जब अमिताभ बच्चन की महफिल में गुल हुई बत्ती

By: | Last Updated: Tuesday, 15 September 2015 3:50 AM
Amitabh Bachchan distributes helmets to Mumbai Traffic Police

मुंबई: नाटकों और अलग-अलग तरह के इवेंट्स के लिए मशहूर मुंबई के भाईदास हॉल में जमा तकरीबन 1000 लोगों की भीड़ को अमिताभ बच्चन की दमदार शख्सियत के आने का बेसब्री से इंतजार था. तय समय से लगभग 45 मिनट बीत जाने के बाद भी जब मंच से पर्दा नहीं उठा तो हमेशा पंक्चुअल रहने वाले अमिताभ के लेट हो जाने की सुगबुगाहट शुरु हो गई थी.

 

मगर वहां मौजूद कम ही लोगों को इस बात का एहसास था कि वक्त की पाबंदी के लिए बॉलीवुड में लम्बे वक्त से मिसाल के रूप में पेश किए जानेवाले अमिताभ की तरफ से देर नहीं हो रही थी. दरअसल, देरी की वजह मुंबई के नए-नए कमिश्नर बने अहमद जावेद बन गए थे, जिनका इंतजार अमिताभ को भी था.

 

अमिताभ के हाथों ट्रैफिक पुलिस के कुछ मुलाजिमों को हेलमेट बांटने का ये इवेंट थोड़ी देर से शुरू हुआ, तो खत्म भी जरा देर से ही हुआ और देरी की वजह बिजली का दो बार जाना भी बना. बिजली ने बच्चन की इस महफिल को एक बार दगा तब दिया, जब पुलिस कमिश्नर जावेद अहमद मुंबई के ट्रैफिक के हालात सामने रख रहे थे और अमिताभ बड़े गौर से उन्हें सुन रहे थे.

अचानक छाए अंधेरे ने सबको हैरान कर दिया. कार्यक्रम थम गया. स्टेज पर विराजमन मगर असहज से हो उठे अमिताभ समेत हॉल में मौजूद सभी अपनी-अपनी हैरानी को जज्ब किए हुए फिर से उजाले के इंतजार में लग गए. दो मिनट की काना-फूंसी के बीच बिजली लौटी तो सबने राहत की सांस ली. अहमद जावेद ने अपनी स्पीच को कंटीन्यू करने से पहले जिस नाटकीय अंदाज में ‘चलो जल्दी आ गई’ कहा, उससे अमिताभ के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई.

 

मगर मंच से ‘अमिताभजी को किसी काम से जल्दी जाना है’ के कई बार हुए उद्घोष के बावजूद लापरवाह बत्ती फिर से गुल हो गई. इस बार अमिताभ स्टेज पर मौजूद लोगों को एक-एक कर सम्मानित करने के लिए खड़े हुए थे. इंतजार इस बार लम्बा साबित हुआ. 7-8 मिनट तक अमिताभ उसी मुद्रा में अंधेरे में खड़े रहे, ये सोचते हुए शायद की ना जाने इस बार बिजली कब आएगी ? उधर, स्टिल फोटोग्राफर्स की आगे खड़ी कतार ने अंधेरे में फ्लैश का सहारा लेकर अमिताभ को तस्वीरों में कैद करने के सिलसिले को और तेज कर दिया था.

 

खैर, वक्त के पाबंद अमिताभ टैफिक रूल्स के मामले में भी कभी कोई कोताही नहीं बरतते. ‘जब कभी मॉर्निंग वॉक के लिए निकलता हूं, मैं खुद ही गाड़ी चलाकर जाता हूं. कोई ट्रैफिक रूल्स तोड़ने की कोशिश करे तो मैं गाड़ी से उतरकर खुद ही उसे समझता हूं… कभी-कभी ये मेरे लिए महंगा पड़ता है… क्योंकि इसके बदले में मुझे सेल्फी खिंचवानी पड़ती है और कभी ऑटोग्राफ देने पड़ते हैं… मगर ऐसे लोगों के साथ मुझे हजार सेल्फी खिंचवानी पड़े या फिर ऑटोग्राफ देने पड़ें, मुझे मंजूर है…’, हंसते हुए जब अमिताभ ने इस वाकये का जिक्र किया तो जैसे पूरा हॉल हंस पड़ा था उनके साथ. 

अमिताभ ने उनकी आवाज और चेहरे का फायदा उठाने की भी नसीहत दी. ‘मेरे साथ कोई ऐड बना सकते हैं ये लोग… मैं तैयार हूं… जब मैं गुजरात टूरिज्म का एम्बैसेडर बन सकता हूं, महाराष्ट्र में शेरों को बचाने की बात कर सकता हूं, सिमेंट बेच सकता हूं… तो ट्रैफिक पुलिस के लिए कुछ क्यों नहीं कर सकता हूं ?’

 

पुरजोर और पुरकशिश आवाज में फिक्रमंद अमिताभ ने जब उन्हें सबकुछ देनेवाले शहर के ट्रैफिक रूल्स से संबंधित अपनी तमाम तरह की चिंताएं जताईं तो हॉल में मौजूद सभी लोगों ने पूरे ध्यान से उन्हें सुना. तालियों की गूंज ने भी अमिताभ के चिंतित स्वरों में अपनी आवाज मिला दी थी.

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Web Title: Amitabh Bachchan distributes helmets to Mumbai Traffic Police
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