मूवी रिव्यू: इंटरटेनमेंट के लिए सलमान खान की पिछली फिल्मों से बेहतर है 'किक'

By: | Last Updated: Saturday, 26 July 2014 8:21 AM
Salman khan movie review Kick

रेटिंग:    *** (तीन स्टार)
 

हिंदुस्तान में दो एक्टर है जिनकी फिल्में पिछले कुछ सालों में रिव्यू-प्रूफ़ या समीक्षा से परे हो चुकी हैं. पहले रजनी कांत और दूसरे सलमान ख़ान. सलमान के फैन्स का आलम ये हैं कि बॉडीगार्ड, दबंग या जय हो जैसी कमज़ोर फिल्में भी कामयाबी के रिकॉर्ड बनाती हैं. फिल्म किक से महान सिनेमा की उम्मीद शायद किसी को भी नहीं थी लेकिन एंटरटेनमेंट के मामले में ये सलमान की इन पिछली फिल्मों से काफ़ी बेहतर है. एक लाइन में कहा जाए तो किक की कहानी, फिल्मांकन और एक्शन सब कुछ यशराज बैनर की धूम सीरीज़ से मेल खाता है. ये सलमान की धूम है जिसमें उनके रहते हुए भी रणदीप हुडा और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अपनी छाप छोड़ जाते हैं.

 

कहानी:

किक की कहानी देवीलाल सिंह (सलमान) की है जो एक जीनियस है. उसे हर रोज़ अपनी ज़िंदगी में एक नया किक या रोमांच चाहिए. इसलिए वो अजीब-अजीब हरकतें करता है. अपनी किक की वजह से वो किसी नौकरी में भी टिक नहीं पाता. उसकी गर्लफ्रेंड शायना (जैकलीन) उससे शादी करने के लिए शर्त रखती है कि उसके पास पैसे और नौकरी होनी चाहिए. दोनों अलग हो जाते हैं. इसी बीच एक साल बीत जाता है और शायना की शादी एक पुलिस अफसर हिमांशु त्यागी (रणदीप हुडा) से तय हो जाती है. लेकिन हिमांशु एक खतरनाक चोर डेविल के पीछे है जो उसे चुनौती देकर कई बड़ी चोरियां कर चुका है. डेविल दरअसल और कोई नहीं सलमान ही है. फिर बाक़ी की पूरी फिल्म में चोर-पुलिस का खेल चलता रहता है. लेकिन सलमान देवीलाल से डंविल कैसे बना इसके पीछे एक कहानी है जिसका विलेन है शिव (नवाज़ुद्दीन).

 

अभिनय:

धूम सीरीज़ की छाप फिल्म के हर एक्शन सीन पर नज़र आती है. किक का सबसे अच्छी बात फिल्म की रफ़्तार है. फिल्म की ज़्यादातक शूटिंग पोलैंड में हुई है और एक्शन सीन काफ़ी अच्छे हैं. सलमान हर फिल्म की तरह यहां भी देवी या डेविल की बजाय सलमान ही लगता हैं. लेकिन इस फिल्म की ख़ासियत ये है कि उनके अलावा भी कलाकारों को फुटेज दी गई है. रणदीप हुडा का अच्छा-ख़ासा रोल है और वो सलमान के सामने कहीं कमोज़र नज़र नहीं आते. विलेन नवाज़ुद्दी के कुल 4-5 सीन हैं लेकिन वो अच्छे हैं. जैकलीन के लिए करने को कुछ खास नहीं है.

 

 

फिल्म एक दक्षिण भारतीय फिल्म की रीमेक हैं लेकिन सलमान की इमेज के हिसाब से कहानी में कई बदलाव किए गए हैं. ‘जय हो’ या ‘बॉडीगार्ड’ के डायलॉग में जहां फूहड़ कॉमेडी का सहारा लिया गया था, किक में डायलॉग अच्छे हैं. साजिद नाडियाडवाला ने पहली बार निर्देशन किया है और सलमान के फैंस निराश नहीं होंगे.

 

इस फिल्म में लॉजिक या ज़माने का सिनेमा तलाशने की ज़रूरत नहीं है. अगर आप सलमान के फैन हैं तो आपको ये फिल्म पसंद आएगी, अगर नहीं हैं तो भी ये आपको बुरी नहीं लगेगी. जैसा कि सलमान खान खुद ही इस फिल्म के एक डॉयलॉग में कहते हैं कि ‘मैं दिल में आता हूं समझ में नहीं.’

 

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