व्यक्ति विशेष: कंगना रनौट कैसे बनीं बॉलीवुड की ‘क्वीन’

By: | Last Updated: Saturday, 30 May 2015 5:49 PM
Kangana Ranaut

नई दिल्ली: कंगना रनौट बॉलीवुड की मुश्किल भरी दुनिया में इस वक़्त कामयाबी की धुन पर थिरक रही हैं. बॉलीवुड पर उनका ये राज अपने दम पर है. अब बॉलीवुड की बैड गर्ल से बॉलीवुड की क्वीन बन चुकी हैं कंगना.

 

कंगना की कामयाबी की दलील है 28 की उम्र में 27 फिल्में और 24 अवॉर्ड. यह है बॉलीवुड की क्वीन, कंगना की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट. सिर्फ 9 साल के करियर में कंगना रनौट दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकी हैं. इससे भी बड़ी बात यह है कि कंगना ने लीक से अलग हटते हुए ऐसी फिल्में की जो सफलता के लिए किसी हीरो की मोहताज नहीं थीं. इन फिल्मों ने सिर्फ कंगना की एक्टिंग के दम पर कामयाबी हासिल की.

 

क्यों अलग है कंगना?

 

घुंघराले बाल, अनोखी आवाज और अलग अंदाज. कभी सिमरन, (गैंगस्टर) कभी शोनाली, (फैशन)….कभी तनु (तनु वेड्स मनु) कभी काया (कृष). रिवॉल्वर रानी की अल्का से क्वीन की रानी तक उसने अपने ढेरों रंग दिखाये. और अब वो बन गई है हरियाणा की दत्तो.

 

तनु वेड्स मनु रिटर्न में कंगना कहती हैं,  “म्हारा नाम है कुमारी कुसुम सांगवान. यो म्हारी सहेली पिंकी. हम रामजस कॉलेज दिल्ली यूनिवर्सिटी मैं पढ़ों सु. स्पोर्ट्स कोटे ते एडमिशन लिया. नेसनल लेवल की एथलिट सु. जिला झज्जर 124507. और फोन नंबर मैं दोउ को न. “

 

दत्तो के किरदार में कंगना का ये ठेठ अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है. तनु वेड्स मनु रिटर्न्स में कंगना ने डबल रोल किया है. रिलीज के 10वें दिन यह फिल्म भारत में 100 करोड़ का कारोबार करने वाली इस साल की पहली फिल्म बन चुकी है. बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाते हुए यह इस साल की पहली ब्लॉकबस्टर है. फिल्म की इस जबरदस्त कामयाबी की वजह है कंगना का शानदार अभिनय.

 

कामयाबी का राज?

 

मौका मिलते ही कंगना अपनी तारीफ से भी नहीं चुकतीं. एक छोटे शहर से बॉलीवुड तक का सफर तय करने वाली कंगना खुद पर भरोसे को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं.

 

एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा, “मुझमें कॉन्फीडेंस इशू कभी नहीं था. मेरी लाइफ पर फिल्म बने तो उसका थीम होगा प्राइड, ओवर कॉन्फीडेंस. “

 

जीवन का सफर

 

कंगना का जन्म 23 मार्च 1987 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के पास भांबला में हुआ. उनके पिता अमरदीप एक बिजनेसमैन और मां आशा रनौट स्कूल में टीचर थीं. इनके अलावा परिवार में कंगना की बड़ी बहन रंगोली और एक छोटा भाई है. एक मिडिल क्लास फैमिली में होते हुए भी कंगना बचपन से ही बड़े ख़्वाब देखती थीं.

 

कंगना के पिता अमरदीप रनौट कहते हैं, ” मनाली में गांव वाले माहौल में बीता है उसका बचपन. बचपन में वो बोला करती थी मैं मिस इंडिया बनूंगी, हम लोग उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे. “

 

बॉलीवुड में कंगना को स्टाइल क्वीन के नाम से भी जाना जाता है. कंगना के ड्रेसिंग सेंस की तारीफ की जाती है. लेकिन यह शौक कंगना को बचपन से ही था.

