रिहाई के बाद बोले संजय दत्त- दोस्तों! आजादी की राह इतनी आसान नहीं...

By: | Last Updated: Thursday, 25 February 2016 12:02 PM
Sanjay Dutt salutes national flag at jail, says there is no easy walk to freedom

पुणे: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त पांच साल की सजा में कुछ छूट मिल जाने के बाद आज यरवदा जेल से बाहर आए गए. इसके साथ ही वह वर्ष 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी के तौर पर अपने विवादास्पद अतीत को पीछे छोड़ आए हैं.

नीली कमीज और जीन्स पहनकर मुस्कुराते हुए दत्त को औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आज सुबह जेल से बाहर लाया गया. वह एक कार में बैठे, जिसे चलाकर वह सीधे लोहेगांव हवाईअड्डे चले गए जहां उन्हें मुंबई जाने के लिए चार्टेड विमान पकड़ना था.  रिहाई के बाद संजय दत्त ने मीडिया से बात नहीं की, लेकिन एयरपोर्ट जाते समय संजय दत्त से सभी फैंन्स और समर्थकों को धन्यवाद दिया और कहा कि ‘आजादी इतनी आसान नहीं है. उनके (फैंस) की वजह से मैं यहां हूं.’

बड़े पर्दे के 56 वर्षीय ‘खलनायक’ ने जेल के शीर्ष पर फहर रहे तिरंगे को सलाम किया. अपने साथ वह अपने सामान का बैग और अपनी फाइल लेकर निकले थे. संजय की पत्नी मान्यता और जाने माने फिल्मकार राजकुमार हिरानी शहर के हवाईअड्डे तक उनके साथ गए.

रूपहले पर्दे के ‘मुन्नाभाई’ ने जेल के बाहर इंतजार कर रही कार में बैठने से पहले मिट्टी को नमन किया. उस समय उनके हाथ में खाकी रंग का बैग और हरे रंग की फाइल थी.

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इसी बीच, संजय के स्वागत के लिए उपनगर बांद्रा स्थित उनके आवास को फूल मालाओं से सजाया गया था. उनकी इमारत ‘इंपीरियल हाइट्स’ के बाहर द्वार पर संजय के दिवंगत पिता और नेता सुनील दत्त की तस्वीर भी लगाई गई थी. तस्वीर के साथ संदेश लगा था, ‘‘दत्त साहब अमर रहें’’. संजय के घर के बाहर उनके प्रशंसक बेहद उत्सुकता के साथ इंतजार करते देखे गए. इलाके में ‘वेलकम बैक संजू बाबा’, ‘बांद्रा के लड़के संजय दत्त के वापस आने पर बांद्रावासी उनका स्वागत करते हैं’ जैसे होर्डिंग लगाए गए थे. इनमें संजय की छोटी उम्र की तस्वीर भी लगाई गई, जिसमें वह अपनी मां के साथ नजर आ रहे हैं. संजय के आवास वाली लेन में ऐसे कई होर्डिंग लगाए गए हैं.

आज सुबह 8.37 पर संजय दत्त को रिहा किया गया. संजय दत्त को लेने जेल के बाहर पत्नी मान्यता दत्त, राजकुमार हिरानी, और इसके उनके कुछ दोस्त जेल के बाहर मौजूद थे. मान्यता जेल के बाहर काफी देर से इंतजार कर रही थीं. संजय दत्त मीडिया से बात करना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उऩ्हें ऐसा नहीं करने दिया.

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संजय दत्त ने पांच साल की सजा की शेष अवधि के तौर पर यरवदा जेल में 42 माह बिताए. जल्दी-जल्दी पैरोल और छुट्टी मिलते रहने के कारण उनकी जेल की सजा विवादों में घिरी रही. आलोचकों का कहना था कि उन्हें यह विशेष सुविधा उनके सेलेब्रिटी होने के कारण दी जा रही है.

जेल प्रशासन और उनके वकीलों ने इन आरोपों से यह कहकर इंकार कर दिया कि 144 दिनों की छूट और उनकी पैरोल वाली छुट्टी जेल के नियमों और नियम पुस्तिका के अनुरूप है.

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को एके-56 राइफल रखने और फिर उसे नष्ट करने के कारण 19 अप्रैल 1993 को गिरफ्तार किया गया था. यह राइफल उन हथियारों और विस्फोटकों के जखीरे का हिस्सा थी, जो कि मार्च 1993 के श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों से पहले भारत में आया था. जांच और लंबे समय तक चली सुनवाई के दौरान संजय ने 18 माह जेल में बिताए. 31 जुलाई 2007 को मुंबई की टाडा अदालत ने उन्हें आम्र्स एक्ट के तहत छह साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही अदालत ने उनपर 25 हजार रूपए का जुर्माना भी लगाया.

वर्ष 2013 में, सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को तो बरकरार रखा लेकिन सजा को घटाकर पांच साल का कर दिया. इसके बाद संजय ने अपनी बाकी की सजा काटने के लिए आत्मसमर्पण कर दिया.

जेल के अधिकारियों के अनुसार, संजय को उनकी प्रकोष्ठ में कागज के लिफाफे बनाने का काम दिया गया था. जेल के सूत्रों ने कहा कि अभिनेता को बार-बार मिलने वाली पैरोल और छुट्टी बहस का मुद्दा बनी रही. संजय ने इंटरनल सर्विस जेल रेडियो के कार्यक्रमों में नियमित तौर पर भागीदारी की. कैद के दौरान उन्हें दिसंबर 2013 में 90 दिन की पैरोल दी गई. बाद में एक बार फिर 30 दिन की पैरोल मिली.

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Web Title: Sanjay Dutt salutes national flag at jail, says there is no easy walk to freedom
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