'तलवार' में होगा आरूषि का 'डबल' मर्डर!

By: | Last Updated: Saturday, 12 September 2015 5:44 AM
Talwar Bollywood Movie

मुंबई:  ‘एक मिनट जरा मेरा फोन देना प्लीज…’ चलती प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच में जब मेघना गुलजार ने अपना मोबाइल फोन अपने एक साथी से मांगकर अपने हाथ में लिया तो लगा मानो उन्हें बरबस ही कुछ याद आ गया और ऐसे में शायद कोई इमेरजेंसी कॉल करना हो उन्हें.

 

मगर जब फोन मेघना के हाथ में आया तो नजरें गड़ाकर अपने फोन में कुछ तलाशने की प्रकिया उन्होंने कुछ सेकेंड्स में पूरी कर ली. फिर मेघना ने अपने फोन में दर्ज पापा गुलजार की लिखीं चंद वो लाइनें सुनाईं, जिसका अंदाजा वहां मौजूद तमाम लोगों में से किसी को नहीं था.

 

  • बस यही फर्क है हकीकत के होने और दिखाने में

  • उन्हें डर था कि वो बच ना जाए

  • आपको डर है कि उसे लग ना जाए

 

गुलजार ने शायराना अंदाज में ये लाइनें कब और क्यों लिखीं, ये वाकया दिलचस्प अंदाज में तब सामने आया, जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरूषि पर फिल्म बनाने के दौरान मेघना के जज्बातों का हाल पूछा गया. दरअसल, गुलजार एक दिन अपनी बेटी मेघना से मिलने और उनके निर्देशन में बन रही फिल्म ‘तलवार’ की शूटिंग देखने दिल्ली गए हुए थे. उस दिन मेघना आरूषि के कत्ल के भयावह मंजर को कैमरे में कैद करने की जद्दोजहद में लगी हुईं थीं. ऐसे में वहां मौजूद गुलजार, सिनेमाई पर्दे के लिए एक बार फिर कत्ल हो रही आरूषि (फिल्मी नाम श्रुति) की बेबसी के गवाह बने.

 

कत्ल का वो नकली मंजर देखकर गुलजार के असली जज्बातों ने अंगड़ाई ली और फिर गुलजार ने मौके पर लिखीं चंद लाइनों को मेघना के कानों तक पहुंचाया. आरूषि के कत्ल से जुड़े इस बहुआयामी और जटिल मसले को कुछ पंक्तियों में बयां करने की पापा की कवायद मेघना ने अपने फोन में टाइप कर ली थी.

 

मेघना से जब एबीपी न्यूज ने पूछा कि खुद एक फिल्ममेकर होने के नाते पापा को कैसी लगी फिल्म  तो मेघना मुस्कुराते हुए कुछ पलों के लिए चुप हो गईं और फिर कहां, ‘उन्हें पसंद आई…  मगर फिल्म देखने के बाद उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा’.

 

फिल्म के दूसरे प्रोमो लॉन्च के दौरान मेघना ने जोर देते हुए कहा, ‘फिल्म बनाते वक्त ज्यादा खतरा इस बात का था कि कहीं फिल्म सेंसेशनल ना बन जाए. ये ना तो हमारा मकसद था और ना ही हमारी ये नीयत थी’.   

 

नोएडा में एक ‘अच्छे’ घर से ताल्लुक रखनेवाली, 14 साल की आरूषि के मर्डर की गुत्थी सनसनीखेज अंदाज में महीनों तक सुर्खियों के जरिए लोगों के दिलो-दिमाग में कुछ तरह छाई रही कि अदालत के कटघरे तक पहुंचने से पहले ही ये मसला लोगों के जेहनी इंसाफ का शिकार हो चुका था. आरूषि के मर्डर के मोटिव को लेकर पुलिस सूत्रों से छन-छनकर आ रही खबरों के ऐसे-ऐसे आडंबर खड़े किए गए कि हमारी असामाजिक और सतही सोच की असलियत भी क्रूर ढंग से उजागर हो गई थी.

 

आरूषि और उसी दिन उसी घर में मार दिए नौकर हेमराज का कत्ल घर के पूर्व नौकर कृष्णा ने किया था या फिर आरूषि की जान उसके मां-बाप नुपूर और रमेश तलवार ने ली थी?  ये सवाल राष्ट्रीय बहस का मसला तो बन गया, मगर जवाब किसी के पास नहीं था. सीधा जवाब मेघना की फिल्म ‘तलवार’ से भी नहीं मिलेगा. 

‘तलवार’ खुद जांच एजेंसियों की छानबीन से पनपीं और गढ़ी गईं कहानियों और तमाम तरह की खामियों के सिलसिले के बीच कातिलों को तलाशने की कोशिश करती नजर आएगी. ‘इसलिए फिल्म में दो बार अलग-अलग अंदाज में आरूषि का मर्डर होता हुआ दिखाई देगा… फिल्म का दी एंड तो होगा, मगर हमने कंक्लूजन (निष्कर्ष) निकालने का काम फिल्म देखने जानेवाले दर्शकों पर छोड़ दिया है’.

 

‘भले ही फिल्म में आरूषि मर्डर के दोनों पहलुओं और अलग-अलग नजरिए को सामने लाने की कोशिश की है आपने, मगर आप खुद किस ‘सच’ पर यकीन करती हैं ?’ मेघना ने एबीपी न्यूज के पूछे इस सवाल पर अपना संक्षिप्त-सा जवाब पेश करते हुए कहा, ‘वो मैं अभी नहीं बताऊंगी, इससे फिल्म देखने का आपका नजरिया प्रभावित होगा’. 

 

अपने ही घर में अपनों के बीच रहस्यमीय अंदाज में क्रूर ढंग से कत्ल का शिकार और फिर मरकर, पूरे परिवार के साथ बेआबरू होनेवाली आरूषि पर बनी फिल्म ‘तलवार’  दर्शकों की सोचने की शक्ति को किस कदर प्रभावित करती है, ये देखना वाकई दिलचस्प होगा.

 

 

क्लिक करके देखें तलवार का ट्रेलर-