अंतिम चरण– क्या है सीटों का गणित, इस इलाके में भारी कौन?

By: | Last Updated: Tuesday, 3 November 2015 7:26 AM

नई दिल्ली : आज शाम 5 बजे बिहार में चुनाव प्रचार का शोर पूरी तरह से शांत हो जाएगा. महीने भर से ज्यादा से बिहार में चुनाव प्रचार चल रहा है. आज आखिरी और पांचवें दौर के चुनाव के लिए 9 जिलों की 57 सीटों पर प्रचार थमेगा. आखिरी दौर में 5 नवंबर को वोटिंग है. बिहार के जिस इलाके में इस दौर में चुनाव है उसे मिथिलांचल, कोसी, सीमांचल के नाम से भी जाना जाता है. जिलों की बात करें तो दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज जिलों में वोटिंग होनी है.

 

क्या है सीटों का गणित?

दरभंगा- मधुबनी में 10-10 सीटें हैं. पूर्णिया और कटिहार में 7-7 सीटें. अररिया में 6, सुपौल में 5, मधेपुरा, सहरसा, किशनगंज में विधानसभा की 4-4 सीटें हैं. इस दौर के चुनाव में जेडीयू ने 25, आरजेडी ने 20 और कांग्रेस ने 12 उम्मीदवार उतारे हैं. एनडीए में बीजेपी 38, एलजेपी- 11, हम 3, और आरएलएसपी ने 5 उम्मीदवार उतारे हैं.

 

2010 के विधानसभा चुनाव में जब जेडीयू-बीजेपी का गठबंधन था तब बीजेपी को इस इलाके में सबसे ज्यादा 23 सीटें मिली थी. तब जेडीयू ने 20 सीटों पर जीत हासिल की थी. आरजेडी को 8, एलजेपी को 2, कांग्रेस को 3 और अन्य को 1 सीट मिली थी.

 

इस इलाके में भारी कौन?

 

इस इलाके में मुस्लिम और यादव आबादी सबसे ज्यादा है. इस लिहाज से देखें तो इस बार के चुनाव में ये इलाका महागठबंधन यानी लालू-नीतीश का गढ़ है. लोकसभा चुनाव में दरभंगा-मधुबनी जिले की 3 सीटों पर ही बीजेपी को जीत मिली थी. बाकी की 6 सीटें बीजेपी के विरोधियों के खाते में गई थी. बड़ी बात ये हुई थी कि मोदी लहर में भी पूर्णिया, कटिहार, अररिया की सीट बीजेपी हार गई थी. जबकि इससे पहले इन लोकसभा सीटों पर बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही थी.

 

बाकी इलाकों से इस इलाके का सियासी समीकरण थोड़ा अलग है. लालू-नीतीश और एनडीए के अलावा तीन और पार्टियों का कमोबेश कुछ क्षेत्रों में प्रभाव है. पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी का जोर इसी इलाके में है. पप्पू यादव मधेपुरा से सांसद हैं. एनसीपी के तारिक अनवर भी इसी इलाके की कटिहार सीट से सांसद हैं. तारिक अपने दम पर मैदान में हैं. ओवैसी की पार्टी भी 6 सीटों पर यहां मैदान में है. इन तीनों पार्टियों को जो वोट मिलेगा उसका नुकसान महागठबंधन को होगा. लेकिन ताजा राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से नुकसान संभव नहीं दिख रहा है.

 

किन मुद्दों पर महाभारत?

 

इस इलाके में बेरोजगारी, विस्थापन और विकास की कमी सबसे बड़ी समस्या है. कोसी का इलाका जिसमें मधेपुरा, सहरसा और सुपौल जिले शामिल हैं वहां कोसी की तबाही से विस्थापित हुए लोगों का पुनर्वास बड़ा मुद्दा है. सीमांचल इलाका जहां चार जिले हैं वहां मुस्लिम आबादी बहुत ज्यादा है. किशनगंज में करीब 70 फीसदी मुस्लिम है. लेकिन ये इलाका काफी पिछड़ा हुआ है. शिक्षा और बेरोजगारी यहां की अहम समस्याएं हैं. दरभंगा- मधुबनी की बात करें तो ये इलाका बाकी इलाकों से बेहतर है. शहरों का जैसा विकास होना चाहिए वैसा नहीं हुआ है. ग्रामीण इलाकों में अशिक्षा और बेरोजगारी बड़ी समस्या है. ब्राह्मण बहुल इस इलाके में कमाई के लिए लोग दिल्ली-मुंबई का रुख करते हैं. पेपर से लेकर चीनी मिल तक बंद है.

 

इस दौर में करीब एक करोड़ 55 लाख वोटर 827 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. इनमें से 58 महिला उम्मीदवार भी हैं. कुल करीब 81 लाख पुरुष और 73 लाख महिला वोटर हैं. सहरसा जिले की सिमरी बख्तियारपुर और महिषी सीट पर ही 3 बजे तक वोटिंग है. बाकी 55 सीटों पर 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे.

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Web Title: Bihar polls: Election Campaign end for Bihar 5th Phase today
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