 

कंगना रनौट ने एक बार एबीपी न्यूज़ से कहा था, ” बचपन से ही मैं कुछ भी पहन लेती थी जिससे मेरे पापा मुझे देखेंगे और बुलाएंगे तुमने क्या पहना है यह चेंज करो. फिर मुझे शाम को लेक्चर मिलेगा अपनी बहन को देखो, मम्मी को देखो.”

 

मंडी से मुंबई तक का सफर

 

मंडी से मुंबई तक के सफर में कंगना के जीवन में कई छोटे-छोटे पड़ाव आये. इनमें से पहला था चंडीगढ़ का डीएवी स्कूल. यहीं पर कंगना ने 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की.

 

डीएवी स्कूल में कंगना मेडिकल पढ़ने आयी थीं पर किताबों से अलग उसकी दिलचस्पी रैंप में थी किसने सोचा था कि कभी डॉक्टर बनने वाली कंगना बॉलीवुड की क्वीन बन जाएगी.

 

डीएवी स्कूल के प्रिंसिपल डॉक्टर राकेश सचदेवा कहते हैं कि मॉडलिंग की तरफ झुकाव जितना था उतना मेडिकल की तरफ नहीं था.

डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल डॉक्टर राकेश सचदेवा को आज भी याद है कि कंगना उस वक्त से ही मॉडलिंग में दिलचस्पी रखती थी. स्कूल में फ्रेशर्स नाइट हो या फेयरवेल– कंगना के बिना यह फंक्शन्स हो ही नहीं सकते थे.

 

 

 

डॉक्टर राकेश सचदेवा कहते हैं, पैशन था कि कुछ करना है, हॉस्टल नाइट में कुछ न कुछ मिलता था. टाइटिल जरूर मिलता था. बच्चों से कहती थी मैं एक दिन टीवी पर आकर दिखाउंगी.

 

कंगना की आंखों में आसमान छूने का ख्वाब था. एक छोटे शहर से निकलकर चंडीगढ़ में हॉस्टल की आजादी मिली तो इस ख्वाब को पर लग गये. स्कूल में कंगना के हॉस्टल की वॉर्डन रह चुकी शशि कला बताती हैं कि कंगना ने एक्टिंग की शुरूआत हॉस्टल के कमरे में ही कर दी थी.

 

शशि कला कहती हैं, ” कंगना के पड़ोस में एक लड़का था, शराबी था कंगना रात में सारी लड़कियों को इकट्ठा कर उसकी एक्टिंग करती थी बहुत अच्छी…. “

 

हॉस्टल के कमरे में कंगना अपने दोस्तों को इकट्ठा कर शराबी की एक्टिंग करती थी. गैंगस्टर में भी शराबी का किरदार निभाया. कंगना को शराबी बनना बेहद पसंद था यही वजह है कि कंगना का कहना है, ” मेरी लाइफ में टर्निंग प्वाइंट आया जब मैं चंडीगढ़ में हॉस्टल गई तब मेरा दिमाग खुला कि पैरेंट्स बहुत प्रेशर डालते हैं उसी वजह से मेरे दिमाग में आया कि आई डोंट वांट टू स्टडी. तो मैंने स्कूल जाना बंद कर दिया. तो उन्होंने पता किया..उनको पता लगा कि क्योंकि मैंने हॉस्टल से खुद को बाहर कर लिया था. हम पीजी में शिफ्ट कर गये थे फिर आवारापन शुरू हुआ, एक्टर बनना है थियेटर करना है. …उन दिनों बिपाशा की फिल्म आयी थी फिल्म आयी थी जिस्म हम लोग काजल लगाकर जादू है नशा है गाते थे… “

 

जब कंगना पर पिता ने उठाया था हाथ!

 

स्कूल छोड़ने पर कंगना के पिता काफी नाराज हुए. लेकिन कंगना अपनी जिद पर अड़ी रहीं. गुस्से में पिता ने हाथ उठाया तो कंगना ने उन्हें ऐसा न करने की चेतावनी दी.

