अलीगढ़ में नहीं चल रही है 'अलीगढ', नाम और कहानी को लेकर एतराज

By: | Last Updated: Sunday, 28 February 2016 4:33 PM
Aligarh ‘banned’ in Aligarh

नई दिल्ली: 26 फरवरी को रिलीज हुई निर्देशक हंसल मेहता की फिल्म ‘अलीगढ़’ तमाम विरोध के चलते अलीगढ़ के सिनेमा घरों में नहीं लगी. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के साथ ही स्थानीय लोग फिल्म के नाम और कहानी पर आपत्ति जता रहे है.

‘अलीगढ़’ फिल्म एएमयू के प्रोफेसर श्रीनिवास रामचंद्र सिरास के समलैगिंक संबंधों पर आधारित है. फिल्म के नाम को लेकर एएमयू में नाराजगी है. विरोध के चलते अलीगढ़ के सिनेमाघर संचालकों ने फिल्म को अपने यहां नहीं चलाने का फसला लिया है.

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अलीगढ़ में छह साल पहले सुर्खियों में आया समलैंगिक सेक्स मुद्दे को बड़े पर्दे पर फिल्माया गया है. हंसल मेहता ने अभिनेता मनोज बाजपेयी, राजुकमार राव को लेकर बरेली में फिल्म अलीगढ़ का निर्माण किया है. सोशल मीडिया और इंटरनेट पर फिल्म चर्चा का विषय बनी है.

इस फिल्म की कहानी प्रोफेसर डॉक्टर एसआर सिरास के इर्द-गिर्द घूमती है. जिन्हे उनके समलैंगिक संबंधों के आरोप में 2010 में नौकरी से निकाल दिया गया था. बाद में वो अपने कमरे में रहस्मय तरीके से मृत मिले थे.

यूनिवर्सिटी प्रवक्ता राहत अबरार का मानना है कि इस फिल्म के लिए डायरेक्टर या किसी ने भी AMU से कोई संपर्क नहीं किया. अलीगढ़ ज्ञान का केंद्र है, इसकी तहजीब को हाईलाइट करना चाहिए. एक आदमी को लेकर आप पूरे शहर को बदनाम कर रहे हैं.

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यूनिवर्सिटी प्रवक्ता के मुताबिक प्रोफे सिरास के एक रिक्शे वाले से अप्राकृतिक सम्बन्ध थे और वो उसका उत्पीड़न करते थे. वो उसकी गरीबी का फायदा उठाते थे. वो पूरी तरह से पेड सेक्स करते थे. जो हमारे देश में अपराध है.

राहत अबरार ने आगे भताया कि उन्होंने अपराध किया इस लिए उनको निलंबित किया. उन्होंने 1999 में महाराष्ट्र में भी ऐसा ही कुछ काम किया जिसके लिए उनको गिरफ्तार किया. हमने जांच कराई. ऐसा व्यक्ति जिसने अपराध किया है उसको हाईलाइट करना मुझे सही नहीं लगता. उस फिल्म की कोई शूटिंग अलीगढ़ में नहीं हुई. alig 2

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति जमीरुद्दीन शाह ने इस फिल्म से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया. उन्होंने इस फिल्म की आप जितनी खिलाफत करेंगे उसे उतनी ज्यादा पब्लिसिटी मिलेगी.

alig 1एएमयू से जुड़े छात्रों का कहना है कि फिल्म के लिए समाज में कोई जगह नहीं है. फिल्म से एएमयू की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है. छात्रों का यह भी मानना है कि एएमयू में इस तरह का माहौल नहीं है,जैसा फिल्म में दर्शाया गया है,ये फिल्म लोगों को भटकाने वाली है.

अलीगढ़ के सिनेमा मालिकों का कहना है कि चारों तरफ हो रहे विरोध को देखते हुए उन्होंने फिल्म को ना दिखाने का फैसला किया. प्रशासन की ओर से कैमरे पर तो कुछ नहीं कहा. प्रशासन के मुताबिक फिल्म दिखाने या ना दिखाने का फैसला सिनेमाघर मालिकों का है. ऐसे में अगर कोई प्रशासन की मदद की मांग करेगा तो हम उसकी पूरी सहायता करेंगे.

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