समीक्षकों की नजर में: हेट स्टोरी 3

By: | Last Updated: Sunday, 6 December 2015 5:55 AM
Hate Story 3 review

नई दिल्ली: इस हफ्ते बॉक्स ऑफिस पर ‘हेट स्टोरी 3’ रिलीज हुई है. यह फिल्म रिलीज के पहले से ही अपने बोल्डनसे औऱ हॉट सीन की वजह से सुर्खियों में बनी हुई है. इस फिल्म को में एक तरह से यह जूनून, नफरत और बदले की कहानी है.

 

विशाल पंड्या की इस फिल्म में शरमन जोशी, जरीन खान, करन सिंह ग्रोवर और डेजी शाह मुख्य भूमिका में है. यहां आपको बता रहे हैं कि समीक्षकों ने इस फिल्म को क्या रेटिंग दी है और उसकी समीक्षा कैसी लिखी है.

 

 

”दैनिक जागरण” में अजय ब्रहमात्ज लिखते हैं

यह फिल्म पिछली फिल्मों  से इस मायने में अलग है कि यहां पुरुषों के बीच ‘हेट’ और बदला है. समानता यह है कि पिछली फिल्मों की तरह ही इसमें भी अभिनेत्रियों के अंग प्रदर्शन और उत्तेलजक सीन हैं. हिंदी फिल्मों में कामुक स्पिर्श की भी अघोषित मर्यादाएं हैं. ‘हेट स्टोरी 3’ में उन मर्यादाओं को तोड़ा गया है. सेंसर बोर्ड गाली और अश्लील शब्दों पर आपत्ति करता है, लेकिन अश्लींल दृश्यों से उसे कोई दिक्कत नहीं है.

 

‘हेट स्टोरी 3’ में प्रेम और काम की मुद्राओं में भरपूर अश्ली्लता है. फिल्मो की दोनों अभिनेत्रियों को समान अवसर दिए गए हैं. कहीं न कहीं उनमें होड़ है कि कौन ज्यादा उत्तेजक और हॉट सीन देकर दर्शकों को बांधता है. इस कोशिश में फिल्म  फूहड़ भी हुई है. ‘हेट स्टोरी 3’ दर्शकों के मनोरंजन से अधिक उनकी यौन क्षुधा शांत करती है.

 

कभी ऐसी फिल्मों को सी ग्रेड फिल्में  कहा जाता था. अब बड़े और प्रतिष्ठित नाम भी ऐसी फिल्मों  से जुड़ने लगे हैं और उनकी चर्चा होने लगी है. निश्चित ही ऐसी फिल्मों के दर्शक हैं, लेकिन हमें विचार करना होगा कि हम ऐसी फिल्मों को कितना महत्वे दें. उन पर क्यों और कितना विमर्श करें.

 

”हिंदुस्तान” में विशाल ठाकुर लिखते हैं:

कुछ फिल्मों के पोस्टर ही फिल्म की काफी कुछ बातें बयां कर देते हैं। ‘हेट स्टोरी 3’ के बारे में ये बात बिल्कुल सटीक बैठती है और जब ऐसी किसी फिल्म की श्रृंखला से कोई भली-भांति परिचित हों तो फिल्म देखने या न देखने का फैसला आसानी से कर सकता है.

 

कुछ माह पहले रिलीज हुए फिल्म के पहले ही ट्रेलर से साफ हो गया था कि निर्देशक विशाल पांड्या परदे पर क्या धमाल मचाने वाले हैं. अपनी पिछली फिल्म के मुकाबले उन्होंने फिल्म के ट्रेलर को न केवल ज्यादा उत्तेजक अंदाज में पेश किया था, बल्कि पहले से ज्यादा तेज घुमाव और हिचकोलों की तरफ इशारा किया था. बेशक, उन्होंने ऐसा किया भी है पर क्या एक सस्पेंस फिल्म में हॉट सीन्स के दृश्यों के तड़के के बीच सही तालमेल वो बैठा पाए हैं?

 

कहीं फिल्म को ज्यादा उत्तेजक बनाने के चक्कर में उन्होंने फूहड़ता तो नहीं परोस डाली है? या फिर दर्शकों को सीट से चिपकाए रहने के लिए उन्होंने कहानी को ज्यादा हिचकोले तो नहीं दे डालें हैं.

 

”जनसत्ता” में दिव्यहचक्षु लिखते हैं:

ये उस वर्ग को लुभानेवाली फिल्म है जो सेक्स, यौन संबंध और प्रतिशोध को देखने सिनेमा हॉल में जाता है. इसे इरोटिक थ्रिलर भी कह सकते हैं. फिल्म नाजायज रिश्तों की परिधि में जाती है और देर तक वहां रहती है. इसलिए इसमें कामुकता की गंध भी है.

 

इसके तीन चार गाने अच्छे हैं. `तुम्हें अपना बनाने का जनून’, `तू इश्क मेरा’, `नींदे खुल जाती हैं’ और `वजह तुम हो’, जैसे गाने कहानी की रफ्तार धीमी तो करते हैं फिर भी दर्शक को बांधने में सक्षम हैं.

 

जहां तक एक्टिंग का सवाल है, सिर्फ शरमन जोशी ही जमे हैं. जरीन खान को अभी भी अपने जज्बात जाहिर करने पर काफी मेहनत करनी होगी. करण सिंह ग्रोवर भी अभिनय के मामले में लचर हैं.

 

यहां देखें फिल्म का ट्रेलर