मूवी रिव्यू: बोझिल कॉमेडी और खराब एक्शन वाली बोरिंग फिल्म है 'सिंह इज ब्लिंग'

By: | Last Updated: Saturday, 3 October 2015 12:26 PM
Movie Review Singh is Bliing

रेटिंग:    **  (दो स्टार)

 

नई दिल्ली: ‘सिंह इज ब्लिंग’ फिल्म में ना कॉमेडी है, ना एक्शन हैं, ना रोमांस है और ना ही इंटरटेनमेंट है. फिल्म में ऐसी हल्की कॉमेडी दिखाई गई है कि कुछ-कुछ देर के बाद आपको थोड़ी सी हंसी आ जाएगी. फिल्म का पहला भाग तो फिर आप फिर भी इस उम्मीद में झेल लेंगे कि शायद आगे कुछ बेहतर दिखे लेकिन सेकेंड हाफ में फिल्म इतनी बोझिल है कि बैठना मुश्किल हो जाता है.

 

बता दें कि ‘राउडी राठौर’ में प्रभुदेवा और अक्षय कुमार साथ काम कर चुके हैं. ‘राउठी राठौर’ रीमेक थी इसलिए उसमें इंटरटेनमेंट था, एक्शन भी था और गाने भी ऐसे थे जिसे देखा जा सके और इन्जॉय किया जा सके. इस फिल्म की सबसे बड़ी खामी ये है कि इसे जबरदस्ती ढ़ाई घंटे तक खींच दिया गया है. आखिर के आधे घंटे तो सीट पर बैठना मुश्किल हो जाता है. फिल्म में जो भी होने वाला है वह आप पहले से ही समझ जाते हैं. कुछ नया नहीं होता है.

 

एक नयापन है जो प्रभुदेवा ने फिल्म की लीड एक्ट्रेस एमी जैक्सन के साथ किया है. एमी को इस फिल्म में एक बहुत मजबूत लड़की की तरह पेश किया है जो कि कई गुंडो के साथ लड़ सकती हैं, मार सकती है और उन्हें भागने पर मजबूर कर सकती है. यह ऐसी लड़की है जिसे रात में बाहर जाने के लिए किसी बॉडीगार्ड या किसी और की जरूरत नहीं है वह खुद की सुरक्षा कर सकती है और साथ जाने वालों की भी. यही इस फिल्म का प्लस प्वाइंट है. एमी जैक्सन फिल्म में खूबसूरत लगी हैं, फिट लगी हैं लेकिन एक जगह जहां एमी मार खा गई हैं वो है एक्टिंग. खूबसूरत दिखने में और एक्टिंग करने में बहुत फर्क है. फिल्म के एक सीन में एमी फफक-फफक कर रोती है फिर भी दर्शकों को कुछ फर्क नहीं पड़ता. एक ऐसी लड़की जिसका बाप डॉन है, मां बचपन में ही छोड़कर चली गई होती है, एक गुंडा इस लड़की को मारना चाहता है, बार-बार उस पर अटैक होते हैं. फिल्म में एमी के किरदार के साथ दर्शकों की सहानुभूति हो इसके लिए स्क्रिप्ट राइटर ने बहुत मेहनत की है लेकिन एमी के खराब अभिनय की वजह से दर्शक उन्हें खुद से नहीं जोड़ पाता. एमी के एक्शन सीन शानदार हैं लेकिन कभी-कभी वो भी ज्यादा लगने लगता है.

 

बॉलीवुड में महिला प्रधान बहुत सारी फिल्में बनी हैं. यह फिल्म महिला प्रधान तो नहीं है बावजूद इसके नायिका को भरपूर जगह मिली है. गानों से लेकर एक्शन तक अक्षय कुमार की तुलना में एमी के पास करने के लिए बहुत कुछ था. अगर एमी के चेहरे पर थोड़ा बहुत भी इमोशन होता और एक्टिंग कर पातीं तो शायद यह बॉलीवुड में खुद को स्थापित करने के लिए उनके पास शानदार मौका था. फिल्म में एमी को रोमानियां की एक अंग्रेजी भाषी लड़की के रूप में पेश किया जाता है जो पूरी फिल्म में सिर्फ इंग्लिश बोलती हैं. एमी के इंग्लिश बोलने की वजह से फिल्म में हिंदी सब-टाइटल्स लगाए गए हैं. लेकिन जब बात बॉलीवुड फिल्म की हो तो दर्शक तो हिंदी की अपेक्षा करेंगे. फिल्म में अगर लीड हिरोइन ना हिंदी बोल पाए और ना ही एक्टिंग कर पाए तो यह फिल्म कितनी बोझिल हो जाएगी इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं.

 

कहानी

रफ्तार सिंह (अक्षय कुमार) पंजाब का रहने वाला एक ऐसा लड़का है जो जिंदगी में कोई भी काम नहीं कर पाता है, जो करता है वह भी अधूरा ही छोड़ देता है. उसके पापा हमेशा उससे नाराज रहते हैं और डांटते-डपटते हैं. रफ्तार सिंह चिड़ियाघर में नौकरी करने जाता है लेकिन वहां से भी निकाल दिया जाता है. फिल्म के ट्रेलर में शेर को जितना दिखाया गया है उससे भी कम आपको फिल्म में देखने को मिलेगा. शेर कब आता है और कब चला जाता है पता ही नहीं चलता. इसके बाद रफ्तार गोवा कैसिनो में काम करने जाता है जहां पर उसे सारा (ऐमी जैक्सन) की देखभाल का जिम्मा दिया जाता है. सारा यहां पर अपनी मां को ढ़ूढ़ने के लिए आई होती है. सारा को हिंदी नहीं आती और रफ्तार को अंग्रेजी समझ नहीं आती इसलिए ट्रांसलेटर एमिली की भूमिका में लारा दत्ता की एंट्री होती है. फिल्म में के के मेनन डॉन मार्क के किरदार में हैं जो सारा को पाने के लिए अपने बाप का कत्ल कर देता है. अब यहां पर मार्क सारा के पीछे, रफ्तार सारा की अंग्रेजी समझने के पीछे और लारा इन दोनों को हिंदी-अंग्रेजी समझाने के पीछे…सेकेंड हाफ में तो यही देखने के लिए बचता है. क्या सारा अपनी मां को ढ़ूढ़ पाती है? हिंदी और अंग्रेजी में उलझे रफ्तार और सारा के बीच प्यार का इजहार हो पाता है? रफ्तार जिसने कभी किसी चीटीं को भी नहीं मारा सारा के लिए मार्क के बहुत सारे गुंडो का सामना कर पाता है या फिर भाग जाता है? यही फिल्म की पूरी कहानी है.

 

अभिनय

रफ्तार सिंह की भूमिका में अक्षय कुमार को जितना करने के लिए दिया गया है उन्होंने अच्छा किया है लेकिन अब अक्षय कुमार को ऐसी भूमिकाओं से दूर रहना चाहिए. ‘स्पेशल 26’ जैसी बेहतरीन फिल्म देने वाले अक्षय कुमार से दर्शक अब सिर्फ नाच गाने के अलावा भी कुछ नया और बेहतर देखना चाहते हैं.

फिल्म में रति अग्निहोत्री रफ्तार सिंह की मां की भूमिका में जमी हैं वहीं पापा की भूमिका में योगराज सिंह ने भी अच्छा काम किया है. लारा दत्ता की उम्र इस फिल्म में झलकती है लेकिन अभिनय के मामले में एमी से काफी शानदार किया है. के के मेनन का तो जवाब नहीं. फिल्म में मेनन का एक डायलॉग आपको पसंद आएगा वो है ‘आई एम टु गुड.’ मेनन ने फिल्म में जान डाल दी है. जब अक्षय और एमी आपको बोर कर रहे होते हैं उस समय लारा और मेनन फिल्म को संभालते हैं.

 

संगीत

अब म्यूजिक की बात करें तो भले ही म्यूजिक चार्ट में गाने खूब चल रहे हों लेकिन फिल्म देखने के समय ये गाने आपको बहुत इरिटेट करेंगे. ‘टुंग टुंग बजे’, ‘दिल करे चू चे’, ‘मैं हूं सिंह, तू है कौर’ सिनेमा देखे मम्मा, और माही आजा सहित कुल पांच गाने हैं. माही आजा के अलावा कोई भी गाना ऐसा नहीं है जिसे आप गुनगुनाते हुए सिनेमाहॉल से बाहर निकल सकें.

 

अगर आप बेवजह फिल्में देखते हैं तो यह फिल्म देख सकते हैं. लेकिन इस वीकेंड अगर आप कुछ शानदार देखना चाहते हैं इरफान खान और कोंकणा सेन की फिल्म तलवार देखिए. इस फिल्म के क्रिटिक्स ने बहुत ही शानदार बताया है वहीं इसे अच्छी रेटिंग भी मिली है. नोएडा के चर्चित आरुषि-हेमराज डबल मर्डर पर आधारित ‘तलवार’ एक ज़बरदस्त रिसर्च वाली बेहतरीन फिल्म है. यह डॉक्यूमेंट्री थ्रिलर ना सिर्फ आपको पूरी तरह बांध लेती है, बल्कि परेशान करती है और सोचने पर मजबूर भी.

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