ही होगा कि राज कपूर से प्रभावित होकर ही फिल्म का शाहरुख का नाम राजनाथ मल्होत्रा रखा गया जिसका इस्तेमाल कभी नहीं किया गया था.. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि शाहरुख जिस मेंडोलिन को अपने बैग में रखे पूरे यूरोप का ट्रिप कर रहे होते हैं वो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं था.. शाहरुख को पहली बार वो वायलिन की तरह दिखा था.. दरअसल आदित्य कपूर ने 45 साल पहले की राज कपूर की फिल्म  ‘आवारा’ के गाने ‘घर आया मेरा परदेसी’ के एक सीन में मेंडोलीन की आवाज सुनी थी और वो धुन आदित्य के दिमाग में बचपन से बैठ गई थी..इसलिए जब पहली फिल्म बनाई तो ट्रिब्यूट के तौर पर इस मेंडोलिन का इस्तेमाल किया।

 

बाऊजी ने आदित्य का बैंड बजाया !

सीनियर अभिनेता अमरीश पुरी के साथ पहला सीन सुबह का शूट होना था.. शूटिंग से पहले अमरीश पुरी ने आदित्य चोपड़ा से सवाल पूछा

‘वक्त क्या हो रहा होगा’

‘सर..सुबह’

‘नहीं, मैं घड़ी में क्या टाइम रखूं’

सवाल तो बहुत अटपटा था लेकिन आदित्य ने जवाब दिया

‘सर, सुबह के छह-सात बजे होंगे’

‘नहीं.. छह या सात?’

‘सर, सवा छह बजे होंगे’

‘6.15 क्यों..’

‘बलदेव सिंह सुबह 5.30 बजे उठते हैं.. नहाते हैं और सवा छह बजे वो पूजा करते हैं.. 6.30 बजे नाश्ता करते हैं और सात बजे घर से निकल जाते हैं.. ट्रैफलर स्क्वायर पहुंचने में एक घंटा लगता  है जहां वो कबूतरों को खाना खिलाते हैं.. और नौ बजे दुकान खेलते हैं. इसलिए सवा छह बज रहे होंगे’

आदित्य को पता था कि अमरीश पुरी ये जानना चाह रहे थे कि 24 साल के जिस लड़के के हाथों में ये फिल्म है वो कितना काबिल है.. इसके बाद अमरीश पुरी ने कभी कोई सवाल नहीं पूछा 

 

 

अमरीश पुरी इतने खूसट क्यों लगे ?

फिल्म में अमरीश पुरी ने एक सख्त मिजाज पिता का किरदार निभाया और बीस साल बाद भी दर्शक अमरीश पुरी का रोल याद करते हैं. लेकिन ये जानकर आपको आश्चर्य होगा कि इस कड़कपन की वजह फिल्म में उनकी पत्नी लाजो बताती हैं जो हिस्सा एडिटिंग के दौरान कट जाता है..

 

लाजो बताती हैं कि, बहुत हंसते थे.. कमीना नरेंद्र नौकरी का झूठा वादा करके बालदेव सिंह को लेकर आया था और सब लूटकर अफ्रीका भाग गया था तब से अमरीश पुरी बुझ गए थे.. वर्ना इनके ठहाके की आवाज नदी के पार जाया करती थी यानी दोस्त के धोखा देने के बाद अमरीश पुरी का ह्रदय परिवर्तन हो जाता है और वो सख्त मिजाज बन जाते हैं

 

50 बार में लिखा गया ‘मेरे ख्वाबों में जो आए’

