एमसीजी में 'नीले समंदर' के तूफान ने बढ़ाया भारतीय गेंदबाजों का हौसला

By: | Last Updated: Monday, 23 February 2015 5:10 AM
MCG_Team India_World Cup 2015_South Africa_Vishwa Vijeta_

नई दिल्ली: विश्व के सर्वकालिक महान तेज गेंदबाजों में गिने जाने वाले डेल स्टेन ने 147.3 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी तो उमेश यादव ने 147.00 की रफ्तार से उसका जवाब दिया.

 

आमतौर पर अपने में सिमटे रहने वाले और आलोचना झेलते रहने वाले भारतीय गेंदबाजों ने रविवार को मेलबर्न क्रिकेट मैदान (एमसीजी) में उठे नीले ‘इंसानी’ समंदर के हौसले से प्रेरित होकर टीम को जीत तक पहुंचाया.

 

बीते तीन-चार सालों में ऐसा बहुत कम हुआ है, जब भारत ने बल्लेबाजों और गेंदबाजों के सम्मिलित प्रयासों की बदौलत मैच जीता हो. 2011 विश्व कप में भी भारतीय गेंदबाजी कमजोर थी और बल्लेबाज ही मुख्य तौर पर टीम की खिताबी जीत के नायक बने थे.

 

इस बार भी यही कहानी है. सब मानते हैं कि भारत को अगर विश्व कप जीतना है तो उसके बल्लेबाजों को खुलकर खेलना होगा. गेंदबाजों को कोई नहीं गिनता लेकिन रविवार के बाद गेंदबाजों को भी जीत में अहम भागीदार माना जाने लगा है. कारण यह है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारतीय गेंदबाजों ने अपना दिल खोल दिया. दम फूल गया लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा.

 

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह रही, एमसीजी में जुटी 70 हजार से अधिक प्रशंसकों की भीड़, जिसमें अधिकांश संख्या भारतीयों की थी. विदेशों में रहने वाले भारतीय, विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोग, क्रिकेट का लुत्फ लेने ऑस्ट्रेलिया पहुंचे लोग, आस-पास के देशों में रहने वाले भारतीय और भारतीय मूल के लोग. ये सभी टीम को जीत दिलाने के लिए रविवार को एमसीजी में थे.

 

एमसीजी यानी आज की तारीख में विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम. इतना बड़ा कि अपने आप में दो वानखेड़े स्टेडियम समा ले. इतना बड़ा कि इसमें ईडन गार्डन्स से डेढ़ गुना लोग समा जाएं. एमसीजी की खासियत यह है कि यह आकार में जितना बड़ा है, उससे कहीं बड़ी यहां की क्रिकेट संस्कृति है और इसी कारण यहां वे लोग भी खुद को प्रेरित महसूस करते हैं, जो लगातार आलोचना के तीर से घायल होते रहे हैं.

 

भारतीय गेंदबाज इनमें से ही एक हैं. पाकिस्तान के खिलाफ प्रेरणादायी प्रदर्शन करने के बाद मोहम्मद समी ने एक बार फिर अपना दिल खोल दिया. मोहित शर्मा और उमेश यादव ने लय बरकरार रखने के लिए अपना दमखम लगा दिया और रविचंद्रन अश्विन ने चतुराई का परिचय देते हुए तीन विकेट झटककर टीम की जीत में अहम भूमिका अदा की.

 

उमेश ने दिखाया कि वह रफ्तार के मामले में किसी से कम नहीं. हां, गेंदों की दिशा और लंबाई के मामले में वह पीछे हैं, लेकिन वक्त के साथ यह कला भी वह सीख जाएंगे. उनकी तेज गेंदों ने दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों को खूब परेशान किया और इसी कारण यह टीम भारत के 308 रनों के लक्ष्य के आस-पास भी नहीं फटक सकी.

 

एमसीजी में आधिकारिक दर्शक संख्या 70 हजार से ऊपर रही. इसकी क्षमता 90 हजार के करीब है. भारत में अगर ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीका मैच देश के सबसे बड़े स्टेडियम ईडन गार्डन्स में भी हो तो अधिक से अधिक 25-30 हजार लोग जुटते लेकिन एमसीजी में गैर मेजबान टीमों का मैच होते हुए भी इतने लोगों का जुटना क्रिकेट की जीत कही जा सकती है.

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