‘लव स्टोरी-सीज़न 2’: इस वजह से सुरैया ने नहीं की देव आनंद से शादी!

By: | Last Updated: Saturday, 30 August 2014 2:30 PM
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नई दिल्ली : है अपना दिल तो आवारा ना जाने किस पे आएगा… फिल्म सोलवां साल का ये बेहद मशहूर गीत कहने को तो एक फिल्म का गीत है . लेकिन इस गीत के बोल, जैसे देव आनंद की असली जिंदगी के उस पहले प्यार को बयां करते हैं. जिसकी कसक देव आनंद ने उम्र भर महसूस की .

 

अभिनेत्री सुरैया के साथ देव आनंद का वो खूबसूरत लव स्टोरी, जिसे ज़माने की नज़र लग गई. वाकई जिंदगी के हर लम्हे, साथ चलता है पहला प्यार . सुर्खियों में रही इश्क की वह दास्तान, जिसकी कशिश कुछ ऐसी है कि आज भी, अगर कोई देव आनंद का नाम ले तो सुरैया का नाम खुद ब खुद ज़ुबां पर आ जाता है .  आखिर हुआ क्या था इस लव स्टोरी में?

 

देव आनंद और सुरैया की लव स्टोरी की शुरुआत हुई थी 1948 में . उस दौर में सुरैया फिल्म इंडस्ट्री की बड़ी अभिनेत्री और गायिका थीं. वो फिल्मों में अपने गीत खुद गाती थीं और उस दौर में दर्शक उनके हर गीत पर झूम उठते थे . जबकि देव आनंद अभी नए नए आए थे और एक अभिनेता के रूप में ज्यादा मशहूर नहीं हुए थे .

 

देव आनंद को फिल्म विद्या के लिए साइन किया गया जिसकी हीरोइन सुपर स्टार सुरैया थीं . इसी फिल्म के सेट्स पर दोनों की पहली मुलाकात हुई . शूटिंग के पहले ही दिन देव आनंद और सुरैया के बीच एक रोमैंटिक सीन फिल्माया जाने वाला था .

 

 

उन लम्हों को याद करते हुए देव आनंद ने अपनी जीवनी- Romancing with Life में लिखा-सीन की शूटिंग से पहले मैं सोच रहा था कि देश की ड्रीम गर्ल , जो अपने हर फैन के दिल में बसती है, वो आज मेरे गले में अपनी बांहे डालेगी . कितना अच्छा होगा अगर उस समय कोई मेरी तस्वीर खींच सके . शॉट शुरू होने से पहले मैंने सुरैया से कहा कि मेरे बालों में जरा ध्यान से हाथ लगाइएगा . वो खिलखिलाकर हंस पड़ी और बोली हां मुझे मालूम है, मैं तुम्हारे ‘पफ’ को खराब नहीं करूंगी .

 

पहली नज़र में ही प्यार हो गया था देव आनंद और सुरैया को . फिल्म के सेट पर अब नज़रें एक दूसरे को ही तलाशती रहतीं . दोनों ने एक दूसरे के प्यार के नाम भी रख दिए . अपने एक मनपसंद नॉवेल के हीरो के नाम पर सुरैया ने देव आनंद का नाम रखा Steve …जबकि देव आनंद को सुरैया की नाक ज़रा लंबी लगती थी, सो उन्होने सुरैया का नाम रख दिया….Nosey.

 

फिल्म विद्या की शूटिंग के दौरान ही एक सीन नाव में फिल्माया जा रहा था . इसी सीन की शूटिंग के दौरान अचानक नाव पलट गई और सुरैया पानी में डूबने लगी. तभी देव आनंद ने तेज़ी से तैरते हुए उन्हे बचा लिया . इस घटना को याद करते हुए करीब 40 साल बाद 1987 में पत्रकार शीला वेसुना को दिए एक इंटर्व्यू में सुरैया ने कहा-मैंने देव से कहा अगर आज तुम मेरी जान नहीं बचाते तो मैं खत्म हो जाती. तो उन्होने जवाब दिया-  अगर तुम्हारी जान चली जाती तो मैं भी खत्म हो जाता .मुझे लगता है यही वो पल था जब हम दोनों को एक दूसरे से बेपनाह मुहब्बत हो गई .