33 साल से गाने लिख रहे आनंद बख्शी यश चोपड़ा के लिए सालों से गाने लिख रहे थे ऐसे में बेटे की पहली फिल्म के लिए आनंद बख्शी गाने लिखने के लिए राजी हो गए.. लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि जिस लड़के की पैदाइश से पहले से वो गाने लिख रहे हैं वो पहले गाने को ही 24 बार रिजेक्ट कर देगा.. ‘मेरे ख्वाबों में जो आए…’ के लिए आदित्य ने काजोल की पर्सनालिटी और उसकी ख्वाहिशों की पूरी कहानी बताई थी.. कुछ दिनों बाद बख्शी साहब पांच-छह लाइनें लिखकर लाए लेकिन वो आदित्य को पसंद नहीं आईं..ये सिलसिला दस दिनों तक चलता रहा..रोज आनंद बख्शी गाने की पांच मुखड़े लिखकर लाते.. दसवें दिन तक आदित्य पचास मुखड़े खारिज कर चुके थे.. आखिरकार आनंद बख्शी ने कह दिया कि तुम किसी और ले लो..लेकिन तब आदित्य ने कहा- नहीं अंकल, गाने तो आप ही लिखोगे.. आदित्य ने कहा कि हो सकता है कि मैं आपको ठीक से समझा नहीं पा रहा हूं. हर चीज मुझे देखी-दिखाई लग रही है.. उसी मीटिंग के आखिर में बख्शी साहब लाइन लेकर आए- मेरे ख्वाबों में जो आए, आ के मुझे छेड़ जाए, उससे कहो कभी सामने तो आए..

 

बिना ‘आई लव यू’ के बनी डीडीएलजे

जिस फिल्म ने बॉलीवुड को ‘किंग ऑफ रोमांस’ दिया उस शाहरुख या काजोल ने कभी फिल्म में एक दूसरे को आई लव यू ही नहीं कहा। राज और सिमरन को प्यार तो  होता है लेकिन इजहार अलग ढंग से हुआ.. निर्देशक आदित्य चोपड़ा के लिए ‘आई लव यू’ का मतलब था- मैं नहीं आऊंगा. जब एक लड़की अपनी शादी में किसी लड़के को निमंत्रण देती है तो लड़का क्यों कहेगा- मैं नहीं आऊंगा. सिमरन भी इस ‘मैं नहीं आऊंगा’ का मतलब समझ जाती है  और जब घर लौट रही होती है तो उसे अहसास होता है- हो गया है तुझको तो प्यार सजना.

 

तुझे देखा तो ये जाना सनम.. मनमाफिक शूट नहीं हो पाया था

फिल्म का सबसे सुपरहिट गाना आदित्य चोपड़ा को पसंद नहीं आया था क्योंकि वो इस गाने को ‘यश चोपड़ा टाइप’ नहीं फिल्माना चाहते थे जिसमें शिफॉन की साड़ी पहने, वादियों वाले बैक्ग्राउंड में हीरो-हिरोइन गले लगते हुए गाना शूट करें.. आदित्य कपूर चाहते थे कि राज-सिमरन उन्हीं लोकेशन पर अपनी यादों को ताजा करें जहां दोनों ने साथ वक्त गुजारे थे. चर्च, ट्रेन.. वगैरह.. रिलीज के बाद आमिर खान ने भी कहा था कि इस गाने को और बेहतर ढंग से फिल्माया जा सकता था..

 

12 दिन में लिखी, 20 साल से चल रही है फिल्म

फिल्म के लेखक, निर्देशक आदित्य चोपड़ा के दिमाग में इस फिल्म का खाका एक साल से घूम रहा था. फिल्म के हर सीन, लाइन, आइडिया के बारे में आदित्य दिन रात सोचा करते थे और फिर एक मौका आया जब उन्होंने लगातार 12 दिन बैठकर फिल्म की स्क्रीनप्ले लिख डाली। दरअसल फिल्म का आइडिया लेकर आदित्य चोपड़ा रोज हनी ईरानी के पास जाया करते थे जिन्होंने यश चोपड़ा की कई फिल्मों की कहानियां  लिखी थी.. जो भी आदित्य के दिमाग में था वो पूरा हनी को बता देना चाहते थे.. इसी दौरान उन्हें लगा कि जितना उनके दिमाग में है वो सब लिखकर वो हनी ईरानी को दे दें लेकिन जब वो इसे कागज पर उतारने बैठे तो लगातार बारह दिनों तक लिखते रहे और फिल्म का स्क्रीनप्ले तैयार हो गया.. आदित्य के हाथों से लिखा वो स्क्रीनप्ले अब भी सहेजकर रखा हुआ है.

