REASONS: जानिए क्यों Must Watch फिल्म है 'मसान'

By: | Last Updated: Monday, 27 July 2015 5:53 AM

नई दिल्ली: ‘तु किसी रेल सी गुजरती है, मैं किसी पुल सा थरथराता हूं…’ मसान एक ऐसी फिल्म जिसे देखते हुए आपकी आत्मा भी किसी पुल सी थरथराहट महसूस करेगी. मझे हुए कलाकारों के बेहतरीन अभिनय ने फिल्म को वास्तविकता के करीब लाकर खड़ा कर दिया है. फिल्म काशी के हरिश्चंद घाट से लेकर इलाहाबाद के संगम तक की खूश्बू अपने आप में समेटे हुए है.

 

यहां आपके बताते हैं कि मसान एक मस्ट वॉच फिल्म क्यों है-

 

 

1. फिल्म देखते – देखते आप किसी न किसी किरदार से खुद को जोड़ लेंगे. जैसे आप अपने आप को किसी किरदार से जोड़ेंगे फिल्म का वो हिस्सा आप को झकझोर देगा. कम बजट में बनी ये एक शानदार फिल्म है. जिसमें बतौर निर्देशक नीरज घायवान ने बेहतरीन काम किया है. निर्देशक ने कलाकारों से उनका 100 फीसदी निकाल लिया है. फिल्म में हालांकि रिचा चड्ढा, संजय मिश्रा, विक्की कौशल, श्वेता त्रिपाठी लीड रोल में हैं. लेकिन इनके अलावा बाकी के किरदारों ने भी अपने अभिनय की छाप छोड़ी है.

2. रिचा चड्ढ़ा एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं लेकिन इस फिल्म में उन्हें अपने अभिनय को दिखाने का पूरा मौका भी मिला है. रिचा चड्ढा फिल्म की जान हैं. हालांकि फिल्म में विक्की कौशल का किरदार भी बेहद अहम है. विक्की कौशल ने आज कल के ब्यॉयफ्रेंड की एक ऐसी भूमिका अदा की है जिसे देखकर आप एक छोटे से शहर के लड़के और लड़कियों की हालत समझ सकते हैं. विक्की कौशल ने साबित कर दिया है कि वो भविष्य में एक बड़े कलाकार साबित होंगे.

 

3. हर बार की तरह संजय मिश्रा ने इस बार भी बेहतरीन अदाकारी की है. संजय मिश्रा ठेठ बनारसी अंदाज़ में नजर आते हैं. उनकी भाषा पर पकड़, अभिनय का अंदाज फिल्म में जान फूंकता है. वहीं श्वेता त्रिपाठी भी फिल्म में अच्छी लगीं हैं. उनकी मासूमियत भरी अदाकारी दर्शकों को अच्छी लगती है.

 

4. निर्देशक फिल्म में दो अलग – अलग कहानियां लेकर चलते हैं. बावजूद इसके निर्देशक नीरज घायवान ने दोनों कहानियों के साथ पूरा न्याय किया है.

 

5. फिल्म जीवन – मरण के साथ उस सार्वभौमिक सत्य का अहसास करती है जिसे हम अपनी जिंदगी में जीते हैं लेकिन उससे स्वीकार करने से बचते हैं. फिल्म का एक और अच्छा पक्ष इसका संगीत है. दुष्यंत कुमार की कविता तु किसी रेल सी गुजरती है, मैं किसी पुल सा थरथराता हूं …. पर ही आधारित वरुण ग्रोवर ने एक गीत लिखा है कि जो काफी अच्छा है…  इस गाने को अपनी आवाज दी है स्वानंद किरकिरे ने और म्यूजिक इंडियन ओसेन का है. जितना अच्छा ये गाना है उतनी ही अच्छी आवाज में स्वानंद किरकिरे ने इसे गाया है. हालांकि फिल्म का एक और गाना मन कस्तूरी रे भी है. पहले गाने की तरह ही ये गाना भी फिल्म शानदार है. इसमें भी इंडियन ओसेन ने ही म्यूजिक दिया है. जबकि अमित कली, राहुल राम और हिमांशू जोशी ने गाया है. आज कल की फिल्मों में जहां शोर ज्यादा होता है वहीं मसान फिल्म के ये दोनों गाने मन को सूकून देने वाले हैं.

6. कम बजट वाली इस फिल्म को निर्देशक ने रियल लोकेशन में ही शूट किया है. जिससे फिल्म की लागत तो कम आई ही है इसके साथ ही फिल्म के सीन वास्तविक लगते हैं. फिल्म में आपको कोई भी चीज बनावटी नजर नहीं आएगी. मुर्दाघाटों के सीन वास्तविक लगते हैं. अगर आप हिंदू धर्म में मरने के बाद होने वाले संस्कारों को जानते हैं या फिर आपने उन्हें करीब से देखा है तो फिल्म आपको झकझोर कर रख देगी. निर्देशक का विजुअलाइजेशन गजब है. बिना किसी शोर शराबे और आडंबर के निर्देशक ने अपने कैमरे से बेहतरीन चीजें कैद कराईं हैं…

 

7. हालांकि फिल्म में दो कहानियां हैं और दोनों आज के समाज के हिसाब से नई नहीं हैं. हमारे और आपके जीवन में ऐसी बहुत सी चीजें घटित होती हैं. बहुत सी ऐसी चीजें हम रोज सुनते हैं. लेकिन नीरज घायवान और वरुन ग्रोवर ने एक पुरानी कहानी को नए अंदाज में लिखा है. आखिर तक आते – आते उन्होंने दोनों कहानियों को संगम में ही मिला दिया है. जैसे गंगा और यमुना का संगम होता है…. सरस्वती वहां भी लुप्त थीं यहां सरस्वती आप खुद होंगे क्योंकि फिल्म खत्म होते – होते फिल्म की तीसरी कहानी आप होंगे.

 

8. मसान को सेंसर बोर्ड ने ए सर्टिफिकेट दिया है. इसकी वजह साफ है कि फिल्म में कुछ गंदे दृश्य भी हैं. गंदे का मतबल अश्लीलता बिल्कुल नहीं है. वो फिल्म की जरूरत है. फिल्म की कहानी का एक जरूरी हिस्सा है. आप फिल्म देखने के बाद ये बिल्कुल नहीं कहेंगे कि फिल्म गंदी है या अश्लील है. हां ये जरूर है कि इस फिल्म को आप अपने बच्चों के साथ नहीं देख पाएंगे या परिवार के साथ बैठकर नहीं देख पाएंगे.

9. हालांकि फिल्म की एक और शानदार बात इसके डायलॉग हैं. फिल्म के डायलॉग ऐसे हैं जो आपको कई दिनों तक याद रहेंगे. जो खीर नहीं खाया वो मनुष्य योनि में पैदा होने का पूर्णतः फायदा नहीं उठाया. जैसे शानदार डायलॉग हैं…

 

10. फिल्म के आखिर में एक डायलॉग है कि हमें संगम दो बार आना चाहिए. एक बार किसी के साथ और एक बार अकेले…. हम बहुत सी फिल्में देखते हैं… एक्शन, कॉमेडी, थ्रीलर… लेकिन मसान जैसी फिल्में साल में एक – दो बार ही बनती हैं. वक्त हो तो मसान जरूर देखिए!

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Web Title: REASONS: Why Masaan is a must watch film
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