संजय दत्त: कैदी नंबर 16656 की जेल की पूरी कहानी

By: | Last Updated: Wednesday, 24 February 2016 11:01 PM
Full story of sanjay dutt in jail

नई दिल्ली: कैदी नंबर 16656, पुणे के यरवदा जेल में बंद संजय दत्त एक नई भूमिका में हैं..अपनी फिल्म लगे रहे मुन्ना भाई में संजय दत्त ने रेडियो जॉकी के रुप में माइक संभाला था.और काफी तारीफें बटोरी थी..और अब वही काम संजय दत्त जेल की सलाखों के अंदर भी कर रहे हैं.एक मंझे हुए रेडियो जॉकी की तरह वो यरवदा जेल में कैदियों का मनोरंजन कर रहे हैं.

यरवदा जेल के अंदर मुन्नाभाई का ये कौशल.हर कैदी को बेहद भा रहा है.वो कैदी से रेडियो जॉकी बने मुन्ना भाई से उनके फेमस डॉयलॉग को सुनाने की अपील करते हैं..और फिर मुन्ना भाई यानी कि संजय दत्त उन्हें निराश भी नहीं करते हैं.

यरवदा जेल में कैद..संजय दत्त की जिंदगी कुछ यूं ही कट रही है..जेल की चारदीवारी में वो रेडियो जॉकी के तौर पर कैदियों का खूब मनोरंजन कर रहे हैं.तीन और कैदियों के साथ संजय दत्त यहां आरजे का काम करते हैं, साथ ही जेल में पेपर बैग भी बनाते हैं.लेकिन अब पच्चीस फरवरी को संजय दत्त को जेल की इस जिंदगी से रिहाई मिल जाएगी.और फिर वो इन कामों से भी आजाद हो जाएंगे.

जेल की सलाखों में कैद फिल्म अभिनेता संजय दत्त की जिंदगी खुद किसी फिल्म से कम नहीं है.12 मार्च 1993 के मंबई बम धमाकों में जब उनका नाम सामने आया था तो दुनिया सन्न रह गई थी..संजय दत्त आरोपों के घेरे में थे.लेकिन वो दोषी ठहराए गए अवैध हथियार रखने के केस में.मार्च 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त को पांच साल की सजा सुनाई और तब से ही वो पुणे की यरवदा जेल में बंद है.

आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी फिल्म स्टार संजय दत्त ने पुणे की यरवदा जेल में एक आम कैदियों जैसी जिंदगी ही गुजारी है. सुप्रीम कोर्ट ने संजय दत्त को पांच साल की सजा सुनाई थी. लेकिन अच्छे चाल-चलन की वजह से जेल प्रशासन की अनुशंसा से संजय दत्त को एक सौ पांच दिन पहले ही रिहाई मिल रही है.

sanjay dutt 9पुणे की यरवदा जेल में कैद संजय दत्त पच्चीस फरवरी को जेल से रिहा होंगे..और तब उनके पास एक ऐसी जिंदगी होगी जहां सिर्फ और सिर्फ सुकून के पल होंगे..संजय दत्त बेताबी से उस दिन का.उस पल का इंतजार कर रहे हैं..लेकिन एक अभिनेता से जेल के कैदी बनने तक के सफर की इस कहानी को संजय दत्त कभी भूल नहीं पाएंगे

संजय दत्त..अपने जमाने के मशहूर फिल्म स्टार सुनील दत्त और नरगिस दत्त के बेटे संजय दत्त..वो संजय दत्त जो घर में नाजों से पले थे.वो संजय दत्त जो अपनी पहली फिल्म से ही लोगों के दिलों पर राज करने लगे थे. 90 के दशक में जब संजय दत्त का सितारा बुलंद था..तभी एक के बाद एक तेरह धमाकों से दहल गई मुंबई..और फिर सामने आई धमाकों के साजिश की वो कहानी जिसने फिल्मों के इस हीरो को बना दिया जिंदगी का विलेन.

12 मार्च 1993..एक के बाद एक तेरह धमाकों ने मुंबई को दहला दिया था..257 लोग बेमौत मारे गए. मुंबई रो रही थी. सिसक रही थी. और जब इन धमाकों के आरोप में संजय दत्त को टाडा के तहत गिरफ्तार किया गया. तो पूरी दुनिया सन्न रह गई. संजय दत्त पर आरोप था कि वो इस बमकांड की साजिशों में शामिल हैं. धमाकों को अंजाम देने के लिए गोला-बारुद की जिस खेप को मुंबई में उतारा गया था. उसी खेप में से संजय दत्त को भी हथियार मिले थे..और इस तरह रील लाइफ का हीरो देखते ही देखते रियल लाइफ का विलेन बन गया. वो खलनायक जिसकी कहानी हर किसी की जुंबा पर थी.