 

 

शुरुआत में तो देव आनंद सुरैया के घर कई बार डिनर पर गए . सुरैया के घर में उनकी मां, नानी और मामा रहते थे . सुरैया का सारा कामकाज उनकी नानी और मामा संभालते थे और सुरैया उनकी हर बात मानती थीं.  देव आनंद अपने दोस्तों के साथ जब उनके घर जाते तो उनके दोस्त सुरैया की नानी को बातों में लगा लेते . और घर की छत पर, घरवालों की नजरों से दूर दोनों प्रेमी एक कोने में बैठकर घंटों तक एक दूसरे से बातें करते रहते.

 

 

लेकिन जब सुरैया और देव आनंद की मोहब्बत के चर्चे पूरी फिल्म इंडस्ट्री में होने लगे. तो सुरैया की नानी माथा ठनका . उन्होने देव आनंद के घर आने पर पाबंदी लगा दी . हालांकि सुरैया की मां देव आनंद को बेहद पसंद करती थीं लेकिन घर में सुरैया की नानी का हुक्म चलता था. और उन्हे सुरैया और देव आनंद के रिश्ते पर सख्त एतराज था .

 

सुरैया की नानी को सुरैया का एक दूसरे धर्म के लड़के के साथ रिश्ता कतई बर्दाश्त नहीं था . उन्होंने सुरैया पर पाबंदी लगाना शुरू कर दी कि वो शूटिंग के अलावा देव से बिलकुल नहीं मिलेंगी.

 

 

1950 में देव आनंद और सुरैया ने साथ में दो और फिल्में सनम और जीत साइन कर लीं . लेकिन अब हर फिल्म की शूटिंग पर सुरैया की नानी उनके साथ जाने लगी थीं . देव आनंद और सुरैया के बीच रोमैंटिक सीन की शूटिंग के दौरान तो वो बेहद नाराज़ होती और निर्देशक से सीन बदलने तक को कह देती . कई साल बाद जून 1972 में फिल्म मैगज़ीन स्टारडस्ट को दिए एक इंटर्व्यू में सुरैया ने कहा- नानी बेहद सख्त थीं . घर में सब उनकी बात मानते थे . मैं शर्मीली थी, नादान थी और उनसे बहुत ज्यादा डरती थी . वो मुझसे गुस्से में कहतीं एक मुस्लिम लड़की और एक हिंदू लड़के की शादी कैसे हो सकती है? घर में मचे इस हंगामे से दूर शूटिंग के दौरान दोनों की मुलाकातें होती रहती .

 

इंडस्ट्री में देव आनंद की शोहरत भी लगातार बढ़ रही थी . इसी दौरान देव आनंद ने अपने बड़े भाई निर्देशक चेतन आनंद के साथ मिलकर 1949 में अपना बैनर नवकेतन लॉन्च कर दिया .

 

नवकेतन बैनर की पहली फिल्म अफसर में हीरोइन के रूप में सुरैया को ही साइन किया गया और हीरो बने देव आनंद . साथ ही दोनों की नजदीकियों की खबरें फिर सुर्खियां बन गईं .

 

सुरैया की नानी उन्हे ये फिल्म साइन करने से तो नहीं रोक पाईं लेकिन इस फिल्म की शूटिंग के दौरान देव के खिलाफ उनका गुस्सा खुलकर सामने आ गया . देव और सुरैया के साथ वाले सीन्स की शूटिंग में उन्होने जमकर मुसीबतें खड़ी की . यहां तक कि हर शॉट से पहले और बाद में देव आनंद और सुरैया के बात तक करने पर उनकी नानी ने रोक लगा दी थी .

 

जब बात करने पर रोक लग गई तो प्रेम के दीवानों ने एक दूसरे को अपने दिल का हाल ख़तों के जरिए बताना शुरू कर दिया . लव लेटर्स पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई देव आनंद के दोस्तों कैमरामैन दिवेचा, अभिनेता ओमप्रकाश और अभिनेत्री कामिनी कौशल को . अब ये दोनों साथ में शूटिंग तो करते, लेकिन दिल की बातें होती थीं ख़तों  के जरिए, जिसमें ये दोनों एक दूसरे को स्टीव और नोजी के नाम से ही पुकारते .

 

ऐसे ही एक रोमैंटिक खत में देव आनंद ने सुरैया को लिखा- नोजी चलो जल्दी से शादी कर लेते हैं . हमारी जोड़ी सबके लिए एक मिसाल होगी. हम खुशियों से भरा एक ऐसा घर बनाएंगे जिसे देखकर पूरी दुनिया हमसे जल उठेगी . 

