फिल्म रिव्यू: हैप्पी न्यू ईयर

By: | Last Updated: Friday, 24 October 2014 9:17 AM
film review: happy new year

ढाई स्टार

 

हैप्पी न्यू ईयर

 

“किस्मत बड़ी कुत्ती चीज़ हैं, ये किसी भी वक़्त पलट सकती हैं”- फिल्म में शाहरुख ख़ान बार-बार ये डायलॉग बोलते हैं. मगर शायद वो ये समझते नहीं कि दर्शकों को उनसे बेहतर फिल्मों की उम्मीद है. अगर बार-बार नए पैकेट में पुराना माल मिलेगा तो उनकी किस्मत वाक़ई पलट भी सकती है. कहने को तो हैपी न्यू ईयर में वो सारे मसाले हैं जिनका इंतज़ार शाहरुख के फैन्स को होता है. लेकिन फराह ख़ान की पिछली फिल्मों मैं हूं ना और ओम शांति ओम जहां ये मसाले सही तादाद में थे, हैपी न्यू ईयर में उनका रेशियो बिगड़ गया है. पूरे तीन घंटे ये लंबी ये फिल्म अंत तक आते आते काफ़ी उबाऊ हो जाती है.

 

 

चंद्रमोहन शर्मा उर्फ़ चार्ली (शाहरुख ख़ान) के पिता मनोहर (अनुपम खेर) मज़बूत तिजोरी बनाने के माहिर थे. लेकिन चरण ग्रोवर (जैकी श्रॉफ़) उन्हें एक हीरों की चोरी में फंसा कर जेल करवा देता है जहां वो खुदकुशी कर लेते हैं. चार्ली 8 साल तक चरण ग्रोवर से बदला लेने का प्लान बनाता है. इस प्लान के मुताबिक उसे चरण ग्रोवर के तीन सौ करोड़ के हीरे चुराने हैं जो दुबई की एक मज़बूत तिजोरी में रखे हैं. चोरा के लिए चार्ली अपनी एक टीम चुनता है जिसमें तिजोरी खोलने का एक्सपर्ट (बमन ईरानी), कंप्यूटर हैकर (विवान शाह) और एक्स्लोसिव एक्सपर्ट (सोनू सूद) है. फिर इस टीम में नंदू भिड़े (अभिषेक बच्चन) को शामिल किया जाता है क्योंकि वो चरण ग्रोवर के बेटे का हमशक्ल है.

 

हीरों की इस चोरी में इनके लिए जो सबसे बड़ी मुश्किल है वो ये है कि जिस दिन हीरे दुबई में आने वाले हैं उसी दिन वहां वर्ल्ड डांस चैंपियनशिप का फिनाले हैं. चार्ली पूरी टीम के साथ इस डांस चैंपियनशिप में हिस्सा लेने का फैसला करता है. इस चैंपियनशिप के बहाने कोई उन पर चोर होने का शक नहीं करेगा. इस काम के लिए वो बार डांसर मोहिनी (दीपिका पदुकोण) को अपनी डांस टीचर बनाते हैं. ज़ाहिर है फिल्म के अंत में वो ना सिर्फ बड़ी आसानी से हीरे चुराते हैं बल्कि वर्ल्ड डांस चैंपियनशिप भी जीतते हैं.

 

ऐसा नहीं है कि फिल्म के सब्जेक्ट में एंटरटेनमेंट की गुंजाइश नहीं थी लेकिन यहां कहानी बड़ी धीमी रफ़तार से आगे बढ़ती हैं. इंटरवल से पहले फिल्म में हर एक किरदार का एंट्री सीन है और हर एक सीन में कॉमेडी करने की कोशिश की गई है. इनमें कुछ सीन पर हंसी भी आती है. ये पूरी टीम बेवकूफों की टीम लगती है और उनके किरदार ज़ाहिर भी यही करते हैं. लेकिन फिर दूसरे भाग में ये फिल्म ख़ुद को सीरियसली लेने लगती है. कहानी का एक अहम ट्रैक डांस पर आधारित है और फिल्म की डायरेक्टर मशहूर कोरियोग्राफ़र फराह खान है लेकिन इसके बावजूद ये डांस सीक्वेंस बेहद बचकाने और हल्के हैं.

 

चार्ली की टीम चोरी के बड़े प्लान के साथ आई है लेकिन फिल्म में एक मिंनट के लिए भी नहीं लगता कि वो किसी भी लायक हैं. सब कुछ नौटंकीनुमा लगता है. शाहरुख ने वही किया है जो वो अपनी हर एक फिल्म में करते हैं. अभिषेक बच्चन डबल रोल में हैं लेकिन दोनों ही रोल में ओवर एक्टिंग करते नज़र आते हैं. सोनू सूद, बमन ईरानी और विवान शाह ने अपना अपना किरदार ढंग से निभाने की कोशिश की है. गानों के अलावा दीपिका पदुकोण को ज़्यादा कुछ करने को नहीं मिला है. मगर चक दे इंडिया वाले डायलॉग को बोलते हुए वो काफ़ी अच्छी लगी हैं.

 

विलेन बने जैकी श्रॉफ़ के भी ज़्यादा सीन नहीं हैं. यानि तीन घंटे की फिल्म में कोई भी किरदार उभर कर नहीं आ पाता और फिल्म भेलपूरी से ज़्यादा कुछ नहीं बन पाती. फराह ख़ान ने शाहरुख के साथ पहले दो बेहतर फिल्में बनाई थीं और बॉलीवुड के कई फॉर्मूलों पर स्पूफ़ भी किया था. लेकिन यहां कई बार लगता है कि वो ख़ुद कन्फ़्यूज़ थी कि वो चोरी पर आधारित एक सीरियस फिल्म बना रही थी या ऐसी फिल्मों पर स्पूफ़ कर रही थीं. कॉमेडी के नाम पर शाहरुख अपने पुराने डायलॉग का बार-बार मज़ाक उड़ाते हैं, अभिषेक बार-बार उल्टी करते हैं, बमन ईरानी को मिरगी के दौरे पड़ते हैं और सब हंसते हैं, सोनू सूद के बहरेपन का मज़ाक और दीपिका पदुकोण राखी सावंत के अंदाज़ में अंग्रेज़ी बोलने की कॉमेडी.

 

जिन दर्शकों को ये पढ़के हंसी आ रही है ये फिल्म उन्ही के लिए है और शायद ऐसे दर्शकों की कमी नहीं है. फिल्म के अंत में तीन सौ करोड़ के हीरो चुराने वालों की देशभक्ति भी जागती है और शाहरुख तिरंगे की शान पर एक भाषण भी देते हैं. लेकिन तब तक दर्शक सोच रहे होते हैं कि आख़िर कब ख़त्म होगी ये फिल्म? लंबाई इतनी ज़्यादा है कि फिल्म के कुछ एक अच्छे सीन भी याद नहीं रहते. लेकिन ये डायलॉग याद रहता है कि क़िस्मत बड़ी कुत्ती चीज़ है. शाहरुख को भी ये डायलॉग याद रखना चाहिए. क़िस्मत कभी भी पलट सकती है.

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