ABP न्यूज के कार्यक्रम घोषणापत्र में योगेंद्र यादव बोले, भरोसा है उपराज्यपाल सही फैसला करेंगे

By: | Last Updated: Friday, 7 February 2014 2:35 PM

नई दिल्ली: एबीपी न्यूज के कार्यक्रम घोषणापत्र में आम आदमी पार्टी के नेता योगेंद्र यादव ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग जनलोकपाल को लेकर जो भी फैसला लेंगे वो फैसला सही होगा.

 

उन्होंने इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहा,  उपराज्यपाल नजीब जंग अपने फैसले से साबित करेंगे कि वे किसी के एंजेंट नहीं हैं. मैं साफ कहना चाहता हूं कि मैं उन्हें कांग्रेस का एजेंट नहीं मानता.

 

इसी कार्यक्रम में योगेंद्र यादव ने कहा कि अगर दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती न्यायिक जांच में दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें हटना पड़ेगा.

 

उन्होंने यह भी कहा कि आज लोग आम आदमी पार्टी से सवाल कर रहे हैं, हम उम्मीद करते हैं कि वह कल नरेंद्र मोदी से भी सवाल करेंगे.

 

जवाब: हां! लोग दूर हो रहे हैं, लेकिन यह शिवजी की बारात है… इसलिए कुछ लोग रुठेंगे. 

 

चौथा सवाल: ‘आप’ से अपने दूर क्यों जा रहे हैं?

 

कुनबा बसा नहीं और घर की छत टपकने लगी. यही हो रहा है आम आदमी पार्टी में. लक्ष्मीनगर से आप के विधायक विनोद कुमार बिन्नी ने सबसे पहले बगावत की. कहा कि केजरीवाल तानाशाह हैं और आम आदमी पार्टी तीन चार लोगों की मुट्ठी में है.

 

बिन्नी फिलहाल पार्टी से निकाले जा चुके हैं और वो सरकार से समर्थन भी वापस ले चुके हैं. लेकिन सिर्फ बिन्नी ही बागियों की लिस्ट में नहीं हैं. आप आदमी पार्टी की संस्थापक सदस्य रहीं मधु भादुड़ी भी पार्टी को छोड़ चुकी हैं. मधु कहती हैं कि आप में महिलाओं को इंसान नहीं समझा जाता. मधु की नाराजगी सबसे ज्यादा सोमनाथ भारती प्रकरण को लेकर है.

 

सवाल ये है कि आखिर क्या वजह है जो आप की शुरुआत से जुड़े नेता दिल्ली में सरकार बनने के चंद दिनों के भीतर ही पार्टी छोड़कर चले गए.

 

आम आदमी पार्टी कुछ ही लोगों के चंगुल में फंसी हुई है.

 

क्या वाकई केजरीवाल का रवैया तानाशाह जैसा है.

 

क्या आम आदमी पार्टी लोगों को गुमराह कर रही है.

 

अन्ना हजारे और किरन बेदी ने तो पहले से ही केजरीवाल का साथ देने से मना कर दिया था. आंदोलन के जो साथी केजरीवाल के साथ आम आदमी पार्टी बनाने में आगे थे अब धीरे धीरे वो भी दूर जा रहे हैं. केजरीवाल का कहना है कि वो राजनीति की कीचड़ में इसलिए उतरे हैं कि राजनीति को साफ कर सके लेकिन ये जवाब कौन देगा कि इस कीचड़ में उनके अपने उन्हें छोड़-छोड़कर क्यों जा रहे हैं.

 

जवाब: ऐसे सवाल करने से राजनीति के प्रतीकों का अपमान होगा.

 

जो खिड़की एक्सटेंशन में हुआ, उसमें अगर मंत्री दोषी पाए गए तो उन्हें जाना होगा…

 

पार्टी में महिला का सम्मान है और होना चाहिए…हम देश की हर आम महिला से निवेदन करते हैं कि अगर उन्हें लगता है कि आम आदमी पार्टी अगर कुछ कर सकता है वे आएं पार्टी से जुड़े.

 

तीसरा सवाल: सरकार चला रहे हैं या ड्रामा कर रहे हैं?

 

जो कभी नहीं हुआ किसी ने नहीं किया वो केजरीवाल ने किया. दिल्ली पुलिस के खिलाफ पूरी  सरकार सड़क पर धरना देने बैठ गई. खुद मुख्यमंत्री केजरीवाल ने रात फुटपाथ पर सोकर बिताईं. इसी सब के बाद देश में सवाल उठे कि केजरीवाल सरकार चला रहे हैं या ड्रामा कर रहे हैं.

