पद्म पुरस्कारों के हीरक जयंती वर्ष में जरा याद इन्हें भी कर लो

By: | Last Updated: Thursday, 25 December 2014 8:50 AM
padma awards

आखिरकार ऋषि को सफाई देनी ही पड़ी कि आलिया और सोनाक्षी उनके बच्चों की तरह हैं. लोगों को अपना सेंस ऑफ ह्यूमर सुधारना चाहिए. हालांकि लोगों की प्रतिक्रियाओं से आजिज होकर ऋषि ने वह जोक वाला पोस्ट डिलीट ही कर दिया.

नई दिल्ली: पद्म श्री, पद्म् भूषण और पद्म् विभूषण देश के ऐसे शिखर सम्मान हैं, जिन्हें पाने की लालसा बड़े-बड़े रखते हैं. इन सम्मान को पाने के बाद उस व्यक्ति का रुतबा तो बढ़ता ही है साथ ही उस व्यक्ति की योग्यता और उपलब्धियों पर सरकार की मुहर भी लग जाती है. इसलिए नया साल लगने पर जब इन पद्म पुरस्कारों की घोषणा होती है तो सभी का ध्यान इस ओर जाता कि इस बार सरकार ने किस किस को इन पुरस्कारों से सम्मानित किया. लेकिन कई बार इस तरह के नाम भी इन सम्मानों की सूची में मिल जाते हैं जिनकी उपलब्धियां कुछ ख़ास नहीं होती और कुछ ऐसे नाम हर बार छुट जाते हैं, जिन्हें यह सम्मान काफी पहले मिल जाना चाहिये था.

 

संयोग से पद्म पुरस्कारों का यह 60वाँ यानी हीरक जयंती वर्ष है. हाल ही में एक पुरानी सांस्कृतिक संस्था ‘आधारशिला’ ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर उनका ध्यान इस ओर दिलाया तो यह जान बेहद आश्चर्य हुआ कि फिल्म और कला की दुनिया के कई बड़े-बड़े कलाकारों को भी बरसों बाद कोई पद्म सम्मान नहीं मिला. इनमें दारा सिंह, शम्मी कपूर, सम्राट शंकर, जीतेंद्र और ऋषि कपूर जैसे नाम भी शामिल हैं. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना को भी उनके जीते जी कोई पद्म सम्मान नहीं मिला. उन्हें मरणोपरांत पिछले साल पद्म भूषण दिया गया.

 

कला, साहित्य, पत्रकारिता, खेल, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान और समाज सेवा आदि के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए भारत सरकार ने सन् 1954 में इन पद्म पुरस्कारों की शुरुआत की थी. सन 1954 से 2014 तक भारत सरकार कुल 4202 व्यक्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित कर चुकी है. इनमें 294 व्यक्तियों को पद्म विभूषण, 1229 व्यक्तियों को पद्म भूषण और 2679 व्यक्तियों को पद्मश्री पुरस्कारों से सम्मानित किया गया. इस सबके बावजूद  इन 60 सालों में बहुत से ऐसे कलाकार पद्म पुरस्कारों से गौरान्वित होने से रह गए हैं जिन्हें यह सम्मान बहुत पहले मिल जाना चाहिए था.

 

इनमें विश्वप्रसिद्द पहलवान और अभिनेता दारा सिंह और अपने अनूठे अंदाज के लोकप्रिय अभिनेता शम्मी कपूर को तो यह सम्मान पाए बिना ही इस दुनिया से विदा हो गए, जबकि अपनी जादुई कला के साथ समाज सेवा में भी अग्रणी जादूगर सम्राट शंकर, जाने माने वरिष्ठ अभिनेता जीतेंद्र और ऋषि कपूर अपनी 40 बरसों से भी अधिक की कला साधना के बावजूद देश के इस बड़े सम्मान से दूर हैं. इनसे कई जूनियर और कुछ साधारण कलाकारों को भी पद्म पुरस्कार मिल चुके हैं. उधर इस बात से तो और भी आश्चर्य होता है कि जादू जैसी प्राचीन कला से इतने सालों में सिर्फ एक ही जादूगर, पीसी सरकार को 1964 में पद्मश्री मिला और उसके 50 बरस बाद तक किसी और जादूगर को पद्म सम्मान नहीं दिया गया.

 

जादूगर शंकर सन 1974 से देश-विदेश में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं. वह अब तक करीब 25 हजार जादुई शो कर चुके हैं, जिनमें से उन्होंने अनेक शो सिर्फ धर्मार्थ कार्यों और समाज की सेवा में जुटे जरूरतमंद लोगों की सहायतार्थ किये. यहाँ तक कि जादूगर शंकर के जादू को अटल बिहारी वाजपेयी, नरेंद्र मोदी, राजीव गांधी, चन्द्र शेखर, ज्ञानी जैल सिंह, भैरों सिंह शेखावत, लाल कृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज सहित कई मुख्यमंत्री, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री तक देख चुके हैं.

ऐसे ही पहलवानी और शक्ति का पर्याय बन चुके और अपनी कुश्तियों में अपने समय के सभी पहलवानों को हराकर विश्व विजेता बन चुके रुस्तम-ए-हिन्द दारा सिंह तो सही मायने में भारत रत्न हैं. लेकिन सरकार ने उन्हें हमेशा भुलाया है. दारा सिंह ने 1952 से लेकर 2011 तक लगभग 215 फिल्मों में अभिनय और 7 फिल्मों का निर्देशन करके फिल्म संसार को भी अपना अपार योगदान दिया. उन्होंन ‘रामायण’ जैसे सीरियल में हनुमान बनकर टीवी की दुनिया में भी अपनी अमिट छवि बनाई.

 

उधर फिल्म जगत के सबसे बड़े परिवार, कपूर परिवार पर तो भारत सरकार काफी मेहरबान रही. पर पृथ्वीराज कपूर, राज कपूर और शशि कपूर तीनों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा गया. राज कपूर को तो दादा साहेब फाल्के भी मिला. लेकिन इस परिवार के दो अनुपम सितारे शम्मी कपूर और ऋषि कपूर को कोई भी पद्म सम्मान न मिलना खलता है. शम्मी कपूर का योगदान इसलिए भी अहम है कि उन्होंने भारतीय सिनेमा के नायक को परंपरागत छवि से निकालकर उसे मस्त मौला बनाया. सन 1953 से अपना फिल्म करियर शुरू करने वाले शम्मी कपूर ने 58 बरस फिल्मों में काम करके करीब 100 फिल्मों में यादगार भूमिका की.

 

साथ ही ऋषि कपूर को भी फिल्मों में काम करते हुए 40 बरस से भी ज्यादा हो गए हैं. सन् 1973 में फिल्म ‘बॉबी’ से सफर शुरु करने वाले ऋषि अब तक 125 फिल्मों में काम कर चुके हैं. ऋषि कपूर ने एक से एक यादगार भूमिका निभाई है. इनके अलावा जीतेंद्र जैसे वरिष्ठ फिल्म अभिनेता जो अब 72 साल के हो गए हैं और 1959 से अब तक करीब 175 फिल्मों में काम कर चुके हैं. बालाजी टेलेफिल्म्स के माध्यम से भारतीय टेलीविजन की दुनिया में नई क्रांति का श्रेय भी उन्हें ही जाता है. लेकिन जीतेंद्र को भी अभी तक कोई भी पद्म पुरस्कार नहीं मिला है.

 

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