मूवी रिव्यू: जज़्बा

By: | Last Updated: Friday, 9 October 2015 8:58 AM

वीडियो रिव्यू: कैसी है ऐश्वर्या-इरफान की ‘जज़्बा’? रेटिंग: ढाई स्टार

 

नई दिल्ली: ऐश्वर्या राय बच्चन की कमबैक जज़्बा एक सस्पेंस थ्रिलर है जो कोरियन फिल्म 7 Days की रीमेक है. ये स्टोरी आयडिया एक ज़बरदस्त थ्रिलर बनाने के लिए काफ़ी अच्छा था. मगर निर्देशक संजय गुप्ता ने मेलोड्रामा इतना ज़्यादा कर दिया है कि कहानी कई बार अपने ट्रैक से भटकती हुई नज़र आती है. मुख्य किरदार में ऐश्वर्या बार-बार अपनी बेटी के ग़म में रोती-चीख़ती, भागती ही रहती हैं जबकि अपने कमज़ोर सपोर्टिंग रोल में सारी पंचलाइन्स के साथ इरफ़ान बाज़ी मार जाते हैं. अंत तक आते आते ये थ्रिलर एक बेहद मामूली बदले की कहानी में बदल जाती है. फिर फिल्म को गहराई देने के लिए निर्देशक रेप जैसे गंभीर मुद्दे का इस्तेमाल करते हैं जो क़तई असर नहीं छोड़ता.

 

अनुराधा वर्मा (ऐश्वर्या राय) मुंबई की सबसे मशहूर वकील है जो कोई केस नहीं हारती. उसकी पांच साल की बेटी सनाया किडनैप हो जाती है. किडनैपर की मांग है कि अनुराधा एक लड़की सिया के बलात्कार और क़त्ल की सज़ा काट रहे मुजरिम नियाज़ी (चंदन रॉय सान्याल) का केस लड़े और उसे बरी करवाए. ऐसा करने के लिए उसे 4 दिन दिए जाते हैं. इस काम में उसकी मदद करता है इंस्पेक्टर योहान (इरफ़ान) जो करप्शन के आरोप में पुलिस डिपार्टमेंट से सस्पेंड है. सिया की मां (शबाना आज़मी) नहीं चाहती कि अनुराधा ये केस लड़े. इन चार दिन में क्या होता है ये फिल्म यही दिखाती है.

 

फिल्म की रफ़्तार काफ़ी अच्छी है लेकिन निर्देशक ने ऐश्वर्या और इरफ़ान के किरदारों को बेहद सतही रखा है. ऐश्वर्या ने काफ़ी मेहनत की है. उन्हें सबसे ज़्यादा स्क्रीन टाइम मिला है, वो खूबसूरत लगी हैं, अपने सीरियस सीन में उन्होंने अभिनय भी अच्छा किया है. लेकिन इस सबके बावजूद फिल्म में उनका किरदार ज़्यादा असर नहीं छोड़ पाता. ये कमी स्क्रिप्ट की है जो बिलकुल सपाट है. कई सीन देखकर लगता ही नहीं कि अनुराधा के पास अपनी बेटी के बचाने का बेहद कम समय है. यही हाल इरफ़ान का भी है. उन्हें बॉलीवुड का मसाला हीरो बनाने की कोशिश की गई है. वो बस आते हैं और अपने वनलाइनर्स बोल कर निकल जाते हैं. दोनों के किरदारों बेहद-वनडाइमेंशनल हैं. परेशान रहने वाली वकील और ठंडे दिमाग़ वाले पुलिस अफ़सर के आपस के सीन जितने कमाल के होने चाहिए थे, वैसे नहीं बन पाए हैं.

 

फिल्म में शाबाना आज़मी भी एक ख़ास रोल में हैं लेकिन निर्देशक उनका भी सही इस्तेमाल नहीं कर पाए. फिल्म में चंदन रॉय सान्याल और जैकी श्रॉफ भी हैं और वो अपना किरदार ठीक-ठाक निभा गए हैं.

 

जज़्बा ज़रूरत से ज़्यादा मेलोड्रामा और स्टाईलाइज़ेशन की शिकार है. इसमें ऐश्वर्या, इरफ़ान और शबाना आज़मी जैसे बढ़िया एक्टर्स हैं, अच्छा स्टोरी आयडिया है मगर इसके बावजूद संजय गुप्ता एक बेहद मामूली थ्रिलर बना पाए हैं. ऐश्वर्या इससे बेहतर कमबैक डिज़र्व करती थीं.

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Web Title: Jazbba Movie Review
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