 

दोनों अपनी आने वाली जिंदगी के सपनों में खोए रहते. वो अपने घर और बच्चों की बातें भी करते . एक मैगज़ीन को दिए इंटरव्यू में सुरैया ने बताया- मैं हमेशा देव से कहती कि मुझे लड़की चाहिए ताकि मैं उसको अच्छी अच्छी ड्रेस पहना सकूं . देव मुझे छेड़ते हुए कहते- तुम्हारे पास खेलने के लिए पहले से ही इतनी सारी गुड़िया हैं तुम्हे एक और गुड़िया क्यों चाहिए ? फिर मैंने उनसे कहा कि हम अपनी बेटी का नाम देवीना रखेंगे.

 

देव आनंद की शोहरत खासतौर पर नौजवान लड़के लड़कियों में बढ़ती जा रही थी . कहा तो ये भी जाता है कि उन दिनों देव आनंद ने काला सूट पहनना छोड़ दिया था. क्योंकि वो काले सूट में इतने हैंडसम लगते थे कि लड़किय़ां उन्हे देखकर बेहोश हो जाती थीं . लेकिन खुद देव आनंद. सुरैया पर ही जान छिड़कते थे .

 

इन्हीं दिनों फिल्म जीत के एक सीन में देव आनंद और सुरैया की शादी का सीन फिल्माया जाना था . सुरैया के घरवालों की सख्ती से परेशान देव और सुरैया ने फैसला किया कि इस सीन में वो असली पंडित को बुलाएंगे, असली मंत्र पढ़े जाएंगे और इन दोनों की वाकई में शादी हो जाएगी . सेट्स पर सारा इंतजाम हो चुका था . असली पंडित भी आ गया था . लेकिन तभी एक असिस्टेंट डायरेक्टर ने ये खबर, सुरैया की नानी तक पहुंचा दी. फिर क्या सेट्स पर हंगामा मच गया और नानी सुरैया को सेट्स से खींच कर जबरदस्ती घर ले गईं .

 

इसके बाद तो सुरैया की नानी ने उनकी जल्द से जल्द शादी करने का फैसला ले लिया. शादी के लिए उन्होने चुना उस जमाने के मशहूर निर्देशक एम.सादिक़ को जो सुरैया की कई फिल्में डायरेक्ट कर चुके थे . लेकिन देव की याद में तड़प रहीं सुरैया किसी भी तरह से शादी के लिए राज़ी नहीं हो रही थीं . और इसके बाद घर में वो हुआ जिसने सुरैया को दहला दिया . उन दिनों को याद करते हुए 1987 में पत्रकार शीला वेसुना को दिए एक इंटरव्यू में सुरैया ने कहा- हर रोज़ मुझे समझाने के लिए फिल्म इंडस्ट्री के हमारे कई करीबी लोगों को बुलाया जाता जो मुझे समझाते कि देव के साथ शादी मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल होगी . अभिनेत्री नादिरा के पहले पति नक्शब तो मेरे सामने क़ुरान ले आए और बोले कि इस पर हाथ रखकर कसम खाओ कि तुम देव से शादी नहीं करोगी . उन्होने ये भी कहा कि अगर मैंने देव आनंद से शादी की तो देश में दंगे भी हो सकते हैं . मैं बेहद डर गई थी . लेकिन मेरी हिम्मत तब टूट गई जब मेरी नानी और मामा ने देव को जान से मारने की धमकी दी .

 

धमकी सुनकर सुरैया बेहद डर गई, उनको वाकई ये लगने लगा कि गुस्से में उनका परिवार देव आनंद को नुकसान पहुंचा सकता है . अपनी नानी और मामा की धमकी से घबराई सुरैया ने फिल्म नीली की शूटिंग के दौरान देव से बात की और बताया कि वो उनकी मौत की वजह नहीं बनना चाहतीं इसलिए देव उन्हे भूल जाएं . लेकिन उनकी बातें सुनकर देव आनंद बोले- तुम्हे डरने की कोई जरूरत नहीं है . हम कोर्ट में शादी कर लेंगे . मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारे धर्म अलग हैं . मेरा धर्म मोहब्बत है . मेरे लिए प्यार ही सबकुछ है . हमारे प्यार के बीच में समाज और परिवार को मत आने दो . लेकिन सुरैया कोई फैसला नहीं कर पा रही थीं . ये देखकर देव आनंद को गुस्सा आ गया . मैं तुम्हारे बारे में इतना सीरियस हूं और तुम्हे कोई फर्क ही नहीं पड़ता . शायद मेरी हैसियत ही नहीं है कि मैं तुम्हारे सपने देख सकूं .