 

कंगना की बगावत

 

आखिरकार वही हुआ जिसका डर था. अपने सपनों को पूरा करने के लिए कंगना ने बगावत कर दी. सामान उठाया और घर से निकल पड़ीं. अपनी मंजिल की तलाश में. कंगना के जीवन का दूसरा पड़ाव बना दिल्ली. उस वक्त वो सिर्फ 15 साल की थीं. एक अनजाने शहर में अपने सपनों की तलाश करते हुए कंगना एक मॉडलिंग एजेंसी के साथ जुड़ीं. यह कंगना के जीवन का सबसे कठिन दौर था. वो जानती थीं कि जिस रास्ते पर वो बढ़ चली हैं उस पर आगे बढ़ना बहुत मुश्किल है और पीछे लौटना भी आसान नहीं. तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने कंगना को एक बार फिर नये उत्साह और विश्वास से भर दिया.

 

एक्टिंग में पहला ब्रेक

 

कंगना रनौट कहती हैं, “एक दिन दिल्ली घूमते घूमते इंडिया हैबिटेट सेंटर गये वहां एक्टिंग वर्कशॉप हो रही थी तो फर्स्ट डे से अरविंद गौड़ वहां थे, वो जो करवा रहे थे मैं सब कर रही थी. तो अरविंद जी ने कहा कि मैं जा रहा हूं और तुम सबको करवाओ. तो मुझे एकदम से लगा मैं इम्पॉरटेंट हो गयी क्लास की मॉनीटर की तरह. तो उस टाइम पर एकदम लूसर फेस से एकदम एक्टिंग वर्कशॉप में जाने लगी. मुझे सुकून मिलता था मैं रेग्यूलर जाने लगी. 5-6 महीने मुझे बैक स्टेज पर रखा गया फिर लास्ट मिनट पर कोई मेल एंकर नहीं आया तो मुझे मूंछे लगा कर स्टेज पर भेज दिया गया. “

 

एक्टिंग की दुनिया में यह कंगना के जीवन का पहला ब्रेक था. पर मंजिल अब भी बहुत दूर थी. उस वक्त कंगना जिस मॉडलिंग एजेंसी के साथ जुड़ी थी, उसने एक ऑडीशन के लिए कंगना को मुंबई भेजा. तब तक कंगना ने यह सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्दी उन्हें सपनों के शहर में आने का मौका मिलेगा.

 

अपने सपनों को पूरा करने के लिए जिस कंगना ने पहले अपना स्कूल छोड़ा, फिर अपना घर छोड़ा, उसने एक झटके में ही दिल्ली को भी अलविदा कह दिया. न कोई रिश्तेदार, न कोई गॉडफादर – कंगना के साथ था तो सिर्फ उनका आत्मविश्वास. इसी आत्मविश्वास के साथ कंगना ने रखा मुंबई में अपना पहला कदम.

 

जिस शहर में हर रोज न जाने कितने लोग अपना सबकुछ छोड़कर आते हैं उसी शहर में कंगना बहुत कुछ पाने की उम्मीद लेकर आयीं थीं. एक छोटे शहर की गुमनाम सी लड़की, इस चमकती दमकती दुनिया में अपना नाम बनाना चाहती थी. लेकिन मॉडलिंग की दुनिया में उसे बार बार रिजेक्शन्स का सामना करना पड़ा.

 

कंगना ने हिम्मत नहीं हारी. मुंबई में बने रहने के लिए उन्होने आशा चंद्रा फिल्म एक्टिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया. कंगना ने यहां 4 महीने का कोर्स किया. इंस्टीट्यूट के एडमिशन कार्ड के मुताबिक तब कंगना की उम्र सिर्फ 17 साल थी.