 

जनता के हित में फैसले ले रहे हैं या दिखावा कर रहे हैं. केजरीवाल ने वादा किया था कि वो बिजली पचास फीसदी सस्ती कर देंगे. बिजली कंपनियों ने दाम कम नहीं किए तो सरकार ने सब्सिडी बढ़ा दी.

 

बाद में बिजली कंपनियों ने सरचार्ज लगाकर बिजली और महंगी कर दी. अब बिजली सप्लाई को लेकर केजरीवाल सरकार कंपनियों से उलझी हुई है. पानी पर जरूर केजरीवाल सरकार ने थोड़ा मरहम लगाया.

 

दिल्ली में मीटर वाले हर घर को मुफ्त 666 लीटर पानी हर रोज मिल रहा है.

 

केजरीवाल कैबिनेट ने दिल्ली लोकपाल बिल पास कर दिया है.

 

इसे पास कराने के लिए मैदान में विधानसभा का सत्र बुलाने की जिद है.

 

लोकपाल बिल बिना उप राज्यपाल की मंजूरी के विधानसभा में पेश किया जा रहा है.

 

जानकार कहते हैं कि ये संविधान के खिलाफ है.

 

चुनाव से पहले शीला दीक्षित के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत लेकर घूम रहे केजरीवाल अब दूसरों से शीला के खिलाफ सबूत मांग रहे हैं.

 

केजरीवाल की पहल पर कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान स्ट्रीट लाइट खरीद में घपले पर एफआईआर तो दर्ज हो गई लेकिन इसमें शीला का नाम नहीं है.

 

केजरीवाल के मंत्रियों के कामकाज पर भी सवाल उठ रहे हैं. कानून मंत्री सोमनाथ भारती रात में विदेशी नागरिकों के घर छापा मारने पहुंच जाते हैं और भिड़ पड़ते हैं दिल्ली पुलिस से.

 

अब हाल ये है कि आए दिन दिल्ली में कोई ना कोई धरना प्रदर्शन केजरीवाल सरकार के खिलाफ होता रहता है. सब्जी फल बेचने वालों ने हड़ताल की तो सरकार ने एस्मा लगा दिया. अब लोग पूछ रहे हैं कि केजरीवाल खुद धरने पर बैठे तो ठीक दूसरे करें तो एस्मा क्यों.

 

सवाल उठ रहे हैं कि क्या केजरीवाल की सरकार दिल्ली में अराजकता फैला रही है.

 

जवाब: हमारा कांग्रेस से कोई रिश्ता नहीं है… कोई बातचीत नहीं हुई…

 

हम गठबंधन की राजनीति को तरफदार नहीं है… अगर ऐसा हुआ आ आम आदमी पार्टी का मतलब क्या है.

 

हम इस देश में भ्रष्टाचारी, वंशवादी को रोकना चाहते हैं…

 

कुछ नई चीज़ आती है तो निराशा, चौंकना स्वभाविक है.

 

दूसरा सवाल: आप और कांग्रेस साथ-साथ हैं ?

 

2 जनवरी को दिल्ली विधानसभा में जब केजरीवाल सरकार के सामने बहुमत हासिल करने का सवाल था तो कांग्रेस ने खुलकर उनका साथ दिया.

 

दिल्ली के चुनाव में ना समर्थन लेने और ना देने की कसमें खाने वाले केजरीवाल आज की तारीख में कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रहे हैं. सवाल उठ रहे हैं कि आप का कांग्रेस से रिश्ता क्या कहलाता है?

 

बीजेपी कहती है कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस की बी टीम है और सिर्फ मोदी को रोकने के लिए वो चुनाव में कूदी है. क्या सिर्फ मोदी का खेल खराब करने के लिए आप मैदान में कूदी है.

 

दिल्ली की राजनीति की कहानी भी अजीब है जिनकी मदद से केजरीवाल सरकार चला रहे हैं गाली भी उन्हीं को वो सबसे ज्यादा देते हैं.

 

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि लोकसभा चुनाव में आप क्या करेगी-

 

आम आदमी पार्टी कांग्रेस की सहय़ोगी है या विरोधी क्य़ा लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस का साथ लेंगे केजरीवाल?

 

जवाब: हां! हम हराने के लिए आए हैं, और भ्रष्टाचार को हराने के लिए आए हैं.