मुंबई बम धमाकों के आरोप में संजय दत्त को 19 अप्रैल 1993 को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वो एक फिल्म की शूटिंग से मॉरीशस से लौटे थे..गिरफ्तारी एयरपोर्ट पर हुई. और फिर संजय दत्त को जेल भेज दिया गया. संजय दत्त एक बेहद ही संगीन आरोप मे पहली बार जेल गए थे..लेकिन अठारह दिनों बाद ही उन्हें जमानत मिल गई. संजय दत्त को जेल की सलाखों से बाहर देखकर उनके फैंस बेहद खुश थे..लेकिन ये खुशी ज्यादा दिनों की नहीं थी..4 जुलाई 1994 को जमानत रद्द होने की वजह से संजय दत्त को दूसरी बार जेल जाना पडा.और इस बार जेल की ये जिंदगी काफी लंबी थी..

19 अप्रैल 1995 को मुंबई की टाडा अदालत में जब इस मामले की सुनवाई शुरु हुई. तो संजय दत्त बेहद परेशान थे..उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात से थी कि उन्हें देशद्रोही और आतंकवादी समझा जा रहा था और इस दर्द को संजय दत्त ने टाडा कोर्ट के जज पी.डी कोदे से भी साझा किया था.

sanjay dutt 3एक तरफ टाडा कोर्ट में सीरियल बम बलास्ट केस की सुनवाई हो रही थी..तो दूसरी तरफ संजय दत्त जेल की सलाखों से निकलने के लिए छटपटा रहे थे. जेल के अंदर उनकी जिंदगी एक आम कैदियों की तरह थी. एक आम कैदी की तरह ही उन्हें खाना दिया जाता था. एक आम कैदी की तरह ही उन्हें जेल में काम करना पडता था..और इन सब के बीच जारी थी खुद को आतंकवादी होने के कलंक से मुक्त करने की संजय दत्त की कानूनी लड़ाई..दूसरी बार जेल जाने के बाद वो एक आम कैदी की तरह पूरे बारह महीने और अठारह दिन तक सलाखों के पीछे रहे. लेकिन इसके बाद ही उन्हें जमानत मिल गई. और वो जेल से रिहा हो गए..

दूसरी बार जमानत पर जेल से रिहा होने के बाद संजय दत्त ने राहत की सांस ली. लेकिन मुंबई बम धमाकों में शामिल होने के जो आरोप उनके उपर लगे थे. उसकी कहानी खत्म नहीं हुई थी. दो साल बाद जमानत रद्द होने के बाद संजय दत्त को तीसरी बार जेल जाना पडा..लेकिन 22 दिनों तक जेल में रहने के बाद उन्हें फिर से जमानत मिल गई. वो रिहा हुए. लेकिन जल्द ही उन्हें फिर से जेल जाना पडा. चौथी बार वो एक महीना आठ दिन तक जेल में रहे.और फिर जमानत पर रिहा होकर जेल से बाहर आ गए..

मुंबई बम धमाकों के बाद संजय दत्त दो साल के अंदर चार बार जेल गए. और इस तरह उन्होंने जेल के अंदर एक आम कैदी की जिंदगी जीते हुए करीब अठारह महीने बिता दिए. चौथी बार जब संजय दत्त जमानत पर छूटकर जेल की सलाखों से बाहर निकले. तो एक बार फिर उनकी जिंदगी पुराने ढर्रे पर लौट गई..वो फिल्मों की शूटिंग में बीजि हो गए. जबकि मामला टाडा कोर्ट में चलता रहा. 12 साल बाद 18 मई 2007 को जब इस मामले की सुनवाई खत्म हुई तो संजय दत्त अपने उपर लगे..सबसे बड़े कलंक टाडा के आरोपों से मुक्त हो गए..लेकिन अवैध हथियार रखने की वजह से उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत 6 साल की सजा सुनाई..तब संजय दत्त को सजा सुनाने वाले जज पी.डी.कोदे ने अपने फैसले में कहा था. बमकांड की साजिशों में संजज दत्त के शामिल होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं. और इसलिए दत्त को आतंकवादी नहीं कहा जा सकता है.

