बॉलीवुड का सबसे बड़ा स्कैंडल: जल्द ही फिल्मी दुनिया की पूरी डर्टी पिक्चर सबके सामने आएगी

By: | Last Updated: Wednesday, 20 August 2014 3:16 PM
sensor board rakesh kumar_scandal

नई दिल्ली : बॉलीवुड का सबसे बड़ा स्कैंडल. फिल्म सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट के लिए घूसखोरी, इसी इल्जाम में गिरफ्तार हो चुके सेंसर बोर्ड के सीईओ राकेश कुमार को सस्पेंड किया जा चुका है. अब खबर ये है कि सीबीआई सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट दिलाने वाले 50 दलालों से पूछताछ करने जा रही है. हम आपको बता रहे हैं इस स्कैंडल से जुड़े कई गहरे राज . बात उस फिल्म की भी जो इसी शुक्रवार रिलीज होने वाली है.

 

पंजाबी भाषा में बनी फिल्म का नाम है कौम दे हीरे. ये फिल्म में 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या जैसा संवेदनशील मुद्दे पर बनी थी लेकिन ये फिल्म भी महीनों तक सेंसर बोर्ड के फैसले का इंतजार करती रही. शुक्रवार को रिलीज हो रही कौम दे हीरे फिल्म की रिलीज पर खुफिया विभाग भी आपत्ति जता चुका था लेकिन पिछले दिनों राकेश कुमार के कार्यकाल में इसे मंजूरी दे दी गई. अब ये फिल्म भी जांच के दायरे में हैं.

 

सिर्फ इतना ही नहीं सेंसर बोर्ड के सीईओ पद से सस्पेंड हो चुके राकेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद से एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. सबसे बड़ा आरोप ये है कि सेंसर बोर्ड के पूर्व सीईओ राकेश कुमार बाकायदा सेंसर बोर्ड में दलालों का एक रैकेट चला रहे थे.

 

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक राकेश कुमार से नाराज एजेंटों ने ही फिल्मों को मिलने वाले सर्टिफिकेट के इस सबसे बड़े स्कैंडल का खुलासा किया है. जांच के दायरे में आ गई हैं कई बड़ी फिल्में. सिर्फ इन फिल्मों पर ही नहीं, सीबीआई को जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक विज्ञापन राकेश कुमार की कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन गए थे.

 

बॉलीवुड का सबसे बड़ा स्कैंडल (पार्ट वन): कैसे दी गई सेंसर बोर्ड के सीईओ को घूस?  

ये भी कहा जा रहा है कि चाहे बॉलीवुड की हिंदी फिल्में हों या फिर क्षेत्रीय भाषा की छोटे बजट की फिल्में सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट लेने के लिए स्क्रीनिंग का काम सिर्फ उन्हें मिलता था जो राकेश कुमार के चहेते थे. अंग्रेजी अखबार मुंबई मिरर में छपी खबर के मुताबिक रेलवे विभास से सेंसर बोर्ड में नियुक्ति के बाद राकेश कुमार अपनी अधिकारी सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष लीला सैमसन की कोई परवाह नहीं की.

 

वह इस काम के लायक नहीं थे. लेकिन मंत्रालय ने खुद ही उन्हें नियुक्त किया था. मुझे लगता है कि बदलते हुए राजनीतिक माहौल में उन्हें ऊपर से निर्देश मिले थे कि वह बोर्ड के सदस्यों या मुझे रिपोर्ट ना करें बल्कि सीधे सूचना और प्रसारण मंत्रालय को रिपोर्ट करें.

 

जांच के मुताबिक राकेश कुमार बॉलीवुड के बड़े निर्माताओं से बिना एजेंटों के सीधे भी संपर्क करते थे और बदले में महंगे तोहफे लेते थे. एबीपी न्यूज को जानकारी मिली है उसके मुताबिक किक, सिंघम रिटर्न्स, बॉबी जासूस, हंपटी शर्मा की दुल्हनिया और इंटरटेनमेंट जैसी बड़ी फिल्मों को सेंसर सर्टिफिकेट के लिए सौदेबाजी की खबर एजेंटों ने ही सीबीआई को दी है लेकिन सीबीआई अब तक इसकी पुष्टि नहीं कर पाई है लेकिन ये फिल्में जांच के दायरे में हैं.

 

सीबीआई का मानना है कि बॉलीवुड के इस सबसे बड़े स्कैंडल की जड़ें बेहद गहरी हैं और जल्द ही फिल्मी दुनिया की पूरी डर्टी पिक्चर सबके सामने आ जाएगी.

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Web Title: sensor board rakesh kumar_scandal
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