Review:एक अनोखे अनुभव के लिए जरुर देखें 'बाहुबली'

By: | Last Updated: Friday, 10 July 2015 9:33 AM
movie review bahubali

तीन सालों में बनकर तैयार हुई फिल्म को दो पार्ट में रिलीज किया जाएगा, पहला पार्ट शुक्रवार को रिलीज होने के बाद दूसरा पार्ट सितंबर के अंत तक रिलीज होगा. फिल्म में प्रभास, राणा दग्गुबती, अनुष्का शेट्टी और तमन्ना मुख्य भूमिका में हैं.

साढ़े तीन स्टार (***1/2)

 

ऐसी कोई कहानी नहीं हैं जो पहले सुनाई ना गई हो. जो कहानी ‘बाहुबली’ की है, वैसी कहानियां हम शायद बचपन से लेकर आज तक कई बार पहले सुन चुके हैं, टेलीविजन और सिनेमा में देख भी चुके हैं, मगर निर्देशक एस.एस राजामौली ने जिस भव्यता और सपनीले स्तर पर ‘बाहुबली’ को पर्दे पर उतारा है वैसी भारतीय सिनेमा में पहले नहीं देखी गयी.

 

इस फैंटेसी एक्शन फिल्म में कथानक और स्क्रिप्ट में ख़ामियों के बावजूद ज़बरदस्त स्पेशल इफ़ेक्टस और ख़ासतौर पर युद्ध के दृश्यों का फिल्मांकन करिश्माई है. कई साल पहले ग्लैडिएटर और 300 जैसी फिल्मों की भव्यता देखकर-देखकर हमें अचरज होता था, मगर तीन साल तक बाहुबली के निर्माण में जुटे रहे एसएस राजमौली ने तकनीकी स्तर पर भारतीय सिनेमा को एक नई ऊंचाई दी है.

 

कहानी एक हज़ारों साल पहले के काल्पनिक जगह माहेष्मती की है. यहां की राजमाता (रम्या कृष्नन) को फैसला करना है कि सिंहासन दो भाइयों में से किसको दें. अमरेंद्र बाहुबली (प्रभास) राज्य के लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है जबकि दूसरा भाई भल्लाल (राना डगुबत्ती) है. लेकिन साज़िशों के चलते क्रूर राजा भल्लाल का राज होता है. बहुबली मारा जाता है मगर उसके बेटे शिव को राजमाता एक दूसरे गांव तक छोड़ आती है जहां एक दूसरी मां उसे पालती है.

 

 

शिव यहीं बड़ा होता है मगर सालों बाद क़िस्मत उसे एक बार फिर माहेष्मती ले आती है जहां उसे अपने पिता की मौत का बदला लेकर अपना सिंहासन वापस हासिल करना है.

 

ये कहानी सरल है, घिसी-पिटी है, अगले सीन का अंदाजा पहले से ही हो जाता है, लेकिन जब वही सीन एक अनोखे, भव्य अंदाज़ में पर्दे पर आता है तो कई बार आप ‘वाह-वाह!’ कह उठते हैं. राजामौली इससे पहले मगाधीरा और ईगा (हिंदी में ‘मक्खी’ के नाम से डब) जैसी फिल्मों में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं.

 

उनकी फिल्मों में सरल से सरल सीन पर जिस तरह जान फूंकी जाती है, वो उसे ख़ास बना देता है. बाहुबली में युद्ध के दृश्यों का फिल्मांकन अद्भुत है. ये सीन आपको भारत में बन रही कई और फिल्मों की तरह सस्ते या भद्दे नहीं लगते. सिनेमैटोग्राफ़र के.के सेंथिल कुमार की मेहनत फिल्म के हर फ्रेम में झलकती है. तकनीकी रूप से फिल्म का स्तर बहुत ऊंचा है.

 

अगर आप फिल्म को हिंदी (डब) में देख रहे हैं तो कई सीन में डायलॉग आपको कमोज़र लग सकते हैं. कई जगह इस्तेमाल हुई बोली, फिल्म के किरदारों और समय पर सही नहीं बैठती. मगर फिर भी ऐसी भव्य़ फिल्म अपनी भाषा में देखने को मिल रही है ये काफ़ी है.

 

प्रभास और राना डगुबत्ती बहुत अच्छे लगे हैं. सत्यराज को कटप्पा ग़ुलाम का मज़बूत रोल मिला है और वो बहुत जमे हैं. फिल्म में अभिनेत्री अनुष्का शेट्टी का रोल ‘करण अर्जुन’ की राखी की याद दिलाता है. वो हर सीन में कहती हैं ‘मेरा बेटा आएगा’.  उनका रोल ज़्यादा नहीं है. और तमन्ना भाटिया अच्छी लगी हैं.

 

बाहुबली मेनस्ट्रीम सिनेमा के बाहुबल को सलाम है. ये वो फिल्म है जिसे पैसा वसूल कहा जाना चाहिए. इसे किसी नई कहानी या मेसेज के लिए नहीं सिर्फ एक अनोखे अनुभव और एस एस राजमौली की मेहनत के लिए देखा जाना चाहिए.

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