टाडा के आरोपों से छूट जाना संजय दत्त के लिये राहतवाली बात तो थी, लेकिन आर्मस एक्ट में 6 साल की सजा. उनके लिये ये बहुत बडा झटका था. इतने वक्त तक उन्हें ना सिर्फ अपने परिवार से दूर रहना पडता. बल्कि वो फिल्मों में भी काम नहीं कर पाते.. संजय दत्त को फैसला आने से पहले चंद लोगों ने झूठी उम्मीद दी थी कि वे सभी आरोपों से बरी हो जायेंगे, लेकिन उनकी वकील फरहाना शाह ने उन्हें बता दिया था कि उनका सजा से बचना मुश्किल है.

31 जुलाई 2007 की दोपहर टाडा अदालत ने संजय दत्त को आर्मस एक्ट में दोषी करार दिया और 6 साल की सजा सुनाई जिसके बाद उन्हें आर्थर रोड जेल की बैरक में शिफ्ट कर दिया गया. जिन संजय दत्त को अपनी रिहाई की उम्मीद थी उसके लिये अचानक जेल की जिंदगी को अपनाना आसान न था. जेल में अब उन्हें कैसी जिंदगी काटनी है इसका अनुभव सजा सुनाये जाने के चंद मिनटों बाद ही संजय दत्त को हो गया.

एक गुनहगार के तौर पर जब संजय दत्त जेल में पहुंचे तो जेल के कर्मचारियों ने उन्हें जेल की यूनिफार्म पहनने को कहा. लाखों के फैशनबल इंपोर्टेड कपडे पहने वाले संजय दत्त इसी बात पर भडक गए और उन्होंने सौ रुपए की कीमत वाला जेल यूनिफॉर्म पहनने से साफ मना कर दिया..

sanjay dutt 2तब संजय दत्त ने कहा था, ‘ये कैदियोंवाला ड्रेस..मैं नहीं पहनूंगा इसे.जाओ अपने साहब को जाकर कह दो..उन्हें जो करना है कर ले..मैं नहीं पहनने वाला इसे.’

संजय दत्त के गुस्से और उनकी हैसियत को देखते हुए जेल कर्मचारी ब

 

डी अदब से उनके साथ पेश आ रहे थे. वो संजय दत्त से जेल की यूनिफार्म पहनने की गुजारिश कर रहे थे..लेकिन संजय इसके लिए कतई राजी नहीं थे. मैंने कहा ना. मैं ये नहीं पहनूंगा..चाहे जो हो जाए. मैं इसे नहीं पहनूगा तो नहीं पहनूंगा..

संजय दत्त जेल की यूनिफॉर्म को नहीं पहनने की जिद पर अड़े थे. और जब वो किसी भी तरह नहीं माने तो आखिरकार आर्थर रोड जेल की तत्कालीन सुपिरिंटेंडेंट स्वाती साठे को पूरे मामले की इत्तिला दी गई.

संजय दत्त के जिद की कहानी को सुनकर जेल सुपरिटेंडेंट स्वाती साठे उनके पास पहुंची और फिर उन्होंने कड़कती आवाज में संजय दत्त से कहा,
‘देखो संजय आप जेल की यूनिफॉर्म को पहनने से आनाकानी मत करो.आप खुद ही तय कर लो कि आप हमारी बातों को मानकर जेल की यूनिफॉर्म पहनोगे या फिर हमें फोर्स का इस्तेमाल करना पड़ेगा…क्योकि आपको ये यूनिफॉर्म पहननी तो दोनों ही हालात में पड़ेगी’

संजय दत्त ने जेल सुपरिटेंडेंट स्वाति साठे का कड़ा रुख देखा.तो उनकी जिद हवा हो गई..उन्होंने तुंरत ही जेल की यूनिफार्म पहन ली..और खुद को जेल के कायदे कानून के मुताबिक ढाल लिया.

आर्थर रोड जेल की वो बैरक जहां संजय दत्त को सजा सुनाये जाने के बाद रखा गया था. संजय दत्त इस जेल में 2 बार आये थे. पहली बार 1993 में जब वे गिरफ्तार हुए तो 18 महीने तक इसी जेल में रहे. इसके बाद जब टाडा अदालत ने उन्हें दोषी ठहरा दिया तब भी कुछ वक्त उन्हें यहां गुजारना पडा. चूंकि इस जेल में सिर्फ अंडरट्रायल कैदी ही रखे जाते हैं इसलिये जल्द ही उन्हें पुणे की यरवदा जेल में भेज दिया गया जहां सजायाफ्ता कैदियों को रखा जाता है.