 

 

और इसके बाद गुस्से में देव आनंद इतने जज्बाती हो गए कि सुरैया के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ मार दिया . सुरैया फूटफूटकर रोने लगीं . देव उस समय तो वहां से चले गए लेकिन बाद में उन्हे बहुत पछतावा हुआ . सुरैया अपने इंटरव्यू में कहती हैं-देव ने मुझे बताया कि वो घर गए और बार बार अपने हाथ दीवार पर मारते रहे . उन्हे मुझ पर हाथ उठाने का बेहद पछतावा था लेकिन इस घटना से मुझे ये पता चल गया कि वो मुझसे कितना प्यार करते हैं . मेरे परिवार ने उनकी बहुत बेइज्जती की लेकिन इसके बावजूद वो मुझसे प्यार करते रहे . 

 

 

देव आनंद की जीवनी Romancing with Life के मुताबिक इसी दौर में, देव आनंद से मुलाकात ना होने पर परेशान सुरैया ने उन्हे एक खत में  लिखा –मैं तुम्हारा खत पढ़कर रोती रही . मैं भी तुमसे बेहद प्यार करती हूं . और हर हाल में तुमसे मिलना चाहती हूं . कल शाम सात बजे तुम मेरे घर पर फोन करना, मैं फोन के नजदीक बैठकर इंतजार करूंगी .

 

 

अगले दिन, जब देव आनंद ने सुरैया के घर फोन किया तो फोन उठाया उनकी नानी ने. उन्होने देव आनंद को डांटते हुए कहा कि अगर उन्होने फिर उनके घर फोन करने या सुरैया से मिलने की कोशिश की तो वो पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कर देंगी . इसके बाद काफी देर तक देव आनंद फोन मिलाते रहे लेकिन हर बार दूसरी तरफ से आवाज़ नानी की ही आती . मोहब्बत पर सख्त पहरे लग गए थे.

 

 

अपनी मोहब्बत से मजबूर देव आनंद ने कुछ देर बाद फिर से सुरैया के घर फोन किया . इस बार फोन उठाया सुरैया की मां ने . मां को सुरैया और देव के रिश्ते पर ऐतराज़ नहीं था . उन्होने देव को बताया कि सुरैया उनसे मिलना चाहती है लेकिन नानी उसे मिलने नहीं दे रही . उन्होने ये भी कहा कि अगर देव सुरैया से मिलना चाहते हैं तो अगले दिन, रात साढ़े ग्यारह बजे उनके घर कृष्णा महल की छत पर पहुंच जाएं. कृष्णा महल बिल्डिंग मुंबई के मरीन ड्राइव पर थी और इस बिल्डिंग के सामने समंदर था . सुरैया इस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर रहती थीं .

 

घर की छत पर मुलाकात की बात सुनकर मुझे लगा कि कहीं ये मुझे फंसाने की कोई चाल तो नहीं? अगर मैं वहां पर पकड़ा गया तो क्या होगा ? अगले दिन अखबारों में ये खबर छप जाएगी और फिर बहुत बदनामी होगी, मैं लॉकअप में भी जा सकता हूं . लेकिन फिर मैंने सोचा कि एक सुरैया की मम्मी ही तो हैं जिन पर मैं भरोसा कर सकता हूं . अपने प्यार की खातिर मैंने वहां जाने का फैसला किया लेकिन अपने साथ मैंने अपने दोस्त तारा को ले लिया जो बॉम्बे पुलिस में इंस्पेक्टर था .

 

उस रात देव आनंद जब सुरैया से मिलने उनके घर की छत पर पहुंचे तो वो वहां उनका पहले से इंतजार कर रही थीं . दोनों एक दूसरे से कई हफ्तों के बाद मिल रहे थे .