 

एक लाइन से मिला फिल्म बनाने का आइडिया

‘तुम्हे यहां से ले जाऊंगा तभी जब तुम्हारे बाऊजी खुद तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में देंगे’ बस इसी एक लाइन ने आदित्य को वो भरोसा दे दिया कि वो फिल्म खुद बना सकें.. दरअसल ‘डर’ फिल्म खत्म करने के बाद यश चोपड़ा नई फिल्म के आइडिया पर विचार कर रहे थे. तब आदित्य ने सोचा कि इन्हें ‘दिलवाले …’ का आइडिया दे देता हूं और यश चोपड़ा ही फिल्म बना लें.. 

 

आदित्य ने पहले हाफ यानी इंटरवल तक कहानी पिता को सुनाई.. ब्रिटेन में हीरो-हिरोइन पले बढ़े हैं दोनों में प्यार हो जाता है. पिता शादी से इनकार करते हैं और उसे लेकर हिंदुस्तान वापस आ जाते हैं.. और तब वो लड़की के पीछे हिंदुस्तान आ जाता है.. यहीं तक की कहानी आदित्य चोपड़ा के दिमाग में थी.. तभी कहानी सुनाते-सुनाते आदित्य सेकेंड हाफ के बारे में बताने लगे.. कि इस फिल्म में हीरो हिरोइन को भगाकर नहीं ले जाएगा बल्कि हिरोइन से कहेगा.. तुम्हे यहां से ले जाऊंगा तभी जब तुम्हारे बाऊजी खुद तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में देंगे.  जैसे ही ये लाइन आदित्य ने कही उन्हें लगा कि ये फिल्म तो सबसे हटकर होगी.. दो पीढ़ियों के बीच की खाई को ये फिल्म खत्म करेगी क्योंकि  पिता की मर्जी के बगैर बेटी को ले जाने से हीरो इनकार करेगा.. आदित्य चोपड़ा को तभी लग गया यही वो फिल्म है जिससे वो अपना करियर शुरू कर सकते हैं।

 

टॉम क्रूज बनते राज.. और काजोल-क्रूज की जोड़ी बन जाती

आदित्य चोपड़ा की पहली पसंद शाहरुख नहीं टॉम क्रूज थे क्योंकि वह इस फिल्म को अंग्रेजी में बनाना चाहते थे.आदित्य चाहते थे कि वो पहले कुछ हिंदी फिल्मों का निर्देशन करके सफल डायरेक्टर बन जाएं और फिर अंग्रेजी में टॉम क्रूज-काजोल की जोड़ी के साथ इस फिल्म को बनाएं.. कहानी कुछ ऐसी होती कि अमेरिकन लड़का हिंदुस्तानी लड़की से यूरोप में मिलता लेकिन बाद में उन्होंने फिल्म को हिंदी में बनाने का फैसला किया और शाहरुख बने राज मल्होत्रा. अगर ऐसा होता तो डीडीएलजे का क्लाईमेक्स ही कुछ और होता.