एक गुनहगार के तौर पर जेल की जिंदगी शुरू करते वक्त संजय दत्त को काफी तकलीफ हुई. लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजरा उन्होंने खुद को जेल की आवो-हवा के मुताबिक ढाल लिया और फिर एक आम कैदी की तरह सलाखों के बीच गुजरने लगी उनकी जिंदगी.

जेल में संजय दत्त अक्सर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में साथी कैदियों के साथ हिस्सा लेते थे. ऐसे क्रायक्रमों में जैसा इस वक्त चल रहा है.

sanjay dutt 5आर्थर रोड जेल से संजय दत्त को उनकी सजा का बाकी वक्त काटने के लिये पुणे की ऐतिहासिक यरवदा जेल में लाया गया. ये वही जेल है जहां महात्मा गांधी से लेकर विनायक सावरकार तक अंग्रजी हूकूमत के खिलाफ आवाज उठाने के लिये कैद में रखे गये थे. यहीं पर संजय दत्त को भी अपने गुनाहों का हिसाब चुकाना था. जेल में संजय दत्त के दोस्त यूसुफ नलवाला भी उनके साथी कैदी थे. नलवाला पर संजय दत्त को मिली एके-47 राईफल नष्ट करने का आरोप था. जेल में दोनों को बांस की टोकरियां बनाने का काम दिया गया.

संजय दत्त ने खुद को दोषी ठहराये जाने और 6 साल की सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. उनकी अपील पर सुनवाई होने तक के लिये अदालत ने उन्हें और युसुफ नलवाला को जमानत दे दी. 27 नवंबर 2007 को वे जेल से रिहा हुए. लेकिन यरवदा जेल से बाहर निकलते वक्त उन्होने कुछ ऐसा किया जिससे कि विवाद खडा हो गया. उन्हें विदा करने के लिये जेल के गार्ड दरवाजे के बाहर इस तरह से खडे हो गये जैसे कि मंत्री को गार्ड औफ ऑनर दिया जाता है..संजय दत्त एक एक करके सभी गार्ड से गले मिले और उनसे हाथ मिलाया.

जेल कर्मचारियों की ओर से एक सजायाफता कैदी के साथ दिखाई गई इतनी आत्मीयता ने सवाल खडे कर दिये कि क्या जेल में ये लोग संजय दत्त को विशेष सुख सुविधाएं देते थे. मामले ने तूल पकड़ा तो महाराष्ट्र सरकार ने संजय दत्त को विदा करने आये सभी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया. जेल कर्माचारियों के साथ ही कांग्रेस के नेता बाबा सिद्धिकी भी विवादों में फंसे. सिद्धिकी उस वक्त महाराष्ट्र सरकार में एफडीए मंत्री थे. संजय दत्त को रिसीव करने आये सिद्धिकी ने उनके लिये खुद कार का दरवाजा खोला था. सवाल उठाया गया कि महाराष्ट्र सरकार का एक मंत्री इस तरह से सरेआम एक गुनहगार की जी हुजूरी क्यों कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद संजय दत्त करीब साढे 5 साल तक जेल से बाहर रहे. इस दौरान उनकी निजी और बाहरी जिंदगी में बहुत कुछ हुआ.

जमानत पर रिहाई के बाद संजय दत्त की दोस्ती एक अभिनेत्री और पूर्व पत्रकार दिलनशीन शेख उर्फ मान्यता से हुई. मान्यता एक तलाकशुदा महिला थी जिसका पति मेहराज रेहमान नाम का एक हैद्राबादी शख्स था. मेहराज को पुलिस ने अभिनेत्रियों और मॉडलों को धमकी भरे एसएमएस भेजने और फोन कर तंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था. 2008 में यानी कि जमानत पर जेल से बाहर आने के अगले साल संजय दत्त ने मान्यता से गोवा में शादी कर ली.

sanjay dutt 62009 में समाजवादी पार्टी ने संजय दत्त को लोकसभा चुनाव लडने का ऑफर दिया, लेकिन अदालत ने उनकी सजा को मुल्तवी करने से मना कर दिया जिसकी वजह से उन्होने चुनाव लडने का इरादा छोड दिया. संजय दत्त दिसंबर 2010 तक समाजवादी पार्टी के महासचिव बने रहे. इस बीच अक्टूबर 2010 में वो जुडवा बच्चों के पिता भी बने. संजय दत्त को एक लडका और एक लडकी हुई. लडके का नाम शहरान और लडकी का नाम इकरा रखा गया.

