मूवी रिव्यू: सीधी-सादी लव स्टोरी बन कर जल्दबाज़ी में ख़त्म हो जाती 'दावत-ए-इश्क़'

By: | Last Updated: Saturday, 20 September 2014 8:58 AM
Movie Review: Daawate Ishq

रेटिंग:    **1/2 (ढ़ाई स्टार)

 

निर्देशक हबीब फ़ैज़ल की दावत-ए-इश्क़ का पूरा प्रोमोशन एक ‘फूड फिल्म’ यानि खाने पर आधारित फिल्म के तौर पर केन्द्रित था लेकिन कहानी में शायद अलग-अलग मसालों का अनुपात ठीक नहीं रहा. दहेज समस्या जैसे पॉज़िटिव सब्जेक्ट से शुरू हुई ये फिल्म बेहद धीमी रफ़्तार से आगे बढ़ती हुई पहले कॉन (ठगी) फिल्म बनती है और अंत में एक सीधी-सादी लव स्टोरी बन कर जल्दबाज़ी में ख़त्म हो जाती है. इस दावत का सबसे अहम स्वाद फीकापन है.

 

कहानी:

हैदराबाद की गुलरेज (परिणीति) एक दुकान में सेल्सगर्ल है लेकिन अमेरिका जाकर फैशन डिजायनिंग पढ़ने का सपना देखती है. उसके पिता (अनुपम खेर) जल्द से जल्द उसकी शादी करना चाहते हैं लेकिन दहेज कम होने की वजह से कई लड़के गुलरेज़ को ठुकरा चुके हैं. थक-हारकर बाप-बेटी प्लान बनाते हैं कि वो किसी दूसरे शहर जाएंगे और किसी अमीर लड़के के परिवार की दहेज की मांग को छुपे हुए कैमरे से रिकॉर्ड करेंगे. इसके बाद इस रिकॉर्डिंग के आधार पर दहेज कानून का फायदा उठाकर लड़के के परिवार से पैसे वसूलेंगे. भेस बदलकर दोनों लखनऊ पहुंचते हैं जहां उनकी मुलाक़ात एक मशहूर रेस्टोरेंट के मालिक तारिक (आदित्य रॉय कपूर) से होती है. तारिक को गुलरेज़ से प्यार हो जाता है. लेकिन गुलरेज़ अपने प्लान के मुताबिक उससे 80 लाख रुपए लेकर वापस हैदराबाद चली जाती है. मगर वापस आकर भी वो तारिक को भूल नहीं पाती और फिर आख़िर में सब कुछ ठीक हो जाता है और दोनों मिल जाते हैं.

 

फिल्म का सब्जेक्ट नया है और इसमें बहुत मनोरंजन की गुंजाइश भी थी लेकिन फिल्म में कहानी बेहद सुस्त गति से आगे बढ़ती है. अनुपम खेर ने अपने अंदाज़ की कॉमेडी करने की कोशिश की है लेकिन ज़्य़ादातर सीन हल्के लगते हैं. परिणीति अपने जाने-पहचाने अंदाज़ में हैं और यही लगता है जैसे वो ऐसे रोल्स में टाइप्ड हो चुकी है. आदित्य रॉय कपूर का किरदार कमज़ोर लिखा गया है लेकिन वो बहुत जंचे हैं.

 

फिल्म की परेशानी ये है कि पूरी तरह समझ नहीं आती कि ये दहेज समस्या के बारे में है, कॉन फिल्म है, फूड फिल्म या लव स्टोरी. परिणीति-आदित्य की लव स्टोरी ठीक तरह से उभरती नहीं. फिल्म के दूसरे भाग में घटनाएं तेज़ी से घटती है लेकिन फिर अंत तक आते आते बड़े सीधे-सादे ढंग से फिल्म सिमट जाती है.

 

मूवी रिव्यू: सोनम और फवाद की केमिस्ट्री के लिए देखें ‘खूबसूरत’

 

निर्देशक हबीब फैज़ल ने दो दूनी चार जैसी बढ़िया फिल्म बनाई थी, इसके बाद इशकज़ादे में भी कुछ सीन काफ़ी अच्छे थे, उनकी लिखी हुई बैंड बाजा बारात तो बहुत मनोरंजक भी थी. दावत-ए-इश्क़ के साथ उन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी स्टाइल की फिल्म बनाने की कोशिश की है लेकिन ये फिल्म औसत से ऊपर नहीं उठ पाई है.

 

दावत-ए-इश्क़ एक साफसुथरी फिल्म है जिसे पूरे परिवार के साथ बैठ कर देख सकते हैं. काश इस अच्छे सब्जेक्ट के साथ, स्क्रिप्ट में थोड़ा सा नमक और रोमांस में थोड़ी सी मिठास ज़्यादा होती तो बात कुछ और होती.
 

(Follow Yasser Usman  on Twitter @yasser_aks, You can also send him your feedback at yasseru@abpnews.in

Bollywood News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Movie Review: Daawate Ishq
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017