 

पंजाब में सरसों के खेत ही नहीं मिले

 

फरवरी में फिल्म के क्लाईमेक्स की शूटिंग होनी थी और उस वक्त तक पंजाब में सरसों की फसल कट चुकी थी। . आदित्य के पास अगली फसल के इंतजार का वक्त नहीं था और ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ गाना बिना सरसों के खेत के शूट हो नहीं सकता था. फिर यूनिट के किसी सदस्य ने बताया कि इस वक्त तो हरियाणा में ही कहीं सरसों के खेत मिल सकते हैं. तलाश पूरी हुई गुड़गांव में और शूटिंग करके पंजाब टीम लौट गई

 

.. जब क्लाईमेक्स बदलने के लिए यश चोपड़ा ने कहा

जिस डीडीएलजे के क्लाईमेक्स को देखकर आज बीस साल बाद भी दर्शक  रोमांचित हो जाते हैं उस सीन पर यश चोपड़ा को भरोसा नहीं था.. दरअसल  क्लाईमेक्स शूट करने के लिए पनवेल जाने से पहले आदित्य ने ये फिल्म यश चोपड़ा, मां पामेला चोपड़ा और फिल्म से जुड़े कुछ लोगों को दिखाई.. किसी ने फिल्म को देखकर बहुत अच्छा नहीं कहा.. सभी को फिल्म थोड़ी लंबी लग रही थी.. यश चोपड़ा ने कहा भी कि वो बेहतर क्लाईमेक्स बताएंगे लेकिन आदित्य राजी नहीं हुए और स्टेशन पर वही क्लाईमेक्स शूट हुआ जो आज तक थियेटर में दिखाया ज रहा है। 

 

किरन खेर ने नाम दिया, इतिहास में पहली बार ‘टाइटल क्रेडिट’ मिला

दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे.. नाम अनुपम खेर की पत्नी किरन खेर ने दिया था.. शशि कपूर की फिल्म ‘चोर मचाए शोर’ के गाने की ये लाइन थी- दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे. इस नाम को अनुपम खेर की पत्नी किरन खेर ने अपनी फिल्म के लिए रजिस्टर भी कर लिया था लेकिन जब आदित्य चोपड़ा ने उन्हें ये कहानी सुनाई तो किरन ने ये नाम उन्हें दे दिया. फिल्म में अनुपम शाहरुख के पिता की भूमिका में थे और किरन का नाम पहली बार बॉलीवुड में टाइटल क्रेडिट में दिया गया

 

.. जब रिलीज से पहले दूरदर्शन पर दिखाई गई !

 

आदित्य ने अपने भाई उदय चोपड़ा और करन जौहर को फिल्म की मेकिंग बनाने की जिम्मेदारी दी.. दोनों ने आठ घंटे के टेप जो कि शूटिंग के दौरान तैयार किए गए थे, के साथ ‘मेकिंग ऑफ डीडीएलजे’ बनाई. दूरदर्शन पर ये कार्यक्रम फिल्म की रिलीज से दो दिन पहले दिखाया गया। ये बॉलीवुड के इतिहास बनी पहली मेकिंग थी. दर्शकों में इसको लेकर बेकरारी ऐसी थी कि दूर असम में लोग बाजार बंद करके घर पर टीवी से चिपके थे क्योंकि उन्हें लगा कि रिलीज होने से पहले ही फिल्म दूरदर्शन पर दिखाई जा रही है.

 

तब से ही छोड़ा था आमिर ने अवॉर्ड फंक्शन में जाना

11 फिल्मफेयर रिकॉर्ड हासिल करने का रिकॉर्ड इसी फिल्म के नाम पर है. इसी साल ‘रंगीला’ भी रिलीज हुई थी लेकिन डीडीएलजे की आंधी में वो बदरंग रह गई.

 

आमिर को उम्मीद थी कि बेस्ट हीरो का खिताब उन्हें ही मिलेगा. कहा जाता है कि तभी से आमिर ने अवॉर्ड फंक्शन में जाना छोड़ दिया और आज बीस साल बाद भी अवॉर्ड के बादशाह शाहरुख ही हैं ! और आमिर को अवॉर्ड पर यकीन नहीं है. पायल बचाके चलना… यश चोपड़ा के लिए शूट कर रखा था.. हालांकि उन्होंने बदल दिया,.. मेहंदी लगाके रखना..डोली सजा के रखना. बड़े-बड़े शहरों वाले डायलॉग के लिए पीछे वाली सीट पर थे.

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