जमानत पर मिले वक्त का संजय दत्त ने भरपूर इस्तेमाल किया, लेकिन उन्हें साथ साथ ये चिंता भी सता रही थी कि सुप्रीम कोर्ट उनकी अपील पर क्या फैसला सुनाता है. आखिर 21 मार्च 2013 की वो तारीख आ ही गई जब सुप्रीम कोर्ट ने उनके ऊपर लगाये गये आरोपों को सही करार दिया. राहत की बात ये रही कि सुप्रीम कोर्ट ने टाडा अदालत की ओर से सुनाई गई 6 साल की सजा को कम करके 5 साल कर दिया.

संजय दत्त को फिर एक बार जेल जाना था. समाजसेवा के अलग अलग तबके से जुडे लोगों ने उनकी सजा माफी के लिये मुहीम चलाई जिसमें एक प्रमुख आवाज सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्केंडेय काटजू की भी थी. लेकिन संजय दत्त को सजा में माफी नहीं मिली. वे फिर एक बार पुणे की यरवदा जेल पहुंच गये.

साढे 5 साल बाहर गुजारने के बाद संजय दत्त फिर एक बार यरवदा जेल तो पहुंचे, लेकिन इस बार जेल की जिंदगी अपनाने में उन्हें दिक्कत नहीं आई. पिछली बार की तरह जेल में टोकरियां बनाने के अलावा इस बार दत्त ने बहुत कुछ किया.

यरवदा जेल में संजय दत्त ने पेपर बैग बनाने के साथ ही एक नया काम भी शुरु किया..संजय दत्त ने यरवदा जेल प्रशासन के साथ मिलकर जेल के भीतर एक रेडियो सेवा शुरू की. संजय दत्त इस सेवा के लिये न केवल जॉकी का काम करते थे, बल्कि रेडियो के लिये बनाये गये कार्यक्रमों की स्क्रिप्ट भी लिखते थे.

अपने श्रोताओं को ‘नमस्कार भाई लोग. अपुण संजय दत्त आपकी फरमाइश कार्यक्रम लेकर आज फिर हाजिर होयला है..अपुण आज फिर सुनाएगा आपलोग को अपुण का फेवरेट सांग. लेकिन उससे पहले. भाई लोग.आपलोग की फरमाइश पर ये डॉयलॉग.

असली है, असली! पचास तोला, पचास तोला. कितना? पचास तोला”!

sanjay dutt 10एक आरजे की तौर पर संजय दत्त खूब जमे, कैदियों ने उनके काम को सराहा तो जेल प्रशासन ने रेडियो के जरिए संजय दत्त से कैदियों की काउंसेलिंग भी करवाई.

यरवदा जेल प्रशासन के मुताबिक जेल में संजय दत्त यानी कि कैदी नंबर 16656 का दिन आम कैदियों की तरह ही बीता और उन्हें कोई भी विशेष सुविधा नहीं दी गई. यरवदा जेल में 3900 कैदी हैं और 10 बाई 10 फुट के 185 हाई सिक्यूरिटी सेल हैं, जिनमें से एक संजय दत्त को दिया गया है. बताया जाता है कि जेल में वो काफी धार्मिक हो गये हैं.

रोज भगवदगीता पढते हैं और गणपति और हनुमानजी की तस्वीरें साथ रखते हैं. जेल का स्टाफ और बाकी कैदी दत्त को बाबा कहकर पुकारते हैं. जेल में रहते हुए संजय दत्त ने जो कमाई की उसमें से उन्होंने 440 रुपये की बचत भी की है और रिहा होने के बाद वो 440 रुपए लेकर वो अपने घर जाएंगे.

अपने अच्छे बर्ताव और कैदियों को मिलने वाली सरकारी छुट्टियों की वजह से संजय दत्त करीब साढे चार महीने पहले ही जेल से अपनी सजा पूरी करके बाहर आ रहे हैं. कहा जाता है कि जेल में जाने के बाद अपराधी या तो और भी ज्यादा बिगड जाता है या सुधर जाता है. ऐसे में संजय दत्त पर जेल में बिताये वक्त ने क्या असर डाला है ये जानना दिलचस्प होगा.

 

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