ब्लॉग: जनता को ‘हलाल’ कर रही है मोदी सरकार!

By: | Last Updated: Wednesday, 17 June 2015 3:14 PM
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आज से करीब 1 साल और 23 दिन पहले यानी 26 मई 2014 को जब नरेंद्र मोदी ने पीएम पद की शपथ ली थी तो उनको वोट देने वालों से लेकर ना देने वालों तक सभी ने एक आस लगाई थी कि शायद जिस मंहगाई की मार उन्हें पिछले 10 सालों से खानी पड़ रही है अब उसके दर्शन ना हो और हुआ भी कुछ ऐसा ही आसमान छूते पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई भारी गिरावट से लोगों में उम्मीद की एक किरण तो जाग ही गई थी कि अब शायद अच्छे दिन आने वाले हैं!

‘बहुत हुई देश में महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार’ जैसे नारे लगाकर लोगों के दिलों में या यूं कहे कि वोटों पर अपनी पैठ बनाने वाली मोदी सरकार ने एक समय (फरवरी, 2015) तो दिल्ली में पेट्रोल करीब 56 रुपए और डीजल को करीब 46 रुपए तक कर दिया था जोकि 26 मई 2014 को इससे कहीं अधिक थी.

 

याद रहे कि मोदी सरकार के शपथ ग्रहण के दिन जहां पेट्रोल की कीमत 71.41 रुपए थी वहीं डीजल की कीमत 56.71 रुपए प्रति लीटर थी हालांकि उन दिनों कच्चे तेल की कीमत भी 108.05 डॉलर प्रति बैरल थी जो फरवरी (45 डॉलर प्रति बैरल) की तुलना में आज के दिनों से काफी अधिक थी.

 

फरवरी 2015 में तेल कीमतों में हुई कमी के पीछे का मुख्य कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी होना था. चूंकि कच्चा तेल उन दिनों 45 डॉलर प्रति बैरल से नीचे उतरकर पांच साल से सबसे निचले स्तर पर आ गया था और इस कमी के साथ ही पेट्रोल और डीजल के दाम अगस्त 2014 से लेकर फरवरी 2015 तक लगातार कम होते गए.

अगस्त, 2014 से फरवरी 2015 तक जहां पेट्रोल की कीमतों में दस बार तो वहीं अक्तूबर, 2014 से फरवरी 2015 तक डीजल की कीमत में छह बार कटौती की गई. कुल मिलाकर, अगस्त से पेट्रोल के दाम 17.11 रुपये प्रति लीटर और अक्तूबर से डीजल के दाम 12.96 रुपये प्रति लीटर तक घटाए गए. हालांकि कीमतों में कटौती और अधिक हो सकती थी, लेकिन लगातार चार बार उत्पाद शुल्क बढ़ाए जाने की वजह से ऐसा नहीं हो सका. इसी दौरान पेट्रोल पर कुल उत्पाद शुल्क 7.75 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया.

 

उन दिनों भी लोगों को कच्चे तेल की कीमत के आधार पर पेट्रोल और डीजलों की कीमतों में की गई कमी भी नागवार गुजरी थी और विपक्ष से लेकर आम जनता ने भी इसका काफी विरोध किया था लेकिन इसके बावजूद कुछ लोगों ने ना से भला कुछ महंगाई कम होने पर मोदी सरकार का आभार व्यक्त किया था लेकिन फिर क्या था चार दिनों की चांदनी के बाद तो अंधेरी रात होनी ही थी. धीरे-धीरे मोदी सरकार भी यूपीए सरकार के पद चिन्हों पर चलने लगी या यूं कहें कि अपना रंग दिखाने लगी और फरवरी 2015 के बाद से मानो हर बार जनता की उम्मीदों पर वार किया जाने लगा और मोदी सरकार भी जनता के घाव पर महंगाई रुपी नमक को छिड़कने लगी.

 

ये तो सभी जानते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाली बढ़ोत्तरी एक साइकिल चलाने वाले की गृहस्थी भी चौपट कर देती है क्योंकि इन बढ़ोत्तरीयों के साथ ही रोजमर्रा की चीजें भी महंगी होती चली जाती है और आम आदमी की थाली में भोजन की मात्रा भी ठीक उसी प्रकार कम होती चली गई जिस प्रकार अजुरी में रोका हुआ पानी लागातार कम होता चला जाता है और एक समय उसकी हथेली में कुछ नहीं रह जाता है.

एक बार फिर पेट्रोल की कीमत में हुई बढ़ोत्तरी से जहां दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 67 रुपए हो गई है वहीं यह पिछले डेढ़ महीने में लगातार हुई तीसरी बढ़ोत्तरी भी है. बात यहां कीमतों के कम होने या अधिक होने की तो है ही पर उससे भी बड़ा मुद्दा यह है कि क्या यही हैं अच्छे दिन? क्या यही है मोदी सरकार का महंगाई पर वार? और क्या यही है जनता के भरोसे का सिला?

 

ऐसे समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सही मायने में अच्छे दिन आएंगे? और यदि आएंगे तो कब आएंगे और कैसे आएंगे, क्योंकि जिस हिसाब से मोदी सरकार की अब तक उपलब्धियां रही हैं अगर उन पर गौर फरमाएं तो सही मायनों में आम आदमी के अच्छे दिन तो कभी आए ही नहीं! आम आदमी को मिला तो सिर्फ ‘जुमला’ और उसके सिवा अगर कुछ मिला तो वो ना के बराबर ही रहा.

 

अब यह कहना शायद गलत नहीं होगा कि मोदी सरकार आम आदमी को हलाल कर रही हो क्योंकि जिस तरह से धीरे-धीरे महंगाई की साया अपना विकराल रुप धारण कर रही है उससे तो यही प्रतीत होता है कि अब वह दिन दूर नहीं जब पेट्रोल की कीमतें नई बुलंदियों को छुएंगी और यूपीए शासनकाल के रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी!

‘बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार’ ये वो चुनावी नारा है जिसने इस देश में इतिहास रचा था. ये वो चुनावी नारा है जिसके साथ ही बीजेपी चुनाव मैदान में पूरे दमखम के साथ उतरी थी. पीएम मोदी ने जनता को अच्छे दिनों का सपना दिखाया था कि वो अच्छे दिन जो कांग्रेस शासन से काफी बेहतर होंगे, जिसमें महंगाई कम होगी और किसी भी परिवार का बजट नहीं बिगड़ेगा लेकिन मोदी सरकार बने हुए एक साल से ज्यादा हो गए. महंगाई कम होने के बजाय एक बार फिर लगातार बढ़ती ही जा रही है.

 

चुनाव के दौरान बीजेपी और मोदी की लाइन थी कि ‘महंगाई को लगातार बढ़ाने वालों जनता माफ नहीं करेगी’ अब अगर महंगाई की मार यूं ही चलती रही तो वास्तव में ‘जनता माफ नहीं करेगी.’

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