मूवी रिव्यू: डराती कम, बोर ज़्यादा करती है अलोन

By: | Last Updated: Saturday, 17 January 2015 8:10 AM
film review: alone

रेटिंग: डेढ़ स्टार

 

तक़रीबन 20 साल पहले हॉरर शो नाम का एक टेलीविज़न शो आता था जिसमें ज़्यादातर कहानियां भूत-प्रेत, भटकती आत्माओं, शहर से दूर एक खाली हवेली, तांत्रिक वगैरह जैसे सब्जेक्ट के इर्द-गिर्द घूमती थीं…ये सब देखकर पहले दर्शक कई साल डरे, फिर हंसे भी. लेकिन 20 साल बीतने के बाद भी हॉरर के नाम पर बिलकुल वही घिसा-पिटा, बकवास माल परोसा जाए तो न डर लगता है, न हंसी आती है. बल्कि गुस्सा आता है! निर्देशक भूषण पटेल की ‘अलोन’ बोरियत और पुराने फॉर्मूलों से भरपूर बकवास फिल्म है.

 

ये कहानी है दो जुड़वा बहनें संजना और अंजना (बिपाशा बासु) की जिनके शरीर आपस में जुड़े हुए होते हैं. संजना को कबीर (करण सिंह ग्रोवर) से प्यार हो जाता है. ऑपरेशन करके दो बहनों को अलगह किया जाता है. इसी दौरान एक बहन अंजना की मौत हो जाती है. संजना और कबीर शादी कर लेते हैं लेकिन फिर कई साल बाद मरी हुई बहन की आत्मा इन्हें परेशान करने वापस लौटती है. वो ऐसा क्यों करती है, ये कहानी का सस्पेंस है.

 

मगर कहानी के इस सस्पेंस से आप ज़्यादा उम्मीद मत रखिएगा क्योंकि फिल्म का पहला सीन देखकर ही आपको आने वाले हर सीन का पहले से अंदाज़ हो जाएगा. हॉरर फिल्म होते हुए भी फिल्म का एक भी सीन आपको डराएगा नहीं. बल्कि इसमें कहानी इतनी धीमी गति से आगे बढ़ती है मानो 40 मिनट के टीवी सीरियल को दो घंटे तक खींचा गया हो.

 

इंटरवल के फौरन बाद जब निर्देशक की समझ में कुछ नहीं आया तो ज़बरदस्ती बिपाशा के हॉट सीन ठूसे गए. बिलकुल वैसे ही सीन जो दर्शक जिस्म और राज़ जैसी उनकी फिल्मों में पहले ही देख चुके हैं. कम से कम उन फिल्मों में संगीत कुछ बेहतर था, यहां तो गीत-संगीत भी इतना उबाऊ है कि नज़र बिपाशा के बिंदास सीन से ज़्यादा घड़ी पर रहती है कि फिल्म खत्म कब होगी.

 

बिपाशा पिछले कुछ समय से हॉरर फिल्मों की चहेती हीरोइन बन गई हैं. उनके पास दो से ढाई एक्सप्रेशन हैं जो वे बार-बार इन हॉरर फिल्मों में दिखाती हैं. अलोन में ऐसा कुछ नहीं है जिसे देखने के लिए दर्शक टिकट खरीदकर थिएटर में जाएं. करण सिंह ग्रोवर टीवी के कामयाब स्टार हैं. उनका स्क्रीन प्रेज़ेंस बहुत अच्छा है लेकिन यहां न तो उनका रोल ठीक लिखा गया है न ही उनके सीन असरदार हैं. कई सीन में तो वे एक्स्ट्रा की तरह बिपाशा के साथ खड़े नज़र आते हैं.

 

आमतौर पर हॉरर फिल्मों में तक़रीबन एक से ही फॉर्मूलों, बैकग्राउंड म्यूज़िक और किरदारों का इस्तेमाल होता है लेकिन अक्सर निर्देशक उन्हें कुछ नया ट्विस्ट देकर मनोरंजक फिल्म बना ही देता है. भूषण पटेल की ये फिल्म हर मायने में कमज़ोर है. घर पर अलोन रह लीजिए लेकिन अलोन देखने मत जाइए. फिल्म से न सही, आप बोरियत से डर जाएंगे.

 

(Follow Yasser Usman  on Twitter @yasser_aks, You can also send him your feedback at yasseru@abpnews.in)

Bollywood News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: film review: alone
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017