मूवी रिव्यू: दर्शकों को ठगने आया राजा नटवरलाल

By: | Last Updated: Saturday, 30 August 2014 10:03 AM
movie review raja natwarlal


फिल्म
:          राजा नटवरलाल

रेटिंग:           ** (2  स्टार)

समीक्षक:       यासिर उस्मान

नाम के मुताबिक राजा नटवरलाल Con या ठगी पर आधारित फिल्म है. फिल्म के हीरो इमरान हाशमी इसमें डायलॉग बोलते हैं कि ठगी के खेल में सबसे दस क़दम आगे रहना होता है ताकि कोई आपकी चाल समझ ना सके. लेकिन परेशानी ये है कि इस डायलॉग के बावजूद फिल्म देख रहे दर्शक पहले ही सारी चालें समझ जाते हैं. इस फिल्मी नटवरलाल का कोई प्लान रोमांच पैदा नहीं करता. सब कुछ बच्चों का खेल लगता है.

 

कहानी:

राजा (इमरान हाशमी) एक छोटा-मोटा ठग है जो राघव (दीपक तिजोरी) के साथ मिलकर ठगी को अंजाम देता है. अंजाने में एक दिन दोनों साउथ अफ्रीका से धंधा चला रहे बिज़नेसमैन वर्दा यादव (के के मेनन) के 80 लाख रुपए चोरी कर लेते हैं. जवाब में वर्दा राघव की हत्या करवा देता है. राजा किसी तरह बचकर भागता है और सीधा ठग गुरू योगी (परेश रावल) से मदद मांगने पहुंच जाता है. वर्दा की कमज़ोरी है क्रिकेट और वो ख़ुद एक क्रिकेट टीम का मालिक बनना चाहता है. गुरू योगी के साथ मिलकर राजा उसे 100 करोड़ रुपए में एक टीम बेचने का प्लान बनाता है. ठगी का प्लान तो लाजवाब है लेकिन रास्ते में कई मुसीबतें हैं. अंत में राजा अपना बदला लेता है और वर्दा को कंगाल बना देता है.

राजा नटवरलाल का सब्जेक्ट काफ़ी दिलचस्प था और इसमें बेहद दिलचस्प फिल्म बननी चाहिए थी लेकिन यहां सब कुछ बेहद सुस्त रफ़्तार से होता है. सबसे बड़ी बात ये है कि फिल्म में कभी भी ये नहीं लगता कि राजा और योगी का ठगी का प्लान कमाल का है. जब दर्शकों को ही उनके प्लान में गड़बड़ नज़र आ जाती है तो ये हज़म करना मुश्किल होता है कि खलनायक कैसे इतनी आसानी से उनके झांसे में आ गया. फिल्म देखते हुए आपको दिबाकर बनर्जी की बढ़िया फिल्म खोसला का घोसला की याद भी आएगी. उस फिल्म में Con के सब्जेक्ट का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया था. यहां निर्देशक कुणाल देशमुख चूक गए हैं और बेहद साधारण फिल्म बनाई है.

 

फिल्म में इमरान हाशमी ने ठीकठाक काम किया है लेकिन कई सीन्स में वो कन्फ़्यूज़ नज़र आते हैं. परेश रावल को सबसे मज़बूत रोल मिला है लेकिन उन्हें ऐसे सीन कम मिले हैं जिसमें वो कुछ करके दिखा सकें. यही हाल के के मेनन का है जिनका किरदार उभर कर नहीं आ पाता. अभिनेत्री हुमैमा मलिक बहुत खूबसूरत लगी हैं लेकिन ओवर एक्टिंग की शिकार हैं.

इमेज के मुताबिक फिल्म में इमरान हाशमी के किसिंग सीन डाले गए हैं. इमरान की ज़्यादातर फिल्मों का संगीत अच्छा होता है लेकिन राजा नटवरलाल का एक भी गीत ऐसा नहीं है जो आपको याद रह सके. हर गीत ठूंसा हुआ लगता है.

 

फिल्म बंटी और बबली हो, ओए लकी लकी ओए हो या ठगी पर आधारित मसाला फिल्म स्पेशल 26, ज़्यादातर कॉन फिल्मों में भरपूर एंटरटेंनमेंट और रोमांच होता है. राजा नटवरलाल की फिल्मी ठगी का अंदाज़ शायद दर्शकों को पसंद ना आए. लेकिन फिर भी टिकट खरीद कर इस फिल्म को देखने वाले दर्शक ठगे तो जाएंगे ही. 

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Web Title: movie review raja natwarlal
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