 

फिल्म एक्टिंग इंस्टीट्यूट की आशा के चंद्रा, ” हम लोग ओशो के थ्रू सिखाते हैं,  उसको मेडिटेशन में भी इंटरेस्ट था, बहुत अच्छा डांस करती थी. बह बहुत अच्छी थी. मतलब उसे बनना था, उसका फोकस साफ था कि मुझे कुछ बनना है. “

 

आज कामयाबी जिसके कदम चूम रही है वो कंगना, उस वक्त मुंबई में हॉस्टल के एक छोटे से कमरे में रहा करती थीं. पैसे की तंगी इस कदर थी कि कई बार सिर्फ ब्रेड खाकर ही काम चलाना पड़ता था. लेकिन तब भी कंगना में हौसले की कमी नहीं थी.

 

आशा के चंद्रा कहती हैं, “वो लड़की जिस मुकाम पर पहुंची है वो एक एक्जामपल बनना चाहिए. नॉन फिल्मी बैकग्राउंड, कोई गॉडफादर नहीं और उस लड़की ने उसकी फिल्में देखिए क्वीन वगैरह आपको लगता है कि वो कहीं एक्टिंग कर रही है. “

पहला प्यार और फिल्म में पहला ब्रेक

 

मुंबई में बिना किसी गॉडफादर के कंगना का स्ट्रगल जारी था. लंबी लंबी क़तारो में लगना, ऑडिशन देना…हफ़्ते-महीने इसी में बीतते रहे. कंगना को फिल्म तो नहीं मिली लेकिन इसी दौरान उनकी मुलाकात हुई अपने से दोगुनी उम्र के हीरो आदित्य पंचोली से. कुछ ही मुलाकातों में आदित्य को कंगना से प्यार हो गया.

 

यहां तक कि दोनों साथ रहने लगे. यह बॉलीवुड में कंगना का पहला अफेयर था लेकिन कंगना को तो इंतजार था अपनी पहली फिल्म का. लगभग इसी वक्त पर निर्देशक अनुराग बसु को तलाश थी अपनी अगली फिल्म की हिरोइन की. किस्मत ने कंगना का साथ दिया और कंगना की अनुराग बसु से मुलाकात हुई.

 

कंगना रनौट कहती हैं, “अनुराग ने मेरा ऑडीशन किया फिर भट्ट साहब मिले तो उन्होंने कहा कि यह लड़की तो बहुत छोटी है यह तो 17-18 साल की है हमारी फिल्म की होरीइन का तो बच्चा भी है 7-8 साल का. तो कम से कम 28-29 की तो होनी चाहिए तो इस बात पर उन्होंने हमें रिजेक्ट कर दिया. कुछ महीने बाद अनुराग का फोन डेसपरेटली आया कि चलो तुम्हें ही मेकअप करके दिखाएंगे. तो ऐसे मुझे गैंगस्टर मिली.

 

अप्रैल 2006 में रिलीज़ हुई गैंगस्टर से कंगना की धमाकेदार शुरुआत हुई. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही और कंगना ने लगभग सभी अवॉर्ड फंक्शन्स में साल की सर्वश्रेष्ठ नई अभिनेत्री के अवॉर्ड जीते.

इतने कम समय में इतनी कामयाबी की उम्मीद कंगना ने भी नहीं की होगी. पर यह सिर्फ शुरूआत थी. सक्सेस के साथ ही कंगना का स्ट्रगल और बढ़ने वाला था. एक छोटे शहर से आयी कंगना ने ग्लैमर की दुनिया में दस्तक तो दे दी, लेकिन वो यहां के तौर तरीकों से अंजान थीं. बॉलीवुड की चमचमाती दुनिया में कंगना का मुकाबला उन लोगों से था जिनका ग्लैमर की दुनिया से पुराना नाता था. स्टार वर्ल्ड के शो ‘ द फ्रंट रो विद् अनुपम चोपड़ा ‘ में कंगना ने बॉलीवुड में अपने इस संघर्ष का जिक्र किया.

