सेंसर बोर्ड की नियमावली में बदलाव की जरूरत है: शबाना आजमी

By: | Last Updated: Wednesday, 3 February 2016 11:14 AM
Shabana Azmi said Censor Board should  be broad minded

मुम्बई: राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री शबाना आजमी का कहना है कि सेंसर बोर्ड एक व्यापक सोच के साथ काम कर सकता है बशर्ते सिनेमैटोग्राफ कानून का पुनरीक्षण हो.

हाल में फिल्म निर्माता हंसल मेहता की आगामी फिल्म ‘‘अलीगढ़’’ के ट्रेलर को बोर्ड ने ‘ए’ सर्टिफिकेट दे दिया क्योंकि फिल्म समलैंगिकता पर आधारित है.

दीपा मेहता की 1996 में आयी विवादास्पद फिल्म ‘‘फायर’’ में अभिनय कर चुकी शबाना का मानना है कि सेंसर बोर्ड को ‘‘माडर्न फिल्म सर्टिफिकेशन’’ कहा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘‘वे वैसे व्यापक सोच वाले हो सकते हैं..लेकिन बात ये है कि वे कानून से बंधे हुए हैं, उससे जो भी नियमावली हो. नियमावली में बदलाव होना चाहिए. इसके लिए आमूल चूल परिवर्तन की जरूरत है.’’

शबाना ने कहा, ‘‘पहली बात आपको इसे माडर्न फिल्म सर्टिफिकेशन कहना चाहिए, आप उसे सेंसर बोर्ड नहीं कह सकते. जब आप उसे सेंसर बोर्ड कहते हैं आपको स्वाभाविक रूप से महसूस होता है कि आपको सेंसर करना है. आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप उसे प्रमाणित करेंगे, वर्गीकरण करेंगे. आपका काम ये है, सेंसर करना नहीं.’’

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Web Title: Shabana Azmi said Censor Board should be broad minded
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