 

मैंने सुरैया को गले से लगा लिया . काफी देर तक हम दोनों ने एक दूसरे से कुछ नहीं कहा . फिर मैंने उन्हे किस कर लिया. वो किस मैं कभी नहीं भूलूंगा . इसके बाद वो फूटफूट कर रोने लगी . मैंने उसे शांत किया. मैं उसे हर मुसीबत से बचाना चाहता था . मैंने उससे कहा- क्या तुम मुझसे शादी करोगी? उसने मुझे जोर से अपनी बाहों में भर लिया और बार बार कहने लगी…I love you, I love you…

 

अगले ही दिन देव आनंद मुंबई के ज़वेरी बाजार गए और वहां से एक बेहद महंगी और खूबसूरत हीरे की अंगूठी खरीदी . वो ये अंगूठी खुद सुरैया को पहनाना चाहते थे . उनके घर फोन किया तो फिर से फोन नानी ने उठाया . ऐसे वक्त में अंगूठी सुरैया तक पहुंचाने की जिम्मेदारी देव आनंद ने सौपी अपने दोस्त कैमरामैन दिवेचा को जो सुरैया के घर बेरोकटोक जा सकते थे . देव आनंद के दोस्त दिवेचा ने अंगूठी सुरैया तक पहुंचा दी . जून 1972 में इस घटना को याद करते हुए, स्टारडस्ट मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में सुरैया ने कहा- देव ने मुझे अंगूठी दी जिसमें तीन हीरे लगे थे . उसके साथ उनका एक संदेश भी था जिसमें लिखा था-ये सगाई की अंगूठी है हालांकि हम सबके सामने सगाई नहीं कर रहे हैं. मुझे पता है कि तुम इस अंगूठी को अभी पहन नहीं पाओगी लेकिन इसे मेरे प्यार की निशानी समझ कर संभाल कर रखना .

 

सुरैया ने उस अंगूठी को जल्दी से अपने कमरे में छुपा दिया ताकि उनकी नानी की नजर उसपर ना पड़े . इसके बाद उन्होने दिवेचा से कहा कि देव आनंद को बता दें कि वो उनसे बेहद प्यार करती हैं .उन दिनों को याद करते हुए देव आनंद ने अपनी जीवनी Romancing with Life में लिखा. मैं सातवें आसमान पर था . उन्होने अंगूठी ले ली थी यानि अब हमारी सगाई हो गई थी . मुझे उसकी और भी ज्यादा याद आने लगी, मैं उससे मिलना चाहता था, लेकिन उसकी तरफ से कोई संदेश नहीं आया. हमारी शूटिंग भी खत्म हो चुकी थी यानि हमारे मिलने का कोई तरीका नहीं था.  कई हफ्ते गुजर गए ना उसका कोई खत आया, ना फोन…. ना कोई संदेश .

 

सुरैया का हाल जानने के लिए देव आनंद ने फिर से अपने दोस्त दिवेचा को उनके घर भेजा लेकिन जैसे ही दिवेचा वहां पहुंचे, घर के दरवाजे उनका सामना हुआ सुरैया की नानी से . इस बार नानी ने दिवेचा से सख्ती से कहा कि अब उन्हे घर के अंदर आने की इजाजत नहीं है . ये साफ हो चुका था कि सुरैया के घर में अंगूठी वाली बात पता चल चुकी है और सुरैया को घर से बाहर तक निकलने नहीं दिया जा रहा .

 

स्टारडस्ट मैगजीन को दिए इंटरव्यू में सुरैया ने कहा- एक दिन शूटिंग के दौरान मैंने देव की दी हुई अंगूठी अपनी उंगली में पहन ली . लेकिन नानी की एक्स रे जैसी नजर से वो अंगूठी छुप नहीं पाई . उन्होने मुझे सख्ती से घूरा और फौरन घर ले आईं . इसके बाद उन्होने जबरदस्ती मेरे हाथ से वो अंगूठी निकाल ली . मुझे पता था कि देव ने दोस्तों से उधार लेकर मेरे लिए वो कीमती अंगूठी खरीदी है . मैं उस रात बहुत रोई.

 

 

सुरैया की नानी तो फैसला कर चुकी थीं कि वो सुरैया और देव को एक नहीं होने देंगी . अब आखिरी फैसला सुरैया को करना था कि क्या वो सबकुछ छोड़कर अपने देव के पास जाएंगी? ये फैसले की घड़ी थी और देव आनंद के कई करीबी लोगों जैसे अभिनेत्री दुर्गा खोटे और गुरू दत्त ने सुरैया को समझाया कि वो देव आनंद से शादी कर लें . बाद में सबकुछ ठीक हो जाएगा लेकिन सुरैया चुप रहीं.

