मूवी रिव्यू: ...बस एक और फिल्म है 'हैप्पी एंडिंग'

By: | Last Updated: Friday, 21 November 2014 7:09 AM
Movie Review: Happy Ending

रेटिंग: ** (दो स्टार)

 

हमेशा की तरह बगैर स्क्रिप्ट की एक और फिल्म: डरिए मत, फिल्म स्क्रिप्ट पर ही बनी है. बगैर स्क्रिप्ट की इसलिए लिखा क्योंकि ऐसी ही स्क्रिप्ट का इस्तेमाल पता नहीं कितनी फिल्मों में हो चुका है.

 

दरअसल फिल्म में यूडी जेटली (सैफ़ अली खान) राइटर बने हैं. वो अरमान (गोविंदा) के लिए स्क्रिप्ट लिखते हैं. फिल्म में यूडी ने तो अरमान के लिए जैसे-तैसे स्क्रिप्ट लिख दी है. लेकिन फिल्म के स्क्रिप्ट राइटर वास्तविकता में इस फिल्म के लिए ऐसा नहीं कर पाए. ज्यादातर फिल्मों की तरह ही इस फिल्म की स्क्रिप्ट भी बस कट-कॉपी-पेस्ट है.

 

सैफ का एक और कॉकटेल: अगर आपने ‘हम-तुम’, ‘सलाम-नमस्ते’, ‘लव- आजकल’ और ‘कॉकटेल’ जैसी सैफ की फिल्में देखी हैं और अगर इनमें से किसी फिल्म को लेकर आपके मन में अच्छी यादें हैं या इनमें से कोई आपकी फेवरेट है तो प्लीज आप ‘हैप्पी एंडिंग’ मत देखिएगा. क्योंकि हैप्पी एंडिंग उन अच्छी यादों में कड़वाहट घोलने का काम कर सकती है.

 

सैफ की पिछली फिल्मों और इस फिल्म में समानता की एक पराकाष्ठा देखिए. सैफ अली खान फिल्म ‘हम-तुम’ के क्लाइमेक्स में रानी मुखर्जी को मनाने भारत जाते हैं और रानी मान जाती हैं. ‘लव-आजकल’ में भी दीपिका को मनाने भारत जाते हैं और दीपिका मान जाती हैं. ‘कॉकटेल’ में सैफ, डायना पेंटी को मनाने भारत जाते हैं और वो भी मान जाती हैं. खुशी की बात ये है कि जब ये फिल्म थोड़ी देर निकल जाएगी तो आपको पता होगा कि इसमें वे इलियाना को भी मनाने भारत जाएंगे और परंपरा के अनुसार इलियाना को भी मानना ही पड़ेगा, कोई चारा नहीं है.

 

रणवीर शौरी जो कि एक दिग्गज कलाकार हैं, अपनी पहले निभाई गई भूमिका में बंधकर रह गए हैं जो उन्होंने 2006 में आई ऐसी ही एक फिल्म ‘प्यार के साइड इफेक्ट्स’ में की थी. अगर आप उन्हें राहुल बोस के साथ उस फिल्म में देखेंगे तो आपको लगेगा की हैप्पी एंडिग तो 2006 में ही बनाई जा चुकी है, एक बार और क्यों?! इस क्यों का जवाब आप गोविंदा को डॉयलॉग्स में ढ़ूंढ़ सकते हैं.

 

गोविंदा ने फिल्म में एक डॉयलॉग बोला है ‘300 रुपए में लोगों की जिंदगी मत बदलो.’ उनके कहने का मतलब है कि जब लोग 300 रुपए खर्च करके सिनेमा देखने आते हैं तो उनका मन मनोरंजन ढूंढ़ रहा होता है ना कि नयापन. ऐसे मनोरंजन को गोविंदा, फिल्म में ‘किक-ऐस’ नाम देते हैं. 300 के खर्च करने के बाद भी फिल्म में आपको किक तो बिल्कुल नहीं मिलेगी. हां, आप ‘ASS’ बन कर बाहर निकलेंगे. वहीं फिल्म के कई डॉयलाग इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भारतीय दर्शक मंद-बुद्धी हैं जिन्हें बहुत महत्व दिए जाने की जरूरत नहीं.

 

गोवा में 45वें अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव की शुरूआत हो गई है. ऐसे महोत्सवों में लोग सिनेमा में बदलाव जैसे विषयों पर बहस करते हैं. वहीं फिल्म ‘हैप्पी एंडिंग’ के डॉयरेक्टर राज और डीके के बारे में इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार ये नए डॉयरेक्टर सिनेमा में बदलाव लाने आए हैं. अगर आधा दर्जन बार एक ही हीरो को एक ही जैसी कहानी में लेकर बनाई गई फिल्म को एक बार और बनाना बदलाब है तो बदलाव की परिभाषा पर बहस होनी चाहिए.

कल्कि की एक्टिंग इलियाना (जो की लीड हैं) से बेहतर है. वहीं फिल्म में दो सरप्राइज फैक्टर्स भी हैं, जो हम आपको नहीं बताएंगे. स्क्रीनप्ले में कहीं भी वो वाला प्यार नहीं दिखाता जो ‘हम-तुम’ या ‘लव-आजकल’ में दिखता है, जिसे देखकर आपका अपना दिल मचल उठता है और लगता है कि अब बस हीरो-हीरोइन को मिल जाना चाहिए. म्यूज़िक तो आप सुन चुके हैं. गोविंदा आज भी अच्छा डांस और अच्छी एक्टिंग करते हैं.

 

रिव्यू में कहानी इसलिए नहीं बताई गई क्योंकि आप उन्हें सैफ की कई फिल्मों में देख चुके हैं और बाकी फिल्म इसलिए देख सकते हैं क्योंकि इसे बनाने में बड़ी मेहनत लगती है (कहानी लिखने में नहीं लगती) और कई बार फिल्म देखने के अलावा हमारे पास कोई और विकल्प नहीं होता. बाकी आपकी मर्जी!

 

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Web Title: Movie Review: Happy Ending
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