दिबाकर की फिल्म को पड़ी धुएं और कीचड़ की जरूरत

By: | Last Updated: Sunday, 23 November 2014 12:54 PM

पणजी: फिल्मकार दिबाकर बनर्जी ने अपनी आगामी फिल्म ‘डिटेक्टिव ब्योकेश बख्शी’ में स्मॉक मशीन, धूल और कीचड़ का प्रयोग किया है. उनका मानना है कि फिल्म को रियल लुक देने के लिए ये सब चीजें जरूरी हैं.

 

यहां फिल्म बाजार में एक फिल्मी सत्र के दौरान दिबाकर और फिल्म की प्रोडक्शन डिजाइनर वंदना कटारिया, सिनेमेटोग्राफर निकोस आन्दितसाकिस और क्रिएटिव निर्माता विकास चंद्रा ने बताया कि कैसे उन्होंने फिल्म को एक पीरियड लुक देने से बचाने की कोशिश की.

 

आन्दितसाकिस ने कहा, “हमने उस जमाने की फिल्मों से आइडिया लिया, लेकिन हमारी फिल्म का लुक समकालीन है. यह किसी काल विशेष की फिल्म नहीं है.” वहीं, कटारिया ने कहा कि उन्होंने इमारतों के लिए ‘ऐजिंग तकनीक’ का इस्तेमाल किया.

 

उन्होंने समझाया, “सेट पर धूल उड़ाई गई, पानी फेंका गया, टिश्यू पेपर का इस्तेमाल किया, नालियां बनाई गई और कीचड़ डाली गई. इन सबने दृश्य को वास्तविक बनाने में मदद की.”

 

दिबाकर इससे सहमत हैं. उन्होंने कहा, “धुएं, धूल और कीचड़ से ज्यादा वास्तविकता कोई नहीं ला सकता.”

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Web Title: Dibakar Banerjee-Smoke-Dirt Needed to Sell Reality
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