 

कंगना ने अपनी पढ़ाई हिंदी मीडियम में की थी. बॉलीवुड के शुरूआती दिनों में कंगना की अंग्रेजी और उनके ऐक्सेंट का भी मजाक उड़ाया गया. लोगों ने मजाक उड़ाया तो कंगना ने इस चुनौती को भी स्वीकार किया और दिखा दिया कि वो सिर्फ सपने देखना नहीं जानती बल्कि उन्हें पूरा करने की हर काबीलियत रखती हैं.

सफलता मिली तो कंगना के टूटे हुए रिश्ते भी जुड़ने लगे. जिस पिता से नाराज होकर कंगना ने घर छोड़ा था, उन्हें ही कंगना की कामयाबी पर गर्व होने लगा.

 

पिता अमरदीप रनौट, “कंगना की फिल्म जब गैंगस्टर रिलीज हुई उसका प्रीमीयर देखा तब मुझे विश्वास हो गया सबकुछ ठीक चल रहा है अब मुझे कोई डर नहीं है उसको लेकर न कोई चिंता है. हम सब खुश थे पूरे गांव शहर के लोग कहते थे हमारे हिमाचल का नाम कंगना ने ऊंचा किया है. “

 

2006 में ही कंगना की अगली फिल्म -वो लम्हे- रिलीज हुई. इसमें कंगना का किरदार मशहूर फिल्म अभिनेत्री परवीन बॉबी की कहानी पर आधारित था. अपनी पहली दोनों फिल्मों में कंगना ने जो किरदार निभाए उसकी वजह से उन्हें ट्रेजडी क्वीन भी कहा जाने लगा. अगले ही साल कंगना को एक बार फिर अनुराग बसु के साथ काम करने का मौका मिला. फिल्म थी – लाइफ इन अ मेट्रो.

 

कंगना को निगेटिव किरदारों में पसंद किया जाने लगा. लेकिन कंगना अपनी यह पहचान नहीं बनाना चाहती थीं. इसीलिए जब उन्हें मधुर भंडारकर की –फैशन- मिली तो शुरूआत में वो इसे नहीं करना चाहती थीं.

कंगना रनौट कहती हैं, ” मैं फैशन करना ही नहीं चाहती थी क्योंकि गैंगस्टर में लीडिंग एक्ट्रेस थी फिर मैंने काफी मेहनत की क्योंकि मुझे लगा कि वो मेरा लास्ट चांस था. 2008 में आयी गैंगस्टर टर्निंग प्वाइंट था. उसके लिए मुझे नेशनल अवॉर्ड मिला. “

 

फैशन के लिए कंगना को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला. महज दो साल के फिल्मी करियर में यह अवॉर्ड कंगना के लिए बहुत मायने रखता था.

 

फैशन का है ये जलवा

 

लेकिन जिस तरह फिल्म- फैशन में, शोहरत की बुलंदियों पर जाने के बाद शोनाली गुजराल का करियर लड़खड़ाने लगा था, कुछ उसी तरह रियल लाइफ में कंगना रनौट के करियर का ग्राफ भी बिगड़ने लगा.

 

2010 में आयी once upon a time in Mumbai को छोड़कर इस दौरान कंगना की कोई भी फिल्म अपनी खास छाप नहीं छोड़ पायी. इसी दौर में कंगना के दो और अफेयर्स चर्चा में आये. एक शेखर सुमन के बेटे अध्ययन सुमन के साथ और दूसरा अभिनेता अजय देवगन के साथ. कंगना के लिए यह मुश्किल वक्त था. एक तरफ बिगड़ती हुई पर्सनल लाइफ और दूसरी तरफ फ्लॉप होती फिल्में.

 

कंगना के मुताबिक मुश्किल वक्त ने उन्हें और मजबूत बनाया. किस्मत और मेहनत ने कंगना का साथ दिया. 2011 में आयी तनु वेड्स मनु. कंगना बिल्कुल नए अंदाज में. कंगना की अपनी कहानी की तरह ही इस फिल्म में उनका किरदार भी एक छोटे शहर की लड़की का था.

 

कंगना रनौट ने एबीपी न्यूज़ से कहा था, ” तनुजा त्रिवेदी ऐसा किरदार है जिससे मैं सबसे ज्यादा शिनाख्त करती हूं, यह किरदार रियल है. चंडीगढ़ में मेरे हॉस्टल में सब लड़किया तनुजा त्रिवेदी थीं. “

 

इस फिल्म के लिए कंगना को कई अवॉर्ड्स मिले. साथ ही अब तक बैड गर्ल के रोल में पसंद की जाने वाली कंगना की एक नई इमेज भी बनी. लेकिन कंगना के करियर का गेमचेंजर बनी वो फिल्म जिसने कंगना को बना दिया बॉलीवुड की क्वीन.

 

2014 में रिलीज़ हुई क्वीन ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए और साथ ही कंगना को उन अभिनेत्रियों की जमात में खड़ा कर दिया जो अपने दम पर फिल्म कामयाब बना सकती हैं.

 

ज़िंदगी की बड़ी उड़ान

 

फिल्म क्वीन में कंगना ने दिल्ली के राजौरी गार्डन की एक ऐसी मध्यमवर्गीय लड़की का किरदार निभाया, जिसका प्रेमी शादी के एक दिन पहले शादी करने से इंकार कर देता है. रानी का दिल टूट जाता है, लेकिन जीने का हौसला नहीं टूटता. दुख से उबरने के लिए वो अपने हनीमून पर अकेले जाने का फैसला करती है. इसी सफ़र पर उसकी मुलाक़ात अपनी उस ज़िंदगी से हो जाती है, जिससे वो अब तक अंजान थी.

 

इस फिल्म में कंगना की जबरदस्त एक्टिंग ने सबको उनको दीवाना बना दिया. अमिताभ बच्चन से लेकर आमिर खान तक ने कंगना के अभिनय की तारीफ की.

 

क्वीन के लिए कंगना को पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. असल जिंदगी में कंगना फिल्म, क्वीन के अपने किरदार रानी से बिल्कुल अलग हैं. लेकिन उनकी जबरदस्त एक्टिंग ने रानी को छोटे शहरों की मिडिल क्लास लड़कियों का आइडियल बना दिया.

 

क्वीन के बाद कंगना को महिला प्रधान फिल्में मिलने लगीं जैसे रिवॉल्वर रानी..(फिल्म एंबिएंस)…फिल्म क्वीन में कोई बड़ा हीरो नहीं था फिर भी इस फिल्म को जबरदस्त सफलता मिली. क्वीन की सक्सेस के जरिए कंगना ने बॉलीवुड के उस ट्रेंड को बदलने की भी कोशिश की जिसमें हीरो को हिरोइन से ज्यादा अहमियत दी जाती है. कंगना हमेशा से ही इसके खिलाफ रही हैं.

कंगना रनौट ने कहा था, “इंडस्ट्री में लड़कियों का रोल कहां होता है…वुमेन ओरियंटेड फिल्म न हो तो भी लड़की का किरदार तो इंटरेस्टिंग हो सकता है वो भी नहीं होता है जब गाने आते हैं तो कहीं से आ जाती हैं फिर पूरा दिन गायब रहती हैं..सिर्फ उनका थोड़ा सा ब्यूटी करके डाल दिया जाता है आप थोड़ा सा अंग प्रदर्शन करके नाच गाना करके चले जाइए.”

 

बतौर अभिनेत्री कंगना अपनी जिम्मेदारियों को लेकर भी काफी सजग हैं. एक खबर के मुताबिक हाल ही में कंगना ने एक फेयरनेस क्रीम के ऐड का ऑफर ठुकरा दिया. वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि वो खुद इससे सहमत नहीं हैं. इससे पहले आमिर खान के शो सत्यमेव जयते में कंगना ने यह खुलासा किया था कि वो मानती हैं कि आइटम नंबर्स का गलत असर पड़ता है इसीलिए उन्होंने खुद आइटम नंबर्स के ऑफर ठुकरा दिए.  

 

कंगना रनौट कहती हैं, “एक मेरी फ्रेंड की बच्ची थी जो कि जैसे यह अश्लील आइटम नंबर होते हैं तो वो उनके स्टेप रिहर्स कर रही थी उसपे तो क्यूट लगेंगे लेकिन मैं सोच रही थी कि उसकी जैसे मानसिकता बन जाएगी कि यह चीज सराही जाती है या इस पर तालियां बजती है तो उस चीज को लेकर मुझे पहली बार इतना जिम्मेदार महसूस हुआ कि मैंने एक छोटा सा स्टैंड तो लिया कि पिछले 3-4 सालों में मैंने 6 आइटम नंबर रिफ्यूज किए हैं. “

 

कंगना इंडस्ट्री के उन लोगों में शामिल हैं जो अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते है. पिछले कुछ सालों से जिस तरह वो अपने किरदार को लेकर प्रयोग कर रही हैं और चुनिंदा फिल्में कर रही हैं, उसकी वजह से उनकी तुलना आमिर खान से भी की जाने लगी है. खास बात यह है कि आमिर खान की तरह कंगना भी कमर्शियर अवार्ड समारोह में जाना पसंद नहीं करती हैं.

आमिर की तरह ही कंगना अपने काम को लेकर परफेक्शनिस्ट रवैया रखती हैं. फिल्म तनु वेड्स मनु रिटर्न्स में हरियाणवी एथलीट का किरदार निभाने के लिए कंगना ने बाकायदा ट्रिपल जंप की ट्रेनिंग ली.

 

यही नहीं दत्तो का किरदार निभाने और हरियाणवी लहजा सीखने के लिए वो खुद दिल्ली यूनिवर्सिटी के पास हॉस्टल लेकर रहीं. कंगना के अभिनय की सबसे बड़ी ताकत यह भी है कि वो कभी इस बात की परवाह नहीं करतीं कि एक्टिंग के वक्त वो कैसी दिख रही हैं और वह सीखने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं.

 

कंगना जब बॉलीवुड में आयीं थीं तब वो इस इंडस्ट्री के बारे में कुछ भी नहीं जानती थीं लेकिन अब वो न सिर्फ एक्टिंग बल्कि दूसरे तकनीकि पहलुओं को समझने में भी लगी हैं. कुछ समय पहले उन्होने न्यूयॉर्क में स्क्रीन प्ले राइटिंग के कोर्स में दाखिला लिया था.

 

कंगना रनौट कहती हैं, ” स्क्रीन प्ले राइटिंग जो मैं पूरा नहीं कर पाई पूरा करूंगी, बहुत अच्छा एक्सपीरियंस रहा बहुत अच्छी तरह से सिखाते हैं जो इस जगह पर मुकाम बनाना चाहते हैं. ” ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्सं’ की बॉक्स ऑफिस सक्सेस के बाद कंगना शौहरत के शिखर पर हैं. फिल्मी शादी तो ठीक है लेकिन रियल लाइफ में वो फिलहाल शादी का इरादा नहीं रखती.

 

वह कहती हैं, “अभी 10 साल संघर्ष किया अब सक्सेस मिला है तो अब इसे इंजाय करना चाहती हूं. रिलेशनशिप में टाइम देना पड़ता है जब लगेगा तब करूंगी.” निजी जिंदगी में कंगना को गज़लें सुनना पसंद हैं. जगजीत सिंह उनके पसंदीदा गायक हैं. खाली वक्त में कंगना खाना बनाने का शौक भी रखती हैं.

 

हिंदी सिनेमा की क्वीन बनकर उभरी कंगना रनौट ने करीब एक दशक के फिल्मी करियर में बहुत से उतार चढ़ाव देखे हैं. लेकिन हर नाकामी से कंगना ने और कामयाब बनने की सीख ली. एक्टिंग में अपना लोहा मनवाने के बाद वो भविष्य में बतौर डायरेक्टर भी काम करना चाहती हैं. यानी कंगना के सपनों की उड़ान अभी थमी नहीं है.

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Web Title: Kangana Ranaut
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