 

# जो हम से अपेक्षा की जा रही है वह किसी और सरकार से क्यों नहीं की जा रही है.

 

# मेरे लिए कामयाबी का मतलब है कि क्या राजनीति की मर्यादा बदल सकते हैं कि नहीं, अब कुछ तो बदलने लगा है. देश बड़ा महत्व है… आम आदमी पार्टी छोटी चीज़.

 

# जो आंदोलन से आते हैं उन्हें सत्ता में नहीं आना चाहिए, यह कहना सही नहीं है… अगर ऐसा हुआ तो वह लोग सत्ता में आ जाएंगे, जो बड़े दलाल होंगे.

 

पहला सवाल: ‘आप ‘ चुनाव क्यों लड़ रही है?

 

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है, अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं. पूरा जनादेश ना मिलने के बावजूद केजरीवाल सरकार चला रहे हैं. अब ‘आप’ की निगाहें लोकसभा चुनाव पर हैं.

 

लेकिन देश पूछ रहा है ‘आप’ से सवाल आखिर ‘आप’ को इतनी जल्दी क्यों है ?

 

लोकसभा चुनाव क्यों लड़ रही है ‘आप’ ?

 

पहले दिल्ली में अपने वादे क्यों नहीं पूरा करती ‘आप’?

 

आम आदमी पार्टी ने 350 सीटों पर लड़ने का एलान किया है, जब पूर्ण जनादेश नहीं मिलने वाला तो फिर चुनाव में क्यों ? लोकसभा चुनाव से पहले ओपिनियन पोल भी इशारे कर रहे हैं कि दिल्ली को छोड़कर आप का देश में ज्यादा असर नहीं है.

 

एबीपी न्यूज नीलसन के ओपिनियन पोल में आप को देश भर में 11 सीट मिलती दिख रही हैं. सीएनएन आईबीएन के ओपिनियन पोल में आप को 6 से 12 सीट मिलने का अनुमान है. जबकि इंडिया टुडे के ओपिनियन पोल में आम आदमी पार्टी को देश भर में 10 सीट मिलने का अनुमान है.

 

सवाल ये भी है कि आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव जीतने के लिए लड़ रही है या फिर किसी को हराने के लिए.

 

कौन हैं योगेंद्र यादव?

 

गले में गमछा, बगल में झोला, चेहरे पर घनी दाढ़ी, दिखने में बेहद आम और नाम है योगेंद्र यादव. इन्हें आम आदमी पार्टी के चाणक्य के तौर पर जाना जाता है.

 

तीखे सवालों का मुस्कुराकर जवाब देने में माहिर योगेंद्र यादव दिल्ली में राज कर रही आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकार हैं. जिस तरह पार्टी की दशा और दिशा को सामने से अरविंद केजरीवाल तय कर रहे होते हैं उसी तरह परदे के पीछे की रणनीति बना रहे होते हैं योगेंद्र यादव.

 

योगेंद्र का सफर

 

हरियाणा के रेवाड़ी में जन्मे 50 साल के योगेंद्र यादव ने सक्रिय राजनीति में आने से पहले लंबा अरसा राजनीति और समाज से जुड़े मुद्दों पर लिखते हुए बिताया है. अपने राजनीतिक आंकलन के लिए मशहूर योगेंद्र यादव देश के बड़े सेफोलॉजिस्ट में से एक रहे हैं.

 

योगेंद्र यादव अपने लेखों, भाषणों और देश के नामचीन प्रोफेशनल संस्थानों में युवाओं के बीच दिए लेक्चर्स में हमेशा अच्छी राजनीति की वकालत करते रहे हैं.

 

योगेंद्र यादव सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटी यानी सीएसडीएस  के फेलो होने के साथ ही यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानि UGC के सदस्य भी रहे.

 

साल 2010 में योगेंद्र यादव को नेशनल एडवाइजरी कमेटी का सदस्य भी बनाया गया. योगेंद्र यादव ने शिक्षा का अधिकार लागू करवाने में बड़ी भूमिका निभाई.

 

जाने माने समाजवादी नेता किशन पटनायक को अपना राजनीतिक गुरू मानने वाले योगेंद्र यादव अब आम आदमी पार्टी के नए नवेले नेताओं के राजनीतिक गुरू हैं.

 

योगेंद्र यादव आजकल हरियाणा में आम आदमी पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं, वहां बड़ी बड़ी रैलियां कर रहे हैं.

 

राजनीति के जानकार कहते हैं कि अगर आम आदमी पार्टी हरियाणा में अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसका सेहरा योगेंद्र यादव के सिर बंधेगा और वो हरियाणा के सीएम भी बन सकते हैं.

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