 

अपनी जीवनी Romancing With Life में देव आनंद लिखते हैं- सुरैया के घर में वो माहौल हो चुका था कि उनकी मां के अलावा कोई भी उनके साथ नहीं था . अगर वो अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाती तो या तो उनको रास्ते से हटा दिया जाता या उनकी नानी खुद को खत्म को कर लेगीं . सुरैया रोती रही और आखिरकार अपने ऊपर पड़ते दवाब के आगे झुक गईं .

 

और फिर देव आनंद की जीवनी के मुताबिक, घरवालों की सख्ती से तंग आकर एक दिन सुरैया ने उनकी दी हुई हीरे की अंगूठी को समंदर में फेंक दिया . उन्होने उस अंगूठी को आखिरी बार देखा और मुझे याद करते हुए उस अंगूठी को समुद्र में फेंक दिया जहां वो उठती गिरती लहरों को हमारी मोहब्बत के अफसाने सुना सके .

 

 

हालांकि सुरैया का कहना था कि वो अंगूठी उनकी नानी ने उनसे छीन कर समंदर में फेंकी थी . लेकिन उन्होने माना कि फैसले की घड़ी में कमजोर पड़ने वाली वो खुद थीं.

इस रिश्ते के खत्म होने की कई वजह थीं . मुझे देव के प्यार पर तो यकीन था लेकिन खुद पर विश्वास नहीं था . मैं कन्फयूज थी . जब मैंने देव से शादी करने को मना कर दिया तो उन्होने मुझे कायर कहा . शायद मैं कायर ही थी . मेरे अंदर वो कदम उठाने की हिम्मत ही नहीं थी . शायद यह मेरी गलती थी या फिर… किस्मत .

 

देव आनंद और सुरैया का रिश्ता टूट गया और इस बात ने देव आनंद को भी तोड़ कर रख दिया . वो अपने बड़े भाई चेतन आनंद के पास गए और उनके कंधे पर सिर रखकर फूटफूटकर रोने लगे . चेतन ने उनसे कहा- ये घटना तुम्हे जीवन में और ज्यादा हिम्मत देगी, ज्यादा समझदार बनाएगी ताकि तुम जिंदगी की बड़े संघर्षों में जीतने के लिए तैयार हो सको .

 

उस वक्त सुरैया देव आनंद से शादी की हिम्मत नहीं कर सकीं लेकिन फिर उन्होने जिंदगी भर शादी नहीं की और हमेशा देव आनंद की यादों में खोई रहीं . वहीं सुरैया के बाद देव आनंद की जिंदगी में आईं अभिनेत्री कल्पना कार्तिक . देव आनंद को फिर से प्यार हुआ और एक फिल्म की शूटिंग के दौरान, एक दिन लंच ब्रेक में ही दोनों ने शादी कर ली . 

 

शादी के बाद कल्पना कार्तिक ने फिल्में छोड़ दी और देव का घर संभाल लिया . इनके दो बच्चे भी हुए . इस दौरान काफी साल तक देव आनंद और सुरैया की कोई बात नहीं हुई . लेकिन फिर कई साल बाद एक पार्टी में दोनों आमने-सामने आए . दोनों ने एक दूसरे का हालचाल पूछा . देव ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं एक बेटा और एक बेटी . सुरैया ने पूछा कि बेटी का नाम क्या है- देव ने कहा- तुम्हे तो मालूम होना चाहिए. मैंने अपनी बेटी का नाम देवीना रखा है . 

 

ये वही नाम था जिसके बारे में देव और सुरैया बातें किया करते थे और कहते थे कि वो अपनी बेटी का नाम रखेंगे . 31 जनवरी 2004 को 74 साल की उम्र में सुरैया का निधन हो गया . हर किसी को उम्मीद थी उन्हे आखिरी विदाई देने के लिए देव आनंद जरूर आएंगे . मुंबई के मरीन लाइन्स के बड़े कब्रिस्तान में जहां सुरैया को दफनाया गया, वहां सबकी आंखे देव आनंद को तलाश रही थीं लेकिन वो नहीं आए .

 

3 दिसंबर 2011 को देव आनंद भी नहीं रहे लेकिन दिल में आखिर तक उस अधूरी लव स्टोरी की कसक रही . एक ऐसी लव स्टोरी जिसके बारे में दोनों सालों बाद भी ऐसे बातें करते थे जैसे ये कल की ही बात हो .

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