मूवी रिव्यू: कमज़ोर कनेक्शन वाली फिल्म है 'सोनाली केबल'

By: | Last Updated: Friday, 17 October 2014 7:34 AM
Movie review: Sonali Cable

रेटिंग: दो स्टार

 

किसी हिंदी फिल्म के लिए ‘सोनाली केबिल’ नाम वाक़ई ‘हटके’ है लेकिन अफ़सोस, अनोखे स्टोरी आयडिया के बावजूद फिल्म बहुत कमज़ोर है. फिल्म का विषय तो पुराना है कि किस तरह समंदर में बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है लेकिन यहां इसकी पृष्ठभूमि इंडरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स की दुनिया है.

 

कहानी-

शुरुआत दिलचस्प है लेकिन फिर फिल्म भटक जाती है और बस यही इंतज़ार रहता है कि कब ये फिल्म ख़त्म होगी. सोनाली दत्ताराम तांडे (रिया चक्रवर्ती) केबल के ज़रिए इंटरनेट देने का काम करती है. इस काम में उसकी मदद मोहल्ले को दो लड़के करते हैं. पूरे इलाके में मशहूर है कि सोनाली का इंटरनेट कभी बंद नहीं होता. परेशानी तब शुरू होती है जब शायनिंग नाम की एक बहुत बड़ी कंपनी इस धंधे में क़दम रखती है. इस कंपनी का मालिक है नारायन सिंग वाघेला (अनुपम खेर). वाघेला की कंपनी मुंबई के सारी छोटी-मोटी ब्रॉडबैंड कंपनियों के क़दम उखाड़ देती है. लेकिन सोनाली को ये मंज़ूर नहीं है. वो इस कंपनी से भिड़ जाती है लेकिन पता चलता है कि इस बड़ी कंपनी के साथ पूरा सिस्टम है और सोनाली अकेली. ज़ाहिर है अंत में जीत सोनाली की ही होती है.  

 

सोनाली की सबसे बड़ी कमज़ोरी सोनाली का रोल निभा रही अभिनेत्री रिय़ा चक्रवर्ती हैं. पूरी फिल्म उनके किरदार पर केंद्रित है लेकिन उनका अभिनय बेहद लाउड और बचकाना है. फिल्म के गंभीर सीन में भी उनका अभिनय बहुत हल्का नज़र आता है. अली फ़जल और राघव जाल ने फिल्म को संभालने की कोशिश की है लेकिन उनके रोल बहुत कमोज़र लिखे गए हैं. विलेन के रोल में अनुपम खेर के सीन अच्छे हैं लेकिन उनका किरदार भी कन्फ़्यूज़ नज़र आता है. कभी वो कॉमेडी करने की कोशिश करते हैं तो कभी बेहद खतरनाक विलेन बनने की. सोनाली के पिता कि भूमिका में स्वानंद किरकिरे छोटे से रोल में बहुत अच्छा अभिनय कर गए हैं.

 

निर्देशक चारुदत्त आचार्य की इस स्क्रिप्ट को एक स्क्रिप्ट लैब में कई स्क्रिप्ट्स के मुकाबले में चुना गया था. इसका निर्माण रमेश सिप्पी के प्रतिष्ठित बैनर ने किया है. काग़ज़ पर शायद ये कहानी मज़बूत भी लगती होगी, लेकिन निर्देशक उस कहानी को सशक्त तरीके से पर्दे पर उतारने में चूक गए हैं. 2 घंटे से ज़्यादा लंबी ये फिल्म कई जगह बेहद बोझिल है. ये बिलकुल ऐसी फिल्म नहीं बन पाई है जिसे आप टिकट खरीदकर थिएटर में बैठकर देखना चाहेंगे. फिल्म में सोनाली केबिल का कनेक्शन भले ही बंद नहीं होता, मगर दर्शकों के साथ ये फिल्म कोई कनेक्शन नहीं बना पाती.

 

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Web Title: Movie review